महाबोधि मंदिर में बम मिलने के बाद दलाई लामा की सुरक्षा को खतरा
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शिमला। तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रवास के दौरान बोधगया के महाबोधि मंदिर में बम मिलने की घटना से तिब्बतियों में दलाई लामा की सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल है। तिब्बत की निर्वासित सरकार भी दलाई लामा की सुरक्षा को लेकर समीक्षा कर रही है। इस मामले में धर्मशाला के मैक्लॉडगंज में निर्वासित सरकार के मुख्यालय में बैठकों का दौर जारी है। दलाई लामा को हलांकि जेड प्लस सिक्योरिटी कवर उपलब्ध है व उनकी सुरक्षा में तीन स्तर का सुरक्षा घेरा रहता है।

दलाई लामा के प्रवचन के बाद मिले बम
आंतरिक घेरे में तिब्बत की निर्वासित सरकार का सुरक्षा दस्ता रहता है लेकिन इस सबके बावजूद दलाई लामा के प्रवचन के बाद महाबोधि मंदिर में दो जिंदा बम मिले हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर की रसोई में एक थर्मल फलास्क में विस्फोट के बाद दलाई लामा की सुरक्षा में तैनात अधिकारियों के दबाव के बाद जब सघन तालाशी अभियान चलाया गया तो यह जिंदा बम मिले।

करीब एक माह तक होगा उनका प्रवचन
इन बमों को बाद में फल्गू नदी के किनारे डिफ्यूज किया गया है। उससे दलाई लामा की सुरक्षा सवालों के घेरे में आ गई है। हलांकि बोध गया की एसपी गरिमा मलिक ने दावा किया है कि दलाई लामा की सुरक्षा मजबूत है। इससे पहले भी दलाई लामा की सुरक्षा में लापरवाही बरतने पर बिहार पुलिस के 13 जवानों को सस्पेंड किया जा चुका है। दलाई लामा इन दिनों बोधगया में ही हैं व करीब एक माह तक उनके प्रवचन हैं।

संवेदनशील है महाबोधि मंदिर
अभी बीते सप्ताह ही दलाई लामा के प्रवचन सुनने आये तिब्बतियों को चीन ने वापस देश लौटने को कहा है। निर्वासित सरकार इस सारे मामले को अध्ययन कर रही है कि कहीं दलाई लामा के प्रवचन में खलल डालने के लिये ही तो किसी साजिश के तहत यह बम रखे गये थे।
सुरक्षा के लिहाज से महाबोधि मंदिर बेहद संवेदनशील है। इससे पहले साल 2013 में महाबोधि मंदिर में सीरिलय बम ब्लॉस्ट हुए थे। अब एक बार फिर से विस्फोटक मिलने से सुरक्षा बलों के हाथ-पैर फूल गए हैं। दलाई लामा कई आंतकी संगठनों के निशाने पर हैं।












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