कौन हैं प्रतिभा सिंह जिनको मिली हिमाचल कांग्रेस की कमान, कुलदीप राठौर हटाए गए
शिमला, 26 अप्रैल। कांग्रेस आलाकमान ने मंगलवार को हिमाचल कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को हटा कर पार्टी की कमान प्रतिभा सिंह को सौंप दी है। इसकी औपचारिक घोषणा दिल्ली में की गई। हिमाचल कांग्रेस के नेता दिल्ली में डटे हैं तो दूसरी ओर प्रतिभा सिंह के शिमला आवास पर बधाइयां देने वालों का तांता लग गया है। ताजा घोषणा के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष पद पर मुकेश अग्निहोत्री बने रहेंगे। पार्टी राज्य के लिए प्रचार, घोषणा पत्र, समन्वय और प्रदेश चुनाव समिति जैसी कई अन्य चुनाव समितियों की भी घोषणा की गई है।

हिमाचल कांग्रेस संगठन में फेरबदल
पार्टी ने कुलदीप राठौर और पूर्व अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू व सीएलपी लीडर मुकेश अगिनहोत्री को दिल्ली बुलाया था। पार्टी महासचिव के सी वेणूगोपाल की ओर से जारी प्रेस बयान में प्रतिभा वीरभद्र सिंह को अध्यक्ष बनाये जाने के साथ सुखविंदर सिंह सुक्खू - अध्यक्ष(चुनाव प्रचार कमेटी, सदस्य स्क्रीनिंग कमेटी बनाये गये हैं। जबकि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मुकेश अग्निहोत्री बने रहेंगे। उनके साथ हर्षवर्धन चौहान को डिप्टी सीएलपी बनाया गया है। प्रतिभा सिंह की टीम में चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये हैं। जिनमें हर्ष महाजन ,राजिंदर राणा ,पवन काजल शामिल हैं।
'जो अध्यक्ष बनेगा, चुनाव नहीं लड़ेगा'
दरअसल, पार्टी ने तय किया था कि जो भी अध्यक्ष बनेगा। वह चुनाव नहीं लड़ेगा। प्रतिभा सिंह सांसद हैं और वह चुनाव नहीं लडेगी। यही वजह रही कि मुकेश अगिनहोत्री व सुखविन्दर सिंह सुक्खू अपने आप ही इस रेस से हट गये। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था कि वह चुनाव लडेंगे। जातिगत व क्षेत्रिय संतुलन कायम करने के लिये प्रतिभा सिंह के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये है। जबकि अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे सुखविंदर सिंह चुनाव कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बने हैं। जिससे साफ हो गया है कि अगला चुनाव पार्टी सामूहिक नेतृत्व में ही लडेगी। किसी को भी अगले सीएम के तौर पर किसी को भी पेश नहीं किया जायेगा लेकिन राठौर की नई भूमिका क्या होगी। यह तय नहीं हो पाया है। वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ उप नेता की भी नियुक्ति होने जा रही है और कौल सिंह ठाकुर व आशा कुमारी को भी अहम जिम्मेवारी दी जा रही है।

1998 में राजनीति में एक्टिव हैं प्रतिभा सिंह
प्रतिभा सिंह 1998 में सक्रिय राजनीति में आई थीं। पहला चुनाव इसी संसदीय क्षेत्र से लड़ा था, जब भाजपा के महेश्वर सिंह ने उन्हें करीब सवा लाख मतों से पराजित किया था। महेश्वर सिंह उनके समधी हैं। 1998 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी। सरकार 13 माह ही चल पाई थी. 1999 में लोकसभा का दोबारा चुनाव हुआ था। प्रतिभा सिंह ने यह चुनाव नहीं लड़ा था। 2004 के आम लोकसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी। समधी महेश्वर सिंह से 1998 की हार का बदला लेकर वह पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुई थीं। 2009 का लोकसभा चुनाव उनके पति पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने लड़ा था।
मंडी से हैं सांसद
2012 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया था. 2013 में उपचुनाव हुआ तो प्रतिभा तीसरी बार मैदान में उतरीं. वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को करीब 1.39 लाख मतों से शिकस्त देकर दूसरी बार संसद सदस्य निर्वाचित हुई थीं। इसके साल भर बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ था. मोदी लहर में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उन्हें 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था. प्रदेश में उस समय कांग्रेस सरकार थी. प्रतिभा सिंह की हार से सब दंग रह गए थे। इस बार करीब सात साल बाद प्रतिभा सिंह दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरीं और मंडी सीट से जीत दर्ज की।












Click it and Unblock the Notifications