Himachal Election 2022 : छह बार की विधायक से जुड़ा है थप्पड़बाजी विवाद, क्या 2022 में भी मिलेगी जीत?
Himachal Election 2022 हिमाचल प्रदेश में एक महिला विधायक की पहचान थप्पड़बाज नेता की रही है। वे छह बार विधायक रही हैं। सातवीं बार किस्मत आजमाने के लिए फिर मैदान में हैं। उनके भाई कांग्रेस शासित प्रदेश में मंत्री हैं। मंत्री महोदय अपनी बहन को वोट दिलाने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। यहां तक कि डांस भी कर रहे हैं। क्या ये महिला विधायक सातवीं बार जीत हासिल कर पाएंगी ? क्या है थप्पड़ विवाद ? क्या इसका असर चुनावी राजनीति पर पड़ेगा ?

थप्पड़ घटना की पृष्ठभूमि
यहां चर्चा हो रही है डलहौजी विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायक आशा कुमारी की। वाकया दिसम्बर 2017 का है। विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके थे। कांग्रेस सत्ता से वंचित रह गयी थी। कांग्रेस की हार की समीक्षा के लिए शिमला में बैठक थी। उस समय राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वे बैठक की अध्यक्षता के लिए शिमला आये थे। कांग्रेस कार्यालय में बैठक थी। बैठक से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गयी। राहुल गांधी को भीड़ से बचाने के लिए पिछले दरवाजे से अंदर दाखिल कराया गया। इससे कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता रोष में आ गये। वे राहुल गांधी से मिलना चाहते थे। जब उन्हें नहीं मिलने दिया गया तो वे हंगामा करने लगे।

महिला विधायक ने महिला सिपाही को थप्पड़ मारी
भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिसकर्मी सख्ती करने लगे। इसी बीच डलहौजी की नवनिर्वाचित विधायक आशा कुमारी राहुल गांधी से मिलने के लिए पहुंची। लेकिन वहां तैनात एक महिला सिपाही ने भीड़ का हवाला देकर उन्हें रोक दिया। इससे विधायक आशा कुमारी नाराज हो गयीं। गुस्से में आशा कुमारी ने महिला सिपाही को थप्पड़ जड़ दिया। तब महिला सिपाही भी भड़क गयी। उसने भी जवाब में विधायक आशा कुमारी को थप्पड़ जमा दिया। फिर तो खूब बवाल हुआ। बाद में आशा कुमारी ने इस घटना के लिए माफी मांग ली थी। इस घटना के वीडियो ने तब पूरे देश में चर्चा बटोरी थी। चूंकि चुनाव के बाद ये घटना हुई थी इसलिए आशा कुमारी की राजनीति पर इसका असर नहीं पड़ा। लेकिन इस विवाद से उनकी और कांग्रेस की किरकिरी हुई थी। क्या 2022 के चुनाव में आशा कुमारी को इस विवाद की कीमत चुकानी पड़ सकती है ?

चंबा की बनीखेत सीट से चार बार विधायक
आशा कुमारी पूर्व चंबा रियासत की रानी हैं। उनके भाई टीएस सिंहदेव छत्तीसगढ़ सरकार मे मंत्री हैं जो उनके चुनाव प्रचार के लिए चंबा में डेरा डाले हुए हैं। चंबा के राजकुमार बृजेन्द्र कुमार से शादी होने के बाद आशा कुमारी राजनीति में सक्रिय हो गयीं। 1985 में उन्होंने पहली बार चंबा जिले की बनीखेत विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और विधायक चुनी गयीं। इसके बाद उन्होंने इस सीट पर 1993, 1998 और 2003 में लगातार जीत हासिल की। बनीखेत सीट पर उन्हें दो बार (1990, 2007) हार भी मिली। उन्हें भाजपा के प्रत्याशी ने हराया था।

2022 में त्रिकोणीय मुकाबला
2008 में परिसीमन के बाद बनीखेत विधानसभा सीट का नाम डलहौजी विधानसभा क्षेत्र हो गया। 2012 के चुनाव में आशा कुमारी ने डलहौजी से जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा की रेणु को हराया था। 2017 में भाजपा ने यहां से डीएस ठाकुर को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने आशा कुमारी को जोरदार टक्कर दी थी। वे हारते हारते बचीं थीं। सिर्फ 556 वोट से वे जीत पायीं थीं। 2022 के चुनाव में भी भाजपा ने फिर डीएस ठाकुर को ही डलहौजी से मैदान में उतारा है। इस बार आम आदमी पार्टी के मनीष सरीन भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि मनीष सरीन के खड़ा होने से भाजपा विरोधी मतों में बंटवारा होगा जिसका फायदा डीएस ठाकुर को मिल सकता है। वैसे कांग्रेस अपने गढ़ को बचाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही है।

डलहौजी-भारत का स्विट्जरलैंड
डलहौजी भारत का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। भारत के पूर्व गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी के नाम पर इस शहर को 1854 में बसाया गया था। धीरे-धीरे विकसित हो कर अब शहर भारत का एक प्रमुख टूरिस्ट प्लेस बन गया है। इसको मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। आशा सिंह पिछले दो चुनाव से डलहौजी में जीत हासिल करती रही हैं। लेकिन जब यह विधानसभा सीट बनीखेत हुआ करती थी तब भाजपा यहां से दो बार जीत हासिल कर चुकी है। यानी आशा कुमारी को हराना नामुमकिन नहीं है। पिछले चुनाव में भाजपा के डीएस ठाकुर और आशा सिंह के मत प्रतिशत में नाम मात्र का अंतर था। इसलिए इस बार भाजपा ने कांग्रेस से यह सीट छीनने के लिए पूरा जोर लगाया है। दो दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने डलहौजी के सलूणी में जनसभा की थी। भाजपा मोदी सरकार और जयराम सरकार के काम के आधार पर वोट मांग रही है।












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