Karnataka New CM: सिद्धारमैया की 5 खूबियां, जो DK शिवकुमार पर भारी पड़ीं

Siddaramaiah vs DK Shivakumar: कर्नाटक में सीएम पद की दावेदारी को लेकर लगातार चार दिनों की बैठक के बाद सिद्धारमैया ने बाजी मार ही ली। सिद्धारमैया ही कर्नाटक के अगले सीएम होंगे जबकि डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री होंगे।

Siddaramaiah Dk Shivakumar

कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर चल रही माथापच्ची आखिरकार समाप्त हो गई। पार्टी आलाकमान ने एक बार फिर से सिद्धारमैया पर ही भरोसा जताया है। यानी सिद्धारमैया ही इस बार भी कांग्रेस पार्टी की तरफ से कर्नाटक के मुख्यमंत्री होंगे। वे 20 मई को शपथ लेंगे। वहीं डीके शिवकुमार डिप्टी सीएम के पद से संतोष करना पड़ा। चलिए जानते हैं सिद्धारमैया की ऐसी कौन सी 5 खूबियां हैं जो डीके शिवकुमार पर भारी पड़ रही हैं।

सिद्धारमैया की 5 खूबियां
1. सोशल इंजीनियरिंग के मामले में सिद्धारमैया को कांग्रेस का एक नंबर नेता माना जा रहा है। उन्हें कर्नाटक में अहिंदा समीकरण का जनक कहा जाता है। अहिंदा का मतलब अल्पसंख्यातारु (अल्पसंख्यक), हिंदूलिद्वारू (पिछड़ा वर्ग) और दलितारु (दलित वर्ग) होता है। अहिंदा समीकरण के तहत सिद्धारमैया का फोकस राज्य की 61 प्रतिशत आबादी थी।

2. सिद्धारमैया के ऊपर भ्रष्टाचार के कोई आरोप नहीं हैं। उन्हें राज्य में सबसे साफ छवि का नेता माना जाता है।

3. सिद्धारमैया का मुस्लिम समुदाय में अच्छी पैठ मानी जाती है। क्योंकि 2013 से 2018 तक जब तक वे सीएम रहे
इस दौरान उन्होंने टीपू सुल्तान को कर्नाटक में नायक के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की।

4.कुरबा जाति पर सिद्धारमैया की पूरी पकड़ है। राज्य में इसकी तीसरी सबसे अधिक आबादी है । साथ ही सिद्धारमैया को राज्य में बड़ा ओबीसी नेता माना जाता है।

5. जानकारी के मुताबिक विधायकों में भी करीब 60 फीसदी सिद्धरमैया का समर्थन करते नजर आ रहे थे। 2013 में जब मल्लिकार्जुन खरगे को सीएम बनाने की बात सामने आई तो सिद्धारमैया ने लगभग 70 फीसदी विधायकों को अपने पाले में ले लिया, जिसका नतीजा ये रहा कि जेडीएस से आए सिद्धारमैया को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद दे दिया।

सीएम की रेस में क्यों पीछे रह गए डीके शिवकुमार
1.डीके शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत 19 मामले दर्ज हैं। वे जेल भी जा चुके हैं। उनके खिलाफ कई मामलों की जांच अभी भी चल रही है। ऐसे में कांग्रेस अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाती तो भाजपा इसे मुद्दा बना सकती थी।

2.नई दिल्ली में छापेमारी के दौरान चार परिसर से 8.5 करोड़ रुपये जब्त किए गए थे, जिसका आरोप सीधे डीके शिवकुमार पर लगे थे। आईटी विभाग को नई दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव में खरीदे गए तीन फ्लैट भी मिले, जो कथित तौर पर शिवकुमार से जुड़े थे।

3.डीके शिवकुमार के पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है इसलिए भी कांग्रेस अभी इस संकट की स्थिति में कोई रिस्क लेना नहीं चाही।

4.सीबीआई के नए डायरेक्टर प्रवीण सूद डीके के मुख्यमंत्री बनते ही खोल सकते हैं फाइल

5.वोक्कालिगा छोड़कर अन्य समुदाय पर कोई खास पकड़ नहीं

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