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अटल टनल निर्माण में आई थी ऐसी बाधा जिसे दूर करने में लगे 1400 दिन, विदेशों से बुलाने पड़े एक्सपर्ट्स

रोहतांग। हिमाचल प्रदेश में 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनकर तैयार हुई दुनिया की सबसे लंबी अटल टनल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को रोहतांग में उद्घाटन किया। इस दौरान मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं सीनियर मिलिट्री अफसर मौजूद रहे। उक्त सुरंग की लंबाई 9.2 किमी है, जिसे बनाने में 10 साल का वक्त लगा। इसके निर्माण कार्य में ऐसी कई बाधा आईं, जिन्हें दूर करने के लिए बाहर से विशेषज्ञ बुलाने पड़े। ऐसी समस्याओं के चलते ही 1400 दिन काम पूरा होने में लग गए।

10 हजार फीट ऊंचाई पर सबसे लंबी सड़क सुरंग

10 हजार फीट ऊंचाई पर सबसे लंबी सड़क सुरंग

संवाददाता ने बताया कि, इस टनल के निर्माण कार्य में दुनिया के कई शीर्ष विशेषज्ञों और सर्वश्रेष्ठ तकनीक का सहारा लेना पड़ा। बीआरओ की तल्लीनता से बाधा तो दूर हुईं, किंतु टनल पूरा होने का लक्ष्य भी आगे बढ़ गया। पहाड़ी के अंदर से जब टनल की राह निकाली जा रही थी, तो वहां एक छोटे से सुराख के जरिए पानी का तेज बहाव मिला। टनल पर लगे इंजीनियर उसे बंद करने का प्रयास करते, मगर उसका मुंह चौड़ा होता चला गया। एक बार तो ऐसा लगा जैसे सब कुछ बह जाएगा। लेकिन, बीआरओ भी हिम्मत कहां हारने वाला था। भले ही चार साल लगे, खर्च बढ़ा, लेकिन अटल टनल तैयार हो गई।

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    छोटे से छेद ने बड़ा बनकर मुश्किलें बढ़ाई थीं

    छोटे से छेद ने बड़ा बनकर मुश्किलें बढ़ाई थीं

    कर्नल सूरजपाल सिंह सांगवान, जो कि अब जम्मू-कश्मीर में एनएचआईडीसीएल पीएमयू अखनूर के प्रोजेक्ट पर बतौर जीएम (पी) काम कर रहे हैं, वे अटल टनल की साइट पर 2012 से 2015 के बीच कार्यरत रहे थे। उन्होंने बताया, ''बीआरओ ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया था। काम आगे बढ़ रहा था कि बीच में पहाड़ी के अंदर एक वाटर चैनल निकल आया। हालांकि, शुरू में वह तो एक छोटे से छेद की भांति था, लेकिन बाद में वहां से पानी ने ऐसी तेजी पकड़ी कि उसे रोक पाना मुश्किल हो गया। साइट पर जितने भी इंजीनियर थे, सब हैरान रह गए। हर एक इसी चिंता में डूबा था कि पानी का बहाव कैसे बंद हो। विश्व के कई देशों से तकनीकी एक्सपर्ट बुलाए गए। उपकरण और केमिकल भी लाना पड़ा।''

    हाई तकनीक की मदद से चैनलाइज किया गया

    हाई तकनीक की मदद से चैनलाइज किया गया

    बतौर सांगवान, ''पानी का बहाव इतना तेज हो चुका था कि उस पर लगाई गई हर सील टूट रही थी। बांध साइट पर जिस केमिकल और सीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है, उसकी मदद से छेद बंद करने की कोशिश की गई, लेकिन वह तरीका भी कामयाब नहीं हो सका। हाई तकनीक की मदद से चैनलाइज का काम शुरू हुआ। विदेशों से लाए गए केमिकल का इस्तेमाल करने से पहले वहां पानी के नीचे वेल्डिंग तकनीक के जरिए छेद बंद करने की मुहिम शुरू हुई। इसमें कामयाबी मिल गई।

    चार साल आगे खिसक गया था काम

    चार साल आगे खिसक गया था काम

    पानी का तेज बहाव बंद हो गया। कुछ दिन तक देखा गया कि वहां पानी का रिसाव या नमी जैसा कोई लक्षण नहीं दिख रहा है, इसके बाद इंजीनियरों ने आगे बढ़ना शुरू किया। यही वजह थी, जिसके चलते टनल का निर्माण कार्य चार साल आगे सरक गया। बहरहाल, इस टनल पर सर्विलांस के कई हाईटेक उपकरण लगाए गए हैं। वाहनों के गुजरने से लेकर और किसी भी आपात स्थिति में हर तरह का अलर्ट तकनीकी टीम के पास पहुंचेगा।

    घोड़े की नाल के आकार जैसी है टनल

    घोड़े की नाल के आकार जैसी है टनल

    अटल टनल दुनिया की सबसे लंबी हाइवे टनल है। इसकी निर्माण लागत करीब 3200 करोड़ रुपये बताई गई है। यह टनल देखने में घोड़े की नाल की आकार की लगती है। करीब 9.02 किलोमीटर लंबी इस टनल की मदद से मनाली सालभर लाहौल-स्पीति घाटी से जुड़ा रहेगा।

    भारी बर्फबारी के बीच भी ट्रांसपोर्ट चालू रहेगा

    भारी बर्फबारी के बीच भी ट्रांसपोर्ट चालू रहेगा

    मौजूदा समय में यही घाटी भारी बर्फबारी के चलते लगभग छह महीने तक अलग-थलग रहती है। इसके जरिए मनाली से लेह तक की दूरी तय करने में पांच घंटे कम लगेंगे। टनल चालू होने के बाद सड़क की दूरी भी करीब 46 किलोमीटर कम हो जाएगी।

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