हिमाचल चुनाव: बगावत से पहले कांग्रेस आलाकमान वीरभद्र के आगे झुका
शिमला। भाजपा की तरह कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व को लेकर कोई असंमजस का माहौल नहीं है। चुनावों में कांग्रेस एक बार फिर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर ही अपना दांव खेलेगी व चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़े जायेंगे। इसका ऐलान बाकायदा राष्टरीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी मंडी रैली के दौरान कर चुके हैं। भले ही वीरभद्र सिंह की बढ़ती उम्र व उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर इन दिनों विपक्षी दल भाजपा आक्रामक रुख अख्तियार किये हो लेकिन पार्टी के भीतर एक बार फिर वीरभद्र सिंह अपना जलवा दिखाने के लिये मैदान में हैं व उन्हें अपने आपको अब साबित करना होगा।

वीरभद्र ने दिखाए थे बगावती तेवर
हलांकि इन दिनों प्रदेश में भाजपा वीरभद्र सिंह को ही निशाने पर रख कर अपना प्रचार अभियान छेड़े हुए है। लेकिन कांग्रेस पार्टी की मंडी रैली में राहुल गांधी ने जिस तरीके से सीएम वीरभद्र सिंह व उनकी सरकार की खुलकर तारीफ की, उससे यह संदेश साफ है कि चुनाव वीरभद्र सिंह के ही नेतृत्व में लड़े जायेंगे। व वही पार्टी का चेहरा होंगे। दरअसल पार्टी आलाकमान वीरभद्र सिंह के दवाब के आगे झुकने को मजबूर हुआ है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि अगर समय रहते यह घोषणा न होती तो वीरभद्र सिंह पार्टी से बगावत कर जाते।

राहुल गांधी ने किया था ऐलान
उन्होंने पहले ही पिछले दिनों दिल्ली में राहुल गांधी के साथ अपनी बैठक के दौरा पार्टी प्रभारी सुशील कुमार शिन्दे की मौजूदगी में हुई बैठक के दौरान कह दिया था कि वह चुनाव उसी सूरत में लड़ेंगे, जब पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू को हटाया जाये। पार्टी को वीरभद्र सिंह की धमकियों से लगने लगा था, कि अगर वीरभद्र सिंह को समय रहते रोका नहीं गया, तो पार्टी को अच्छा खासा नुकसान होगा। यही वजह है कि पार्टी वीरभद्र सिंह के आगे झुकती नजर आ रही है।

सुक्खू की नहीं, वीरभद्र की ही चलेगी
हलांकि जिस तरीके बिहार व उत्तराखंड में पार्टी अध्यक्ष बदले गये , उस तरीके से हिमाचल अध्यक्ष को फिलहाल बदला तो नहीं गया है लेकिन हाईकमान ने वीरभद्र सिंह को फ्री हैंड देकर सुक्खू की चाहत पर पानी फेर कर रख दिया है। जिससे प्रदेश की राजनिति में नये समीकरण उभर कर सामने आमने आयेंगे। दरअसल कांग्रेस पार्टी में अब अंदखाते शह व मात का खेल खेला जायेगा। वीरभद्र सिंह विरोधी खेमा इस सबको पचा नहीं पा रहा है। चूंकि राहुल गांधी ने एक ही झटके में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, परिवहन मंत्री जी एस बाली जैसे नेताओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। वहीं पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू को अब दूसरों के लिये खुद अपने लिये टिकट पक्की करने के लिये जद्दोजहद करनी होगी। हालात साफ हैं कि अब पार्टी में सुक्खू की नहीं वीरभद्र सिंह ही चलेगी।

वीरभद्र सिंह के कद का कोई बड़ा नेता नहीं
पार्टी आलाकमान को वीरभद्र सिंह के दवाब के आगे यू ही नहीं झुकना पड़ा। प्रदेश में हालात ही ऐसे हैं कि कांग्रेस पार्टी के पास वीरभद्र सिंह के कद का कोई बड़ा नेता ही नहीं है। हलांकि सीएम की कुर्सी पर काबिज होने के लिये कइयों ने सपने संजोये है। पार्टी में सेंकड लाईन की लीडरशिप उभर ही नहीं पाई है। जो नेता उभरे उन्हें विवादों ने घेर लिया। कौल सिंह ठाकुर को तो उनकी कथित सेक्स आडियो टेप उनका पीछा नहीं छोड़ रही। वहीं जीएस बाली कभी भाजपा व कभी कांग्रेस में रहने को पैंतरेबाजी करते रहे, जिससे उनकी विश्वसनीयता घटी है। यही हाल आशा कुमारी का है। वह सीएम बनने का सपना संजोये हैं, लेकिन लोकप्रियता के मामले में वीरभद्र सिंह के सामने कहीं नहीं टिकती। पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू की जो हालत मंडी रैली में राहुल गांधी ने की है, उसे तो खुद सुक्खू ही समझ सकते हैं। हलांकि सुक्खू ने सभी चुनाव क्षेत्रों में पहले ही अपने मोहरे फिट कर रखे हैं व वह अपने आपको टिकट का प्रमुख दावेदार भी मान कर चल रहे हैं। अब देखना होगा कि टिकट आबंटन में भी वीरभद्र सिंह की चली तो उनका विरोधी खेमा क्या रूख अख्तियार करता है।












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