यूपी में मंत्रियों-विधायकों पर 13,000 करोड़ रु. का बिजली बिल बकाया, ऐसे होगी वसूली
नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश में मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों आवासों और दफ्तरों पर 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। भविष्य में इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार ने सभी सरकारी बंगलों और कार्यालयों पर प्रीपेड मीटर लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा योगी सरकार ने बकाए बिल की वसूली के लिए भी एक विकल्प निकाला है, जिसमें किश्तों में बकाया राशि का भुगतान किया जा सकता है। इसके साथ ही राज्य सरकार बिजली चोरी रोकने के लिए भी कई तरह के कदम उठाए हैं और उन गांवों को इनाम देने का भी वादा किया है, जहां लाइन लॉस 15 % से कम होगी। लेकिन, जिस तरह से नेताओं और अधिकारियों पर 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बिजली बिल के बकाए का खुलासा हुआ उससे साफ जाहिर है कि अबतक इस मसले पर वहां कितनी लापरवाही की गई है।

किश्तों में भुगतान का विकल्प
यूपी में सरकारी विभागों, आवासों, थानों, अस्पतालों ने लगभग दो दशकों का बिजली बिल बकाया रखा है। लेकिन, अब यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार सरकारी आवासों और दफ्तरों पर बिजली बिल के बढ़ते बकाए को और ज्यादा झेलने के लिए तैयार नहीं है। इसके लिए सरकार ने इन बंगलों और कार्यालयों के लिए 1 लाख प्रीपेड मीटर मंगवाने का आदेश भी जारी कर दिया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, "सरकारी दफ्तरों और आवासों पर बकाया 13,000 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। इतनी बड़ी रकम की वसूली के लिए हमनें किश्तों में पैसे जमा करने का विकल्प दिया है। हमनें 1 लाख प्रीपेड मीटर मंगवाने का भी आदेश दिया है, जो कि नेताओं और अधिकारियों के सरकारी कार्यालयों, आवासों पर लगाए जाएंगे।' शर्मा ने ये भी कहा कि "यह बहुत जरूरी है कि लोग बिजली बिल का समय पर भुगतान करें। इससे हमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उचित दरों पर निर्वाध बिजली की आपूर्ति में मदद मिलेगी।"

15 नवंबर से लगाए जाएंगे प्रीपेड मीटर
भविष्य में सरकारी आवासों और दफ्तरों पर बिजली बिल का बकाया न रहे, इसके लिए 15 नवंबर से इन जगहों पर प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू हो जाएगा। सबसे पहले ऊर्जा मंत्री के सरकारी आवास लखनऊ के कालिदास मार्ग पर ही प्रीपेड मीटर लगाया जाएगा। इसके बाद राज्यभर के सभी सरकारी दफ्तरों और आवासों पर प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। प्रदेश के ऊर्जा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सिंचाई विभाग पर 2,656 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है, जबकि शहरी विकास विभाग पर उससे भी करीब एक हजार करोड़ रुपये ज्यादा 3636.18 करोड़ रुपया बाकी है।

15% से कम लाइन लॉस वाले गांवों में 24 घंटे बिजली
इसके अलावा प्रदेश में बिजली चोरी भी बहुत बड़ी समस्या है। इसे रोकने के लिए यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने राज्य के 75 जिलों में अलग से 68 थाने खोल रखे हैं, जो सिर्फ बिजली चोरी से जुड़े मामलों को देखते हैं। राज्य सरकार ने इन थानों के लिए 2,050 पद मंजूर किए हुए हैं, जिसमें 75 इंस्पेक्टर और 375 सब-इंस्पेक्टरों के पद भी शामिल हैं। इन पुलिस वालों की सैलरी का भार यूपीपीसीएल को उठाना है। यहां काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों की जिम्मेदारी ये है कि वो बिजली चोरी पर लगाम लगाएं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। इसके अलावा राज्य सरकार ने ये भी तय किया है कि जिन गांव में लाइन लॉस की दर 15% से कम होगी उस गांव में 24 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।












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