सुक्खू कैबिनेट ने स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ा बड़ा फैसला लिया, 780 आशा कार्यकर्ताओं को NHM में किया शामिल
Himachal Cabinet Decision: हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में 780 आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन के आधार पर NHM में शामिल करने का फैसला लिया है।

Sukhvinder Singh Sukhu Cabinet: स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा एक बड़ा फैसला हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने कैबिनेट बैठक में लिया। शुक्रवार 3 मार्च को शिमला में हुई कैबिनेट की बैठक में सुक्खू सरकार ने 780 आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत शामिल करने का फैसला किया है। इस फैसले को लेने के पीछे सरकार अपनी मंशा भी साफ कर दी है। सुक्खू सरकार ने कहा कि लोगों को सस्ती और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जा सके, क्योंकि आशाएं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रूप में कार्य करती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक, कैबिनेट ने एनएचएम में सामुदायिक प्रक्रिया कार्यक्रम के तहत आशा सहायिकाओं की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देशों को भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, कैबिनेट ने लोक कल्याण के उद्देश्य से कई अन्य उपाय भी किए हैं, जिसमें डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर और पहले से स्थापित दो आदेशों को निरस्त करना शामिल है। वहीं, प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, कैबिनेट ने सभी लड़कियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लड़कों को 600 रुपये की राशि हस्तांतरित करने का फैसला किया।
कैबिनेट के एक अन्य फैसले के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले सामान्य श्रेणी के छात्रों को अब यूनिफॉर्म नहीं मिलेगी। तो वहीं, आठवीं तक की सभी छात्रों को इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है। सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन करते हुए सिर्फ एससी, एसटी और बीपीएल परिवारों के लड़कों को लाभ देने का फैसला लिया है। इन 3.70 लाख विद्यार्थियों को अब कपड़े की जगह डीबीटी के माध्यम से 600-600 रुपये दिए जाएंगे। यह राशि स्कूल यूनिफॉर्म के लिए इन विद्यार्थियों अथवा उनकी माता के नाम हस्तांतरित की जाएगी।
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तो वहीं, विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने हिमाचल में सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन देने का वादा किया था। जिसे शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट बैठक में ओपीएस बहाली को 1 अप्रैल, 2023 से लागू करने का फैसला लिया है। इस फैसले से सरकार पर सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। तो वहीं, एक अन्य घोषणा में मंत्रिमंडल ने वर्ष 2023-24 के लिए नीलामी-सह-निविदा प्रक्रिया के माध्यम से हिमाचल प्रदेश टोल अधिनियम, 1975 के तहत 55 टोल बैरियर को पट्टे पर देने को हरी झंडी दे दी है।












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