नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों के चंगुल से छूटे 3 भारतीय घर लौटे, रो पड़े मां-बाप

शिमला। नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों की ओर से बंधक बनाये गये तीनों हिमाचली युवक करीब साढ़े तीन महीने बाद वतन वापस लौट आये हैं जिससे उनके परिजनों में खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों से इन तीनों बंधकों की रिहाई संभव हो पाई है। कांगड़ा जिला के अजय कुमार , सुशील कुमार व पकंज कुमार को समुद्री लुटेरों ने 31 जनवरी को जहाज से पकड़ लिया था। लुटेरों ने 12 मार्च को सेटेलाइट फोन से सुशील धीमान के परिजनों को इस संबंध में जानकारी देकर 22 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी। इसके बाद 28 मार्च को फोन पर लुटेरों ने धमकी दी कि यदि दो दिन के भीतर फिरौती नहीं दी गई तो बंधकों को गोली मार दी जाएगी। उसके बाद आज तक कोई फोन नहीं आया है। इसी बीच तीनों युवकों के परिजनों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कांगड़ा के सांसद शांता कुमार से उनकी रिहाई की मांग की थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय हरकत में आया व शनिवार को तीनों दिल्ली पहुंचे व इसके बाद वे अपने पैतृक गांवों में पहुंचे।

लंब इंतजार के बाद वतन वापसी

लंब इंतजार के बाद वतन वापसी

लंबे इंतजार के बाद अपने बेटों को देख बुजु्र्ग मां-बाप की आंखों से आंसू बहने लगे जब नाइजीरिया में कैद कांगड़ा के तीनों युवक रविवार को अपने घर सकुशल लौट आए। नगरोटा बगवां की उस्तेहड़ पंचायत के पंकज कुमार, पालमपुर के अजय और नगरोटा सूरियां के ग्रुप कैप्टन सुशील धीमान अब अपने परिजनों संग खुश है। जिला के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विधायक भी इन युवाओं का स्वागत करने के लिए पहुंचे।

टापू पर लुटेरों ने रखा था, खाने को देते थे मैगी

टापू पर लुटेरों ने रखा था, खाने को देते थे मैगी

नगरोटा विधानसभा की उस्तेहड़ ग्राम पंचायत के पंकज कुमार की घर वापसी का पूरे गांववासियों के साथ-साथ नगरोटा बगवां के विधायक अरुण मेहरा ने रढ़ चौक पर स्वागत किया। इस खास मौके पर पंकज की मां सुलोचना देवी और पिता वेदप्रकाश ने पिछले चार महीने से बिछुड़े अपने लाडले के दीदार किए। पंकज कुमार ने बताया कि 72 दिन तक लुटरों ने उन्हें एक टापू में रखा था और खाने के नाम पर मैगी के महज एक या दो पैकेट ही मिलते थे और उसी से गुजारा करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि वह दोबारा वहां जाने के बारे फिलहाल सोच भी नहीं सकते। पंकज ने प्रदेश सरकार के साथ-साथ सांसद शांता कुमार, विधायक अरुण मेहरा और केंद्र सरकार का धन्यवाद किया है।

परिजनों के छलके आंसू

परिजनों के छलके आंसू

उधर, सुशील कुमार भी नगरोटा सूरियां में अपने घर पहुंचे। घर में बेटे के स्वागत के लिए मां ने विशेष इंतजाम कर रखा था। लंबे समय बाद परिवार वालों से बात की तो सुशील की आंखों से आंसू छलक आए। बता दें कि नाइजीरिया में सुमद्री लुटेरों के चंगुल से छूटने के बाद रविवार को कांगड़ा जिला के तीनों युवकों की आखिरकार घर वापसी हो ही गई। अपने अन्य दो साथियों के साथ अपने घर नगरोटा पहुंचे सुशील कुमार ने पूरे परिवार के साथ अपने दुख साझा किए। अपने बेटों को सही सलामत देख परिवार वालों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

'जागकर काटी कई रातें, न जाने कब फोन आ जाए'

'जागकर काटी कई रातें, न जाने कब फोन आ जाए'

पालमपुर से अजय की माता कमला ने बताया कि बच्चों के बंधक बनाए जाने की बात का पता लगते ही परिवार वालों ने कई रातें जाग-जाग कर काटी हैं कि कब क्या फोन आ जाए और क्या सुनेंगे। फोन की घंटी बजने पर ही उनको डर लगने लगता था। इसी बीच अजय के पिता को ब्रेन हेमरेज भी हुआ, जिससे परिवार और मुश्किल में फंस गया था, लेकिन अब वह ठीक हैं। बहन आशा का कहना है कि अजय की रिहाई के लिए उन्होंने हर समय मां चामुंडा के सामने ही पूजा-अर्चना की है। उन्हें मां चामुंडा पर पूरा विश्वास था कि उनका भाई सकुशल देश लौटेगा। इसके लिए उन्होंने मां से मन्नत मांगी थी। इसे पूरा करने के लिए वह भाई और परिवार के साथ माता चामुंडा के मंदिर जाएंगे।

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