कोटखाई गैंगरेप पर कांग्रेस विधायकों ने छेड़ी 'वीरभद्र हटाओ' मुहिम
हिमाचल प्रदेश के शिमला में कोटखाई गैंगरेप मुद्दे पर कांग्रेसी विधायकों ने सीएम वीरभद्र सिंह को हटाने के लिए पत्र लिखा है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप-मर्डर व पुलिस हिरासत में एक आरोपी की मौत के मामले को निपटाने में सरकार की नाकामी के लिये हो रही किरकिरी पर अब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आधा दर्जन विधायकों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। बागी हुये विधायकों ने कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखकर वीरभद्र सिंह को जल्द हटाने की मांग की है।

वीरभद्र के खिलाफ बगावत का बिगुल
आलाकमान को पत्र लिखे जाने की पुष्टि पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने करते हुये बताया कि इस पत्र की एक कापी उन्हें भी भेजी गई है। हलांकि उन्होंने बगावत करने वाले विधायकों के नाम जाहिर करने से मना कर दिया और कहा कि सब सामने आ जायेगा। दो दिन पहले भी सीएम ने जब अपने मंत्रियों की बैठक बुलाई थी तो भी कोई भी उनकी बैठक में नहीं पहुंच पाया था। दरअसल तेजी से घटे घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के शिमला से किन्नौर जाते ही उनके विरोधी शिमला में सक्रिय हो गये।

छह विधायकों ने लिखी सीएम को हटाने के लिए चिट्ठी
एक साथ छह विधायकों ने पार्टी आलाकमान को बाकायदा एक पत्र लिखकर जल्द से जल्द मौजूद सीएम वीरभद्र सिंह को हटाकर किसी दूसरे नेता को प्रदेश की कमान सौंपने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि कोटखाई जैसे संवेदनशील मामले में सरकार ने संवेदनहीन व गैर जिम्मेवार रवैया शुरू से अपनाया, जिससे आज पूरे प्रदेश में अंदेालन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के बयानों की वजह से पार्टी के खिलाफ जनाक्रोश पनपा व विपक्ष को चुनावी बेला पर बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया। पत्र में लिखा गया है कि मौजूदा महौल में ऐसा लग रहा है कि सीएम आफिस को वीरभद्र सिंह नहीं बल्कि कोई ओर चला रहा है। सभी ओर अराजकता का महौल है। वीरभद्र से बगावत करने वाले विधायकों ने अपने पत्र में लिखा है कि हालात जल्द नहीं संभाले गये तो पार्टी को आने वाले चुनावों में अच्छा खासा नुक्सान हो सकता है।

कोटखाई गैंगरेप मुद्दे पर हुई सरकार की किरकिरी
दरअसल कोटखाई में स्कूली छात्रा से रेप व मर्डर मामले को सरकार ने जिस तरीके से हैंडल किया उस पर पहले परिवहन मंत्री जीएस बाली व सीपीएस नीरज भारती भी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं। पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने भी माना था कि पुलिस जांच में कोताही बरती गई होगी तभी लोगों ने विराध किया। इस मामले को निपटने में अपनाई गई नीति पर आज कांग्रेस पार्टी दो खेमों में बंट गई है। सरकार में जहां वीरभद्र समर्थक बैकफुट पर हैं तो विरोधी मुखर हो रहे हैं।

विधायकों की बगावत से बिगड़ सकता है सत्ता का गणित
अगर सरकार के आंकड़े देखे जायें तो छह विधायकों की बगावत सरकार का गणित बिगाड़ सकती है। यह विधायक साथ न दें तो सरकार संकट में आ सकती है। इस समय विधानसभा में कांग्रेस के 35 विधायक हैं जबकि पावंटा साहिब से किरनेश जंग व कांगड़ा से पवन काजल निर्दलीय होने के बावजूद सरकार के साथ हैं। लिहाजा 37 विधायकों में से छह निकाल दिये जायें तो बाकी 31 विधायक रहते हैं जबकि बहुमत के लिये 34 विधायकों की जरूरत रहेगी। बदले हालातों में मुख्यमंत्री अब दिल्ली रवाना हो रहे हैं ताकि आलाकमान के पास अपना पक्ष रखा जा सके। आशंका जताई जा रही है कि उनकी देखा देखी दूसरे विधायक भी बगावत कर सकते हैं।












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