'ऐसी होती हैं हमारे देश की बेटियां' 15 साल की बासु ने 6 लोगों को दिया जीवनदान

32 साल की मां के लिए संजीवनी बनी 15 साल की बासु। सांसें थमने के बाद भी 15 साल की बासु ने 6 लोगों को दिया जीवनदान। 15 year child basu organ donation saved 6 lives

नई दिल्ली, 25 अगस्त : भारत की बेटियां वैश्विक पटल पर अपनी प्रतिभा से परचम तो लहराती ही हैं, लेकिन इस देश की माटी में कुछ तो बात जरूर है, जिसके कायल होकर शायर अल्लामा इकबाल ने लिखा- 'कुछ बात है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी।' ये दास्तां एक ऐसी बेटी की है जिसने महज 15 साल की आयु में 6 लोगों को नई जिंदगी दे दी। कहानी दैनिक मजदूरी करने वाली सात बच्चों की मां अजो मांजी की लाडली 15 वर्षीय बासु की है। 32 साल की मां के शरीर में आज भी बासु का दिल धड़क रहा है। सरकारी अस्पताल में पहले हार्ट ट्रांसप्लांट का भी कीर्तिमान बना।

15 year child basu organ donation

मरकर भी अमर बासु

इस नन्ही सी जान का अंगदान से 6 लोगों के लिए संजीवनी बनी और इन लोगों को नई जिंदगी मिली। कहना गलत नहीं होगा कि बासु भले ही सशरीर हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन वे मरकर भी अमर हो गई हैं। खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बासु की सराहना की है। सोशल मीडिया यूजर ने बासु की कहानी पर लिखा, 'ऐसी होती हैं हमारे देश की बेटियां।' पढ़ें प्रेरक कहानी

6 लोग ऑर्गन डोनेशन के जरिए बचे

6 लोग ऑर्गन डोनेशन के जरिए बचे

सड़क हादसों में होने वाली मौतें कई लोगों का जीवन तबाह कर देती हैं। हालांकि, अगर किसी की मौत एक साथ 6 लोगों को जीवनदान का आधार बन जाए तो इसे चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता। ऐसी ही मौत चंडीगढ़ के अस्पताल में हुई। 15 साल की बच्ची की मौत 6 लोगों के लिए संजीवनी बन गई। डॉक्टरों की टीम गंभीर हेड इंजरी से जूझ रही बासु को बचाने में नाकाम रही, लेकिन 6 लोगों को ऑर्गन डोनेशन के जरिए बचा लिया गया।

15 अगस्त को हादसा, छह दिन बाद मौत

15 अगस्त को हादसा, छह दिन बाद मौत

संयोग देखिए कि 15 साल की बच्ची बासु 15 अगस्त को आजादी के उत्सव के दिन सड़क हादसे में घायल हुई। छह दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ती रही बासु को डॉक्टरों ने 20 अगस्त की सुबह ब्रेन डेड घोषित कर दिया। युवा बच्ची की अकाल मौत तो हुई, लेकिन बच्ची के आंतरिक अंग सलामत रहे और डॉक्टरों ने बासु की मां अजो मांजी को ऑर्गन डोनेशन का सुझाव दिया। उन्हें बताया गया कि मासूम बासु का दिल उसकी मौत के बावजूद धड़कता रहेगा। परिजनों की सहमति से बासु के हार्ट के अलावा किडनी, कॉर्निया, लिवर और पैंक्रियाज का डोनेशन किया गया।

डॉक्टरों ने वेंटिलेटर का सहारा लिया

डॉक्टरों ने वेंटिलेटर का सहारा लिया

20 अगस्त को हुई मौत के बाद बासु का दिल और बाकी अंगों को बचाने के लिए डॉक्टरों ने वेंटिलेटर का सहारा लिया। ऑर्गन ट्रांसप्लांट की सहमति मिलने के बाद 21 अगस्त को नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) ने PGIMER अस्पताल चंडीगढ़ में हार्ट की उपलब्धता का अलर्ट जारी किया। बासु के दिल के अलावा किडनी, कॉर्निया, लिवर और पैंक्रियाज निकालने के बाद डॉक्टरों की टीम ने सभी अंगों को दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पताल अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल को सोमवार 22 अगस्त को सौंप दिया गया।

बासु का दिल 32 वर्षीय मां लक्ष्मी देवी को

बासु का दिल 32 वर्षीय मां लक्ष्मी देवी को

बासु का दिल 32 साल की मां को लगाया गया। बिहार के भागलपुर की 32 वर्षीय मां लक्ष्मी देवी बच्चे के जन्म के बाद टर्मिनल हार्ट फेल्योर से जूझ रही थीं। बच्चे के जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी हो रही थी। RML अस्पताल में डॉक्टरों और हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ने लक्ष्मी देवी की जांच के बाद पाया कि हार्ट ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा। लक्ष्मी देवी का NOTTO में पंजीकरण कराया गया। NOTTO की मदद से जल्द से जल्द उपलब्ध डोनर से हार्ट लेकर मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाए।

नीचे देखें- इन डॉक्टरों ने बनाया हार्ट ट्रांसप्लांट का इतिहास

18 घंटे की सर्जरी में बना इतिहास

18 घंटे की सर्जरी में बना इतिहास

डॉ नरेंद्र सिंह झाझरिया के नेतृत्व में आरएमएल अस्पताल और एम्स के कार्डियक सर्जनों की एक टीम पीजीआई चंडीगढ़ पहुंची। डोनर के हार्ट को ग्रीन कॉरिडोर की मदद से 2 घंटे के भीतर चंडीगढ़ से नई दिल्ली लाया गया। एएनआई की रिपोर्ट में आरएमएल अस्पताल की निदेशक डॉ नंदिनी दुग्गल ने कहा, "यह एक बड़ी उपलब्धि है और वास्तव में आरएमएल के डॉक्टरों ने इतिहास बनाया है। टीम में शामिल एक अन्य डॉक्टर, विजय ग्रोवर ने कहा, 32 वर्षीय महिला 7-8 साल से पीड़ित थी। ट्रांसरप्लांट के बाद तबीयत ठीक है। 21 अगस्त की रात 9 बजे शुरू हुई सर्जरी करीब 18 घंटे चली। सर्जरी टीम में डॉ विजय ग्रोवर के अलावा डॉ मिलिंद होटे, डॉ नरेंद्र झाझरिया, डॉ पलाश अय्यर भी शामिल थे। अलग-अलग विषयों के कई अन्य डॉक्टर भी शामिल हुए।

यहां पढ़ें- स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान

हार्ट ट्रांसप्लांट सरकारी अस्पताल में पहली बार !

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बासु की कहानी के बारे में ट्विटर पर लिखा, ऑर्गन डोनेशन सबसे बेशकीमती और जीवन बचाने वाला उपहार है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि भीषण सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद बासु को ब्रेन डेड घोषित किया गया, लेकिन बासु ने मौत से पहले 6 लोगों को जीवन दान दे दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार दिल्ली में जो सरकारी अस्पताल संचालित कर रही है, उनमें RML में पहली बार सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है। मुताबिक

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