गुजरात दंगा: सरदारपुरा केस के 14 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, इस दौरान समाज सेवा करने को कहा

नई दिल्ली। साल 2002 के गुजरात दंगे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 दोषियों की जमानत की अर्जी मंजूर कर ली है। ये सभी सरदारपुरा नरसंहार केस में दोषी करार दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने दोषियों की जमानत मंजूर करते हुए इस अवधि के दौरान उनको सामाजिक कार्य करने को कहा। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि वे जमानत पर रहने के दौरान राज्य (गुजरात) में दाखिल नहीं होंगे।

2002 Gujarat riots case: Supreme Court grants bail to 14 convicts in the Sardarpura village case

मध्य प्रदेश के इंदौर और जबलपुर में जिला प्रशासन को दोषियों द्वारा आध्यात्मिक और सामाजिक कार्य किया जाना सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। ये मामला सदरपुरा गांव में 33 मुस्लिमों को जिंदा जलाए जाने से जुड़ा है। इनमें अधिकतर बच्चे और महिलाएं शामिल थीं। गोधरा में 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में एक समुदाय की भीड़ ने आग लगा दी थी, जिसमें 59 कारसेवक जलकर मर गए थे। इसके बाद पूरे गुजरात में दंगा भड़क उठा था।

सरदारपुरा केस में 76 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें दो की ट्रायल के दौरान मौत हो गई जबकि एक नाबालिग था। इसके बाद 73 आरोपियों का ट्रायल शुरू हुआ था। निचली अदालत ने इस मामले में 42 को आरोपों से बरी कर दिया था जबकि 31 दोषी पाए गए थे। इसके बाद SIT ने 42 में से 31 के बरी किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

एसआईटी कोर्ट ने सरदारपुरा और आसपास के गांवों के 73 लोगों के खिलाफ तीन साल की सुनवाई के बाद मामले में कुल 31 आरोपियों को दोषी ठहराया था। हालांकि, अपील पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 14 को आरोपों से बरी कर दिया था। 2016 में, गुजरात हाईकोर्ट ने सरदारपुरा नरसंहार मामले में 17 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था।

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