पिछले सात महीनों में 32 बाघ शिकारियों की भेंट चढ़े
नई दिल्ली। तमाम कोशिशों के बाद भी देश में बाघों के मरने का सिलसिला नहीं रुक रहा है। ताजा रिपोर्ट में तमाम जागरुकता अभियान के बावजूद भी इस साल पिछले सात महीनों में 41 बाघों की मौत हो गयी है।

भारत की राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अथारिटी व वन्यजीव संस्था ट्रैफिक का कहना है कि 41 बाघों में से सिर्फ 7 बाघों की प्राकृतिक मौत हुई है। इन सात बाघों में से एक बाघ को वन्य अधिकारियों ने मार दिया था जबकि बाकी के बाघों की अवैध तरीके से शिकार करके मार दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की सुरक्षा के लिए देश की सरकार इंतजामों को पुख्ता तरीके से नहीं कर रहे हैं। बाघ का शिकार करने वालों के हौसले इस कदर बुलंद हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2014 से 66 बाघों की मौत शिकार के चलते हुई है।












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