कोरोना का कहर, मई में एयर इंडिया के 5 सीनियर पायलटों ने गंवाई जान
नई दिल्ली, 3 जून। कोविड-19 की दूसरी लहर ने अप्रैल और मई में देश भर में कहर बरपाया था। इस बीच ये जानकारी सामने आई है कि कोरोना वायरस की चपेट में आकर एयर इंडिया के 5 पायलटों की मई महीने में मौत हो गई थी। एयर इंडिया और पायलट यूनियन ने इस बारे में पुष्टि की है।

एयर इंडिया के सूत्रों ने बताया है कि कोविड से जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन प्रसाद कर्मकार, कैप्टन संदीप राणा, कैप्टन अमितेश प्रसाद, कैप्टन जीपीएस गिल और कैप्टन हर्ष तिवारी शामिल हैं। 37 वर्षीय तिवारी की 30 मई को मौत हो गई थी। वह बोइंग 777 विमान के फर्स्ट ऑफिसर थे।
जहां एक तरफ फ्रंट लाइन वर्कर कोरोना के खिलाफ लगे हुए थे वहीं एयर इंडिया भी वंदे भारत मिशन समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रखे हुए थी। यही वजह है कि एयर इंडिया के पायलट लगातार वैक्सीन दिए जाने की मांग कर रही थी।
4 मई को पायलटों द्वारा टीकाकरण नहीं करने पर उड़ान बंद करने की धमकी भी दी जिसके बाद एयर इंडिया जागी और उसने कहा कि महीने के अंत तक अपने सभी कर्मचारियों को टीका लगाने के लिए शिविर आयोजित करेगी। एयर इंडिया ने इन शिविरों की तैयारी भी की लेकिन टीके न उपलब्ध होने के कारण इसके तीन शिविरों को रद्द कर दिया गया था और टीकाकरण अभियान 15 मई को देरी से शुरू हुआ। इसमें सबसे पहले 45 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए शिविर आयोजित किए गए थे।
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पायलट एसोसिएशन ने की थी मांग
इंडियन कॉमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) बड़े विमानों को उड़ाने वाले पायलटों का प्रतिनिधित्व करता है। आईसीपीए ने एयर इंडिया के निदेशक (ऑपरेशन) कैप्टन आरएस संधू को मंगलवार पत्र लिखा था जिसमें कहा था "पायलट क्वारंटाइन हो रहे हैं, उनके टेस्ट पॉजिटिव आ रहे हैं और उनकी कोविड से मौत हो रही है जिसकी दर खतरनाक है।" पत्र में कहा गया है कि "परिवार के सदस्य भी इस घातक वायरस से पीड़ित होकर दम तोड़ रहे हैं। हमें वीबीएम (वंदे भारत मिशन) उड़ानों के संचालन के बाद घर लौटने पर परिवार के सदस्यों में संक्रमित फैलाने का डर है। इस माहौल में हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने और अपने परिवारों को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी के समर्थन की आवश्यकता है।"
यही नहीं 14 अप्रैल को आईसीपीए ने डीजीसीए को पत्र लिखकर पायलटों को उड़ान से पहले और उड़ान के बाद अनिवार्य ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट से छूट दिए जाने की मांग की थी। पिछले साल महामारी के आरंभ में मार्च में सभी ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट को बंद किया गया था लेकिन केस में गिरावट के बाद इसे पिछले साल सितम्बर में फिर से शुरू कर दिया गया था।












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