पॉर्शे, मर्सिडीज, मिनी कूपर और करोड़ों की ज्वेलरी देख ED भी हैरान, छापेमारी में खुला अरबपति का खजाना
भुवनेश्वर स्थित खनन व्यवसायी शक्ति रंजन दास और उनकी कंपनियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को बड़े पैमाने पर छापेमारी की। यह कार्रवाई इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (M/s ITCOL) के बैंक फ्रॉड मामले की जांच के तहत हुई, जिसमें लगभग 1,396 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।
ED शिमला ने बताया कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग (निवारण) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत की गई और इसमें दास के आवास के साथ उनकी कंपनियों अनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड (AMPL) और अनमोल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (ARPL) के कार्यालय शामिल थे।

लग्जरी गाड़ियां, सुपर बाइक और करोड़ों के गहने जब्त
छापेमारी के दौरान ED ने दास और उनकी कंपनियों से कुल 10 लग्जरी कारें और 3 सुपर बाइक जब्त कीं। इनमें पोर्शे कायने (Porsche Cayenne), मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz GLC), बीएमडब्ल्यू X7 (BMW X7), ऑडी A3 (Audi A3), मिनी कूपर (Mini Cooper) और होंडा गोल्ड विंग बाइक (Honda Gold Wing Bike) जैसी हाई-एंड गाड़ियां शामिल थीं, जिनकी कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
13 लाख रुपये कैश, दो बैंक लॉकर फ्रीज
इसके अलावा ED ने लगभग 13 लाख रुपये नकद (कैश), 1.12 करोड़ रुपये की ज्वेलरी और दास के दो बैंक लॉकर भी फ्रीज किए। अधिकारियों ने कहा कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अचल संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड (इन्क्रिमिनेटिंग रिकॉर्ड्स और इम्मोवेबल प्रॉपर्टी) भी जब्त किए गए, जो जांच के लिए निर्णायक साबित होंगे।
बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
ED ने बताया कि ITCOL ने 2009 से 2013 के बीच बैंक से लिए गए लोन में कथित गड़बड़ी की थी। कंपनी ने फर्जी प्रोजेक्ट रिपोर्ट और नकली बिक्री दिखाकर कंसोर्टियम बैंक से कर्ज लिया, जिसे मंजूरी के उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया।
खनन व्यवसाय में किया पैसे का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि शक्ति रंजन दास ने जानबूझकर ITCOL के प्रमोटर राकेश कुमार शर्मा को ऋण राशि अपने खनन व्यवसाय में इस्तेमाल करने में मदद की, और लगभग 59.80 करोड़ रुपये AMPL के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए, जिन्हें कंपनी की बुक्स में वैध दिखाया गया।
इससे पहले ED ने लगभग 310 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं, जिनमें से 289 करोड़ रुपये अप्रैल में कंसोर्टियम बैंक को लौटाए गए। अधिकारियों ने कहा कि यह छापेमारी इस बात का सबूत है कि दास की संपत्तियों और व्यवसायिक गतिविधियों में धन शोधन का पैटर्न बेहद स्पष्ट है।












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