2002 गोधरा केस: याकूब पटालिया को उम्रकैद की सजा

नई दिल्‍ली। 2002 के गोधरा कांड में अहमदाबाद की एक विशेष एसआईटी अदालत ने बुधवार को याकूब पटालिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जानकारी के मुताबिक, साबरमती केंद्रीय जेल परिसर में अतिरिक्ति सेशन जज एचसी वोरा ने गोधरा कांड के एक अन्य दोषी को आजीवन कैद की सजा सुनाई है। करीब 16 साल से फरार याकूब अब्दुल गनी पटालिया साबरमती एक्सप्रेस के एस 6 कोच पर पथराव व तोड़फोड़ कर पेट्रोल डालकर जलाने में शामिल था, इस घटना में 58 कारसेवक जिंदा जल गए थे।

2002 गोधरा केस: याकूब पटालिया को उम्रकैद की सजा

याकूब के खिलाफ सितंबर 2002 में एफआईआर दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद उसपर हत्या की कोशिश सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी वह गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग रहा था। इस मामले में याकूब के भाई कादिर पटालिया को 2015 में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान कादिर की जेल में ही मौत हो गई थी। अक्टूबर, 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा कांड में 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला था, जबकि अन्य 20 मुजरिमों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

इससे पहले निचली अदालत ने 31 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 63 को बरी कर दिया था। सरकारी वकील नरेंद्र प्रजापति ने बताया कि आरोपित याकूब लंबे समय से फरार था। 27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर कारसेवकों को जिंदा जलाने की साजिश में वह शामिल था। 26 फरवरी को स्टेशन के पास अमन गेस्ट हाउस पर 140 लीटर पेट्रोल एकत्र कर गोधरा स्टेशन के आगे साबरमती एक्सप्रेस को रोककर हमला कर पेट्रोल डालकर जलाने की साजिश में वह शामिल था। इस मामले में विशेष अदालत की ओर से 11 को फांसी व 22 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। आठ आरोपित अभी भी फरार हैं।

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