क्या है 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट' केस, जिसमें AAP के 20 विधायकों की सदस्यता को है खतरा
नई दिल्ली। 'लाभ के पद' मामले में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ती दिख रही है। दिल्ली में चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई जिसमें ऐसी खबर है कि चुनाव आयोग ने विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राष्ट्रपति कार्यालय को भेज दी है। अब इस मामले में आखिरी फैसला राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से लिया जाएगा कि इन 20 विधायकों की सदस्यता रहेगी या जाएगी। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि आखिर 'लाभ के पद' का पूरा मामला क्या है, जिसको लेकर दिल्ली में सियासत गरमाई है...

AAP के विधायकों की सदस्यता जाने का खतरा
आम आदमी पार्टी के विधायकों को लेकर 'लाभ के पद' का पूरा मामला मई 2015 में सामने आया था जब केजरीवाल सरकार ने अपने मंत्रियों के लिए विधायकों को ही संसदीय सचिव के पद पर तैनात किया था। इसको लेकर प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी और कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। इस मामले में प्रशांत पटेल नाम के शख्स ने राष्ट्रपति के पास याचिका दायर करके आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी के 21 विधायक लाभ के पद पर हैं, इसलिए इनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। पंजाब चुनाव के दौरान जरनैल सिंह ने आम आदमी पार्टी के विधायक का पद छोड़ दिया था।

क्या होगा 20 विधायकों का?
दिल्ली सरकार ने विधानसभा में रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, हालांकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली सरकार के उस बिल को मंजूरी देने से मना कर दिया। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता पर खतरा बढ़ गया था। राष्ट्रपति की ओर से उस समय पूरे मामले पर चुनाव आयोग से जांच करके रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। इसी मामले में मीडिया रिपोर्ट्स में है कि चुनाव आयोग ने 20 आम आदमी पार्टी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की है। अगर राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सिफारिश मान लेते हैं तो दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

क्या होता है 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट'
ऑफिस ऑफ प्रॉफिट की कोई स्पष्ट परिभाषा उपलब्ध नहीं है। ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में संविधान के आर्टिकल 102 (1) (ए) के तहत सांसद या विधायक ऐसे किसी और पद पर नहीं हो सकता, जहां अलग से सैलरी, अलाउंस या बाकी फायदे मिलते हों। इसके अलावा आर्टिकल 191 (1)(ए) और पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव एक्ट के सेक्शन 9 (ए) के तहत भी ऑफिस ऑफ प्रॉफिट में सांसदों-विधायकों को दूसरा पद लेने से रोकने का प्रावधान है। संविधान की गरिमा के तहत ‘लाभ के पद' पर बैठा कोई व्यक्ति उसी वक्त विधायिका का हिस्सा नहीं हो सकता।

इन विधायकों पर लटकी है तलवार
1. जरनैल सिंह, तिलक नगर
2. नरेश यादव, मेहरौली
3. अल्का लांबा, चांदनी चौक
4. प्रवीण कुमार, जंगपुरा
5. राजेश ऋषि, जनकपुरी
6. राजेश गुप्ता, वज़ीरपुर
7. मदन लाल, कस्तूरबा नगर
8. विजेंद्र गर्ग, राजिंदर नगर
9. अवतार सिंह, कालकाजी
10. शरद चौहान, नरेला
11. सरिता सिंह, रोहताश नगर
12. संजीव झा, बुराड़ी
13. सोम दत्त, सदर बाज़ार
14. शिव चरण गोयल, मोती नगर
15. अनिल कुमार बाजपेई, गांधी नगर
16. मनोज कुमार, कोंडली
17. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर
18. सुखबीर दलाल, मुंडका
19. कैलाश गहलोत, नजफ़गढ़
20. आदर्श शास्त्री, द्वारका












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