हिमाचल में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने मचाई भारी तबाही, रेलवे नेटवर्क का हुआ सबसे बड़ा नुकसान
हिमाचल में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने मचाई भारी तबाही, रेलवे नेटवर्क का हुआ सबसे बड़ा नुकसान
शिमला, 21 अगस्त: हिमाचल प्रदेश में इस बार हुई मूसलाधार बारिश ने जो जख्म दिए हैं, उन से उभरने के लिए अभी लंबा वक्त लगेगा। हालांकि, सरकार की ओर से आम-जनजीवन को पटरी पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन दूर-दराज के इलाकों में सड़कों का हाल बेहाल हो गया है। हिमाचल के कई हिस्से अभी कटे हुए हैं। सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के रेलवे नेटवर्क के टूट जाने से हुआ है। कांगड़ा घाटी रेल सेवा को जल्द बहाल करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। वहीं, पर्यटन विभाग ने प्रदेश में आने वाले पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
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दरअसल, हिमाचल प्रदेश में आई तबाही के बाद आपदा प्रबंधन को लेकर प्रदेश सरकार पर कोताही बरतने के आरोप लग रहे थे। ऐसे आरोप लगने के बाद प्रदेश की जयराम सरकार हरकत में आ गई और अब युद्ध स्तर पर हालात को सामान्य बनाने के कार्य किया जुट गई। अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही है और सीएम जयराम ठाकुर पूरी स्थिति पर नजर बनाये हुए है। सरकार ने राहत एवं पुर्नवास कार्य के लिए एसडीआरएफ से 232.31 करोड़ रुपये की राशी आपदा प्रभावित जिलों को जारी की है। वहीं, सरकार केंद्र सरकार से राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए अतिरिक्त केंद्रीय दल भेजने की मांग करने जा रही है। इसी तरह चक्की रेल पुल की मुरम्मत के लिए भी केन्द्र से मदद मांगने की तैयारी है।
राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ओंकार चंद शर्मा ने बताया कि प्रदेश में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बादल फटने की कुल 34 घटनाएं हुई हैं। जिनमें 16 शव बरामद किए जा चुके हैं और अभी आठ लोग लापता हैं। उन्होंने बताया कि मंडी, कांगड़ा और चंबा जिले में सबसे ज्यादा नुक्सान हुआ है। जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार राज्य में कुल 742 सड़कें बंद हुई हैं, जिनमें से 407 को आज बहाल कर दिया जाएगा। जबकि, 268 सड़कें रविवार शाम तक बहाल कर दी जाएंगी। प्रदेश भर में कुल 172 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें से 39 योजनाओं की आपूर्ति आज बहाल कर दी जाएंगी।
इससे पहले, सीएम जयराम ठाकुर ने विभिन्न जिलों के उपायुक्तों के साथ प्रदेश में भारी बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्हें तत्काल राहत और बचाव अभियान सुनिश्चित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण स्थानों पर पर्याप्त संख्या में बचाव दल और मशीनरी तैनात करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि सेब उत्पादक क्षेत्रों और अस्पतालों की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए फिसलन वाले स्थानों और नदी तटों से दूर रहने का परामर्श दिया जाए।
कहा कि केंद्र सरकार से राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए अतिरिक्त केंद्रीय दल भेजने का अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को प्रभावी बचाव कार्यों के लिए उचित समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में आवश्यकतानुसार स्कूल बंद करने के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश भी दिए। उन्होंने भूस्खलन और बाढ़ के कारण हुई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करने और शोक संतप्त परिवारों को अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
मुख्य सचिव आरडी धीमान की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि जो इस अपदाम से प्रभावित हुए है उन लोगों के रहने और खाने-पीने की भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। भूस्खलन और बाढ़ से ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षण संस्थानों को बंद करके इन संस्थानों या अन्य सामुदायिक भवनों में शिविर स्थापित किए जा सकते हैं। मुख्य सचिव ने बिजली बोर्ड के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों को एसडीआरएफ से 232.31 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए सभी जिलों में इस समय पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है।












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