हिमाचल: बागियों से निपटने में BJP नेताओं के छूटे पसीने! रविन्द्र रवि के तेवर से कांगड़ा में हो सकता है नुकसान

शिमला, 27 जुलाई। हिमाचल प्रदेश में मौजूदा नेतृत्व से नाराज सत्तारूढ दल भाजपा नेताओं को मनाने में पार्टी आलाकमान के पसीने छूट रहे हैं। आये दिन पार्टी में टूट और बिखराव की खबरों से निपटने के लिये पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह , हिमाचल प्रभारी अविनाश राय खन्ना और सह प्रभारी संजय टंडन भले ही हिमाचल के मोर्चे पर आ डटे हों। लेकिन पार्टी से रूठे कार्यकर्ताओं व नेताओं को मनाने में यह लोग अभी तक सफल नहीं हो पा रहे हैं। मान मनौव्वल में आला नेताओं के पसीने छूट रहे हैं। पूर्व प्रदेश भाजपा खीमी राम और दूसरे नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद अब भाजपा अगले किसी विघटन को रोकने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। पार्टी अब पांच बार विधायक रहे पूर्व मंत्री रविन्द्र सिंह रवि को मनाने की कोशिशों में जुट गई है। रवि ने हाल ही में अपने इरादे स्पष्ट करते हुये साफ कर दिया है कि वह हर सूरत में चुनाव लड़ेंगे। वह कहां से चुनाव लडेंगे। यह पार्टी आलाकमान को तय करना है। मैं चुनाव हर सूरत में लड़ूंगा।

Rebel former minister in Himachal BJP party trying to control damage

रवि ने कहा है कि वह देहरा से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन सुलह चुनाव क्षेत्र के लोग भी चाहते हैं कि वह यहां से चुनाव लडें। रवि की नाराजगी देहरा में निर्दलीय चुनाव जीते होशियार सिंह की भाजपा में एंट्री को लेकर है। चूंकि रवि पिछला चुनाव होशियार सिंह के हाथों ही हारे थे। लेकिन सीएम जयराम ठाकुर ने एक नया दांव चलते हुये होशियार सिंह को भाजपा में शामिल कराया , तो पार्टी में हंगामा खडा हो गया। बताया जा रहा है कि अगले चुनावों में होशियार सिंह को भाजपा का टिकट देने का भरोसा दिया गया है। जाहिर है इस सूरत में पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि की भाजपा टिकट की दावेदारी कमजोर हो रही है। यही वजह है कि रवि अब पार्टी के इस निर्णय को लेकर विरोध में उतर आये है। होशियार सिंह की भाजपा में एंटरी को स्थानीय नेता भी पचा नहीं पा रहे हैं। देहरा मंडल भाजपा ने भी इसका विरोध किया है। पार्टी नेतृत्व के इस निर्णय के हो रहे विरोध के बीच बताया जा रहा है कि नाराज रवि अंदर खाते भाजपा छोड़ कांग्रेस पार्टी का दामन थामने की तैयारी भी कर रहे हैं।

Rebel former minister in Himachal BJP party trying to control damage

यही वजह है कि संभावित बगावत से निपटने के लिये पार्टी नेतृत्व ने वन मंत्री राकेश पठानिया को रूठे रवि को मनाने के लिये मैदान में उतारा है। पठानिया ने बाकायदा देहरा मंडल भाजपा के साथ बैठक की है। इस बैठक में नाराज रवि के अलावा भाजपा में शामिल हुये निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला को भी बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि पठानिया ने रवि को कोई भी कदम जल्दबाजी में न उठाने की बात कही है। और कहा है कि पार्टी आलाकमान तक उनकी भावनाओं को पहुंचाया जायेगा। लेकिन बैठक में उस समय हंगामा खडा हो गया। जब नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैठक में विधायक होशियार सिंह का विरोध करना शुरू कर दिया। महौल बिगड़ते देख पठानिया को भी नाराज लोगों को मनाने में खासी मेहनत करनी पडी।

पार्टी भले ही रवि के बागी तेवरों को ठंडा करने में जुटी हो। लेकिन माना जा रहा है कि अगर टिकट को लेकर रवि की नारजगी दूर नहीं हुई, तो भाजपा को इसका नुकसान अकेले देहरा ही नहीं ,बल्कि सुलह और ज्वालामुखी हल्कों में भी उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि अब पार्टी ने अब नये फार्मूले के तहत रवि को ज्वालामुखी में एडजस्ट करने की तैयारी की है। और ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला को देहरा से चुनाव लडाने की तैयारी की है। लेकिन इसमें सबसे बडा पेच यह है कि खुद रवि इस बार सुलह से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। सुलह से मौजूदा विधायक विधानसभा के स्पीकर विपिन परमार उस सूरत में आसानी से मैदान से नहीं हटेंगे। और एक बार फिर सुलह में हंगामा हो सकता है। हालांकि ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला देहरा जाने को तैयार हो गये हैं। धवाला ने ज्वालामुखी में 1998 से 2017 तक पांच चुनाव लड़कर चार बार जीत दर्ज की, जबकि 2012 में चुनाव हार गए थे।

दरअसल , पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बेहद करीबी रवि का आरोप है कि प्रदेश भाजपा में चल रही गुटबाजी के चलते उन्हें जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। रवि के बागी तेवरों से पार्टी में खलबली मची है। पार्टी को लगता है कि अगर रवि के तेवर नरम न हुये तो कांगड़ा जिला में नुकसान उठाना पड सकता है। प्रदेश के सबसे बडे जिला कांगड़ा में 15 चुनाव क्षेत्र हैं। और राजपूत बाहुल्य इलाके में धूमल समर्थकों का दबदबा है। रविंद्र सिंह रवि कांगड़ा जिला में धूमल खेमें के झंडाबरदार है। उन्होंने 1993 , 1998 , 2003 , 2007 लगातार चुनाव जीते। लेकिन 2017 में वह देहरा में होशियार सिंह के हाथों देहरा से चुनाव हार गये थे। 2012 में उनके चुनाव क्षेत्र थुरल में डिलिमिटेशन की जद् में आने के बाद देहरा भेजा गया था। थुरल का एक हिस्सा ज्वालामुखी में आया और एक हिस्सा सुलह में चला गया था। उस दौरान कांगड़ा जिला के 16 चुनाव क्षेत्रों की तादाद घटकर 15 हो गई थी। बताया जा रहा है कि रवि को देहरा के विधायक होशियार सिंह की सीएम जयराम ठाकुर से नजदिकियां रास नहीं आ रही है। और उन्होंने भाजपा में निर्दलीय विधायक होशियार सिंह की भाजपा में एंट्री का विरोध करना शुरू कर दिया है।

इस बीच , मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भाजपा नेताओं के कांग्रेस में जाने की अटकलों पर कहा कि यह अनावश्यक रूप का भ्रम फैलाया जा रहा है। चुनावों के समय इस तरह का क्रम हर बार होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा संगठन मजबूत है और आने वाले चुनावों में एक बार फिर से प्रदेश में भाजपा की ही सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते हैं, कुछ लोग छोड़ जाते हैं और कई पार्टी में आते हैं। जब उनका ध्यान पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष खीमी राम और पूर्व भाजपा विधायक की धर्मपत्नी इंदु वर्मा द्वारा भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने तथा कुछ अन्य भाजपा नेताओं के बगावती सुरों के बारे में पूछा गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में कुछ और भी देखने को मिलेगा। जयराम ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सशक्त हुआ है जबकि भाजपा राष्टट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा आगे बढ़ी है। यही कारण है कि प्रदेश में भाजपा पूर्ण बहुमत से रिपीट कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मंत्री रविन्द्र रवि कांग्रेस में चले गए और विधायक रमेश धवाला कांग्रेस में जा रहे हैं?, तो वे इस पर चुप्पी साध गए। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय एक-दूसरी पार्टी में आने-जाने की बातें पहले से होती आई हैं।

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