शिमला: जयराम सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे बागवानों ने निकाला मोर्चा, जानिए क्या है पूरा मामला

शिमला, 06 अगस्त: चुनावी साल में हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों की नाराजगी सत्तारूढ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गले की फांस ना बन जाए। पिछले दो दिनों से सचिवालय से लेकर सड़क तक तमाम प्रयासों के बावजूद शिमला के किसानों और बागवानों को मनाने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही। जिसके चलते अपनी मांगों के समर्थन में शुक्रवार को किसान-बागवान सड़कों पर उतरे। हालांकि, सरकार ने बीच बचाव का रास्ता अपनाते हुए किसान बागवानों के संगठन को बातचीत के लिए सचिवालय बुलाया। लेकिन सरकार की शर्तों को संयुक्त किसान संगठन ने ठुकरा दिया।

Himachal Pradesh Shimla CM Jai Ram Thakur Apple growers

सेब बागवानों का आरोप है कि भाजपा सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। प्रदेश की अर्थ व्यवस्था में प्रभावी भूमिका निभाने वाले सेब कारोबार आज बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं। दरअसल, किसान-बागवान फलों की पैकेजिंग पर जीएसटी खत्म करने, कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस के तहत सेब खरीद करने और सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। बागवान संगठन ने सरकार की ओर दी गई 6 फीसदी जीएसटी छूट की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी की हैं। वहीं, 20 सूत्रीय मांग पत्र में उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी में बागवान प्रतिनिधियों को शामिल न करने से भी बागवान संगठन नाराज हैं।

संयुक्त किसान मंच के बैनर तले शिमला में निकाली आक्रोश रैली
सेब किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। जिससे दिन भर माहौल गरमाया रहा। कुछ स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच झडप की सूचनाएं भी सामने आई थी। किसान-बागवान शिमला के नवबहार के पास एकत्र हुए। यहां से राज्य सचिवालय के लिए पैदल मार्च शुरू किया। जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ता गया, किसान-बागवानों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता इसमें जुड़ते गए। किसान-बागवानों को समर्थन देने के लिए आम आदमी पार्टी किसान विंग और कांग्रेस के नेता भी पहुंचे। सेब बागवानों के सचिवालय के बाहर प्रदर्शन से पहले पुलिस बल तैनात कर छावनी बना दी गई थी। पुलिस ने छोटा शिमला में सचिवालय के सामने बैरिकेडिंग कर सर्कुलर रोड बंद कर दिया था।

किसान-बागवानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए है यह आक्रोश रैली
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान व सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि यह आक्रोश रैली किसान-बागवानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए है। बीस सूत्रीय मांगपत्र सरकार को सौंपा था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मंच के पदाधिकारियों की बातचीत हुई थी। तय हुआ था कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी में बागवानों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अफसरशाही ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। अगर सरकार ने सभी मांगें न मानी तो वे मानसून सत्र के दौरान हिमाचल विधानसभा का घेराव करेंगे। वहीं, हिमाचल किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप तंवर का कहना था कि सरकार किसान व बागवान विरोधी है। सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसकी शुरूआत आज कर दी है। अभी तो यह शुरूआत है, मांगें न मानीं तो विधानसभा चुनावों तक लड़ाई चलेगी।

यह प्रदर्शन जनता को गुमराह करने वाला: खुशीराम बालनाटा
इस बीच, भाजपा नेता एवं अध्यक्ष हिमाचल सहकारी बैंक खुशीराम बालनाटा ने मीडिया से बातचीत में दावा करते हुए कहा कि जयराम ठाकुर सरकार एक संवेदनशील सरकार है। उन्होंने कहा की सरकार ने बागवानी नीति में बदलाव करते हुए सरकार ने गत वर्षों की भांति विभिन्न प्रकार के कीटनाशकों के उपदान की पुरानी योजना पुनः लागू कर दिया है। जिसके अनुसार यह सारी वस्तुएं उद्यान विभाग के केन्द्रों के माध्यम से उपलब्ध होगी। आज का धरना प्रदर्शन केवल राजनीति से प्रेरित था और इस प्रदर्शन से केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।

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