कोटखाई कांड: चुप रहने के लिए आरोपियों ने की थी 3 करोड़ की पेशकश

मेडिकल के दौरान, पुलिस टीम के सामने ही तीन आरोपी एक दूसरे को बोलते रहे, तुमने मारा है लड़की को...तुमने, मैंने कुछ नहीं किया।

शिमला। शिमला के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले में राज्य सरकार ने भले ही जनता का गुस्सा शांत करने के लिए सीबीआई से जांच कराने की बात मान ली हो। लेकिन इस मामले में कोटखाई पुलिस ने मौका-ए-वारदात से सबूत जुटाने में जो कोताही कोटखाई पुलिस से लेकर एसआईटी ने बरती वो आगे जाकर सीबीआई जांच में भी आने वाले दिनों में कई मुश्किलें पैदा करेंगी। सीबीआई भी उन्हीं सबूतों के आधार पर जांच शुरू करेगी जो पुलिस ने पहले दिन से जुटाए हैं।

क्या अदालत में ठहर पाएगा मामला?

क्या अदालत में ठहर पाएगा मामला?

आखिर सबूतों की बिनाह पर ही अदालत में मामला ठहर पाएगा। कोटखाई के हलाईला के दांदी के जंगल में हुई इस वारदात में पुलिस की जांच में कई कमजोर कड़ियां रही हैं। जिन्हें पुलिस मजबूत नहीं कर सकी। पुलिस का दावा है कि जिस गड्ढे में पिड़िता की लाश बरामद हुई उससे महज दस फुट दूर ही गैंगरेप हुआ। लेकिन इसे साबित करने के लिए पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। ये महज कल्पना का आधार ही माना जा सकता है। एक आरोपी मौका-ए-वारदात से करीब चार सौ मीटर दूर रहता है। लिहाजा सवाल तो उठेगा ही कि इतना होने के बावजूद वो शव को अपने घर से इतना नजदीक क्यों फेकेगा?

'जीप' को क्यों नहीं बनाया जा रहा केसस्टडी?

'जीप' को क्यों नहीं बनाया जा रहा केसस्टडी?

यहां नेपाली बस्ती में नेपाली मजदूरों ने अपने ढारे बनाकर रखे हैं। आज भी यहां वो जीप खड़ी है जिसे पुलिस बता रही है कि पीड़िता महासू से आती हुई घर जाने को इसमें बैठी। पुलिस कह रही है कि इसी जीप से पीड़िता को आरोपी ने बाहर खींचा व उसके सिर पर लगे क्लिप सड़क पर गिर गए। लेकिन हैरानी का विषय है कि पुलिस ने इस जीप को अभी तक अपने कब्जे में नहीं लिया है। हालांकि ये कानूनन केस प्रॉपर्टी होनी चाहिए। पीड़िता के मामा ने सबसे पहले लाश को सुबह करीब सात बजे दांदी के जंगल में देखा। उसे तुरंत पीड़िता के पिता को मोबाइल पर इसकी जानकारी दी। परिजनों का दावा है कि उसके तुरंत बाद पुलिस को सूचित किया गया। लेकिन पुलिस मौका-ए-वारदात पर चार घंटे बाद पहुंची। तब तक घटनास्थल पर सैंकड़ों लोग जमा हो चुके थे। जाहिर है जो उम्मीद यहां मजबूत सबूत मिलने की थी वो टूट गई।

नेपाली बस्ती कैसे आई सवालों के घेरे में?

नेपाली बस्ती कैसे आई सवालों के घेरे में?

यही नहीं अगर नेपाली ही हत्यारे व गैंगरेप करने वाले थे तो वो अपनी बस्ती में पुलिस के आने का इंतजार क्यों करते रहे। दो दिनों में तो वो भागकर नेपाल पहुंच सकते थे। नेपाल के साथ भारत की प्रत्यार्पण संधि नहीं है। लिहाजा उन्हें पकड़े जाने का डर भी नहीं होता। यहां ये भी दिलचस्प है कि पुलिस पीड़िता की जिस जुराब के गुम होने की बात कर रही है। उसके बारे में पीड़िता की बहन ने बताया कि वो जुराब पुलिस ने पहले अपनी जांच में के घर में बरामद कर ली थी। लेकिन बाद में एसआईटी की जांच में उसे गायब बताया गया है। ये कैसी जांच है? छात्रा के चाचा ने बताया कि उन्होंने पुलिस से पोस्टमॉर्टम रिर्पोट कई बार मांगी लेकिन उन्हें आज तक नहीं मिली। उन्हें ठियोग और कोटखाई के चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस अपना पूरा जोर आरोपी को बचाने में लगा रही है। लेकिन वो ही मुख्य आरोपी है। पोस्टमॉर्टम रिर्पोट को भी बदला जा चुका है। उन्हें अब तक पुलिस ने जांच की एक प्रति तक उपलब्ध नहीं करवाई है।

आरोपी बोला मैनें नहीं लाल स्वेटर वाले ने मारा

आरोपी बोला मैनें नहीं लाल स्वेटर वाले ने मारा

पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों के परिजनों ने उनसे संपर्क कर केस बंद करने के लिए उन्हें तीन करोड़ रुपए देने की पेशकश की और कहा कि अगर वो केस वापिस ले लें तो उन्हें ये राशी तुरंत दे दी जाएगी। परिजनों का कहना है कि पहली पुलिस जांच में पीड़िता की जुराब एक घर में मिलती है लेकिन बाद में वो जुराब एसआईटी जांच में गायब हो जाती है। आखिर कैसे?

आरोपी बोला मैनें नहीं लाल स्वेटर वाले ने मारा

छात्रा से गैंगरेप व मर्डर के आरोपियों को जब शिमला में मेडिकल के लिए लाया गया तो डॉक्टरों के सामने आरोपी आपस में उलझ गए। तीनों आरोपी एक दूसरे पर कत्ल का इल्जाम लगाने लगे। इस दौरान एक महिला ने अपनी चप्पल निकालकर आरोपी के सिर पर मार दी। जैसे ही महिला दूसरी चप्पल मारने लगी पुलिस के एक जवान ने तत्परता दिखाते हुए महिला को रोक दिया। मुंह में नकाब लगाए हुए आरोपी दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में मेडिकल करवाते हुए डॉक्टरों के सामने ही आपस में उलझ गए।

मेडिकल के दौरान आरोपियों में तू तू-मैं मैं

मेडिकल के दौरान आरोपियों में तू तू-मैं मैं

मेडिकल के दौरान, पुलिस टीम के सामने ही तीन आरोपी एक दूसरे को बोलते रहे, तुमने मारा है लड़की को। मैंने कुछ नहीं किया। एक आरोपी बोला, मैं बेकसूर हूं, मैंने किसी को नहीं मारा। तभी दूसरा बोला मैंने अकेले थोड़ी न कुछ किया। तीसरा आरोपी बोला, ये लाल स्वेटर वाला है, इसी ने मारा है। आरोपी देर तक आपस में बहस करते रहे। दो नेपाली मूल के आरोपी बिलकुल शांत बैठे थे। चप्पल मारने वाली महिला बोली, हैवानों उस मासूम को बख्श देते। जैसे ही आरोपियों को रिपन अस्पताल परिसर में लाया गया, कलस्टन की रहने वाली एक महिला ने अपनी चप्पल एक आरोपी के सिर पर मार दी। वो बोली मैं भी एक बेटी की मां हूं। पिछले पांच दिन से सो नहीं पा रही हूं। ये जो गुड़िया के साथ हुआ है, कैसे बर्दाश्त करूं।

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