10 Minute Delivery का दावा हटा? गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर Blinkit-Swiggy-Zomato का बड़ा फैसला
10 Minute Delivery Apps: क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी की दुनिया में अब बड़ा बदलाव 2026 में देखने को मिलेगा। ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और जोमैटो जैसी कंपनियां, जो '10 मिनट में डिलीवरी' को अपना सबसे बड़ा मार्केटिंग हुक बनाती आई हैं, अब इस दावे पर दबाव महसूस कर रही हैं। यही वजह है कि ब्लिंकिट, जेप्ट, स्वीगी और जोमैटो के बीच बड़ी बैठक हुई और गिग वर्कर्स को बड़ी राहत देते हुए 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटाने पर चर्चा हुई।
आपको बात दें कि दिसंबर 2025 के अंत में गिग वर्कर्स (डिलीवरी राइडर्स) की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बाद, ये प्लेटफॉर्म्स डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर रिव्यू कर रहे हैं। क्या सच में 10 मिनट का दावा हट रहा है? या सिर्फ प्रेशर कम करने की कोशिश? आइए, फैक्ट्स, हड़ताल की वजह, राघव चड्ढा की भूमिका और कंपनियों के रिस्पॉन्स के साथ इसकी गहराई में उतरते हैं...

क्या हुआ? 10 मिनट डिलीवरी पर बड़ा झटका
दिसंबर 2025 के आखिर में, खासकर 31 दिसंबर (न्यू ईयर ईव) को, लाखों डिलीवरी पार्टनर्स ने Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर काम करना बंद कर दिया। यूनियंस जैसे Telangana Gig and Platform Workers Union (TGPWU) और Indian Federation of App-based Transport Workers (IFAT) ने हड़ताल बुलाई, जिसमें मुख्य डिमांड थी:-
- 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को पूरी तरह खत्म करना
- फेयर पे, ट्रांसपेरेंट इनकम और मिनिमम वेज (कई ने ₹40,000 मासिक की मांग की)
- एक्सीडेंट इंश्योरेंस, हेल्थ कवर, सोशल सिक्योरिटी और रेस्ट ब्रेक्स
- मनमाने अकाउंट डीएक्टिवेशन और एल्गोरिदमिक प्रेशर खत्म करना
हड़ताल ने न्यू ईयर ईव पर बड़े पैमाने पर डिलीवरी प्रभावित की, हालांकि कंपनियां दावा करती हैं कि ऑर्डर्स रिकॉर्ड हाई (Zomato-Blinkit ने 75 लाख+ ऑर्डर्स) रहे और स्ट्राइक का असर कम था। लेकिन यूनियंस का कहना है कि 60% ऑर्डर्स में देरी हुई और कंपनियों ने ₹3,000 तक डेली इंसेंटिव देकर राइडर्स को काम पर रखा।
इस हड़ताल के बाद, प्लेटफॉर्म्स पर 10 मिनट का प्रॉमिस अब दबाव आ गया। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि कंपनियां डिलीवरी टाइमलाइन को रिवाइज करने पर विचार कर रही हैं, क्योंकि राइडर्स की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि '10 मिनट में डिलीवरी' का दावा हटाकर मार्केटिंग में इसे कम जोर देने या 15-20 मिनट की रियलिस्टिक टाइमिंग पर शिफ्ट होने की बात हो सकती है।
गिग वर्कर्स की असली समस्या क्या है?
ये सिर्फ 10 मिनट की बात नहीं, बल्कि पूरी गिग इकॉनमी की चुनौतियां हैं:-
- कम और अनिश्चित कमाई: प्रति ऑर्डर बहुत कम पे, ईंधन-मेंटेनेंस खुद बियर करना पड़ता है। कई राइडर्स 12-14 घंटे काम करते हैं, लेकिन ओवरटाइम नहीं मिलता।
- सुरक्षा का खतरा: तेज ड्राइविंग से एक्सीडेंट्स, इंजरी और मेंटल स्ट्रेस बढ़ा। ट्रैफिक वाली भारतीय सड़कों पर 3 किमी में 10 मिनट मुश्किल।
- सोशल सिक्योरिटी की कमी : कोई हेल्थ इंश्योरेंस, पेंशन, छुट्टियां या बीमारी पर सपोर्ट नहीं। बीमार हुए तो इनकम जीरो।
- एल्गोरिदम का प्रेशर : रेटिंग कम होने पर अकाउंट ब्लॉक, बिना वजह पेनल्टी।
एक वायरल वीडियो में एक Blinkit राइडर ने अपनी कम कमाई और संघर्ष बताए, जिसने सोशल मीडिया पर आक्रोश फैलाया।
Raghav Chadha Role: क्या रही राघव चड्ढा की भूमिका? संसद से सड़क तक
- AAP राज्या सभा MP राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स के मुद्दे उठा रहे हैं। दिसंबर 2025 के विंटर सेशन में उन्होंने संसद में जोरदार बहस की:-
- डिलीवरी बॉयज, राइडर्स और गिग वर्कर्स को ' दास' की तरह इस्तेमाल न करने की मांग।
- 10 मिनट डिलीवरी को ' क्रूर और अमानवीय' बताया, जो राइडर्स को रेकलेस ड्राइविंग के लिए मजबूर करता है।
- फेयर वेज, डिग्निटी, प्रोटेक्शन और सोशल सिक्योरिटी की डिमांड।
हड़ताल के दौरान चड्ढा ने एक Blinkit राइडर के साथ पूरा दिन बिताया - यूनिफॉर्म पहना, स्कूटर पर पिलियन बैठे डिलीवरी की, और ग्राउंड लेवल की रियलिटी समझी। उन्होंने इसे ' ग्रासरूट एक्सपीरियंस' बताया और कंपनियों से डायलॉग की अपील की। चड्ढा ने कहा, ' भारत की ग्रोथ exploitation पर नहीं, डिग्निटी और जस्टिस पर चलनी चाहिए।'
कंपनियों का पक्ष: क्या कहते हैं CEO?
Zomato और Blinkit के CEO Deepinder Goyal ने X पर कई पोस्ट्स में दावा किया:-
- 10 मिनट डिलीवरी स्पीड से नहीं, बल्कि डार्क स्टोर्स की डेंसिटी से होती है। औसत डिस्टेंस 2 किमी, स्पीड 16 km/h - ओवर-स्पीडिंग नहीं।
- राइडर्स को टाइमर नहीं दिखता, सिर्फ कस्टमर को। औसत कमाई ₹102/घंटा (फ्यूल कटाकर भी अच्छी)।
- गिग इकॉनमी exploitation नहीं, बल्कि unskilled जॉब के लिए अच्छा ऑप्शन।
फिर भी, शेयर मार्केट में Swiggy और Zomato के शेयर्स अक्टूबर से 20% गिरे हैं, जो इन्वेस्टर की चिंता दिखाता है।
ये बदलाव गिग इकॉनमी के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकता है। कस्टमर कन्वीनियंस महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी की जान और डिग्निटी से ज्यादा नहीं। क्या आप 10 मिनट के बदलाव पर तैयार हैं, या रियलिस्टिक टाइमलाइन बेहतर? समय बताएगा।
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