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Himachal Rains Update: मंडी में आसमानी आफत का कहर, अब तक 37 की मौत, करोड़ों की संपत्ति का नुकसान

Himachal Rains Update: पहाड़ों में हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। हिमाचल प्रदेश इन दिनों प्रकृति के विकराल रूप का सामना कर रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश ने न सिर्फ जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि सैकड़ों लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया है।
अब तक बारिश में 37 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि इस दौरान हुई सड़क दुर्घटनाओं में 26 अन्य लोगों ने जान गंवाई है। राज्य में चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है। कहीं पहाड़ दरक रहे हैं, तो कहीं घरों की दीवारें ढह रही हैं।

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स्कूलों में बच्चों के चेहरे पर डर है, खेत खलिहान जलमग्न हैं, और सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के मुताबिक, अब तक ₹400 करोड़ से अधिक की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि असल क्षति इससे कहीं अधिक हो सकती है। राज्य के 250 से ज्यादा मार्ग बंद हो चुके हैं, 500 से अधिक बिजली के ट्रांसफॉर्मर फुंक गए हैं, और लगभग 700 पेयजल योजनाएं पूरी तरह से ठप हैं।

मंडी सबसे अधिक प्रभावित

मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में उभरा है, विशेषकर थुनाग उपमंडल, जहां कई सड़कें अब भी बंद पड़ी हैं और बिजली तथा पानी की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो चुकी है। मंडी में 40 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है, जिससे जन-धन हानि की आशंका और बढ़ गई है।

प्रशासन द्वारा राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और भारतीय वायुसेना की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री के पैकेट हवाई मार्ग से पहुंचाए जा रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राजस्व विभाग के विशेष सचिव डी.सी. राणा ने बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया, "हमारे सिस्टम में अब तक ₹400 करोड़ के नुकसान का रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है। लेकिन वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है। इस समय हमारा मुख्य फोकस राहत, बचाव और पुनर्स्थापन पर है।"

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारी मौके पर तैनात हैं और लोक निर्माण विभाग, विद्युत बोर्ड तथा जल शक्ति विभाग के अभियंता बहाली कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

शिक्षा पर भी पड़ा असर

राजधानी शिमला में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। विद्यालयों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई स्कूलों में पानी भर गया है, जिससे बच्चों को भारी परेशानी हो रही है।

शिमला की एक छात्रा तनुजा ठाकुर ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, "तेज बारिश हो रही है। हमारे क्लासरूम में पानी घुस आया है, कपड़े और किताबें भीग गई हैं। शिक्षक कह रहे हैं कि बेहतर होगा हम घर पर ही रहें।" उन्होंने यह भी बताया, "हमारे स्कूल के चारों ओर पेड़ हैं। हमेशा डर लगा रहता है कि कोई पेड़ गिर न जाए। फिलहाल हम सुरक्षित हैं।"

आपदा का कहर

राज्य में अब तक 250 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हैं, 500 से ज्यादा विद्युत ट्रांसफॉर्मर काम नहीं कर रहे हैं और लगभग 700 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, होम गार्ड्स, एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ जैसी केंद्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, राज्य के कई इलाकों में भारी वर्षा का अलर्ट अभी भी जारी है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक और बारिश की संभावना जताई है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। प्रशासन सतर्क है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

हिमाचल प्रदेश एक भीषण प्राकृतिक आपदा के दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर भारी बारिश और भूस्खलन ने लोगों की जान और माल पर संकट खड़ा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभावों की चेतावनी भी स्पष्ट होती जा रही है। आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलते हैं, यह प्रशासन की तत्परता और राहत प्रयासों पर निर्भर करेगा।

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