PubG की लत के शिकार बीटेक छात्र ने रात को मां पर किया हमला, कभी आया था मेरिट में, अब 7 विषयों में फेल

PubG की लत का शिकार बीटेक छात्र ने रात को मां पर किया हमला, कभी आया था मेरिट में, अब 7 विषयों में फेल

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    रोहतक : PubG की लत में गिरफ्त बीटेक छात्र ने मां पर किया हमला, कभी पढ़ाई में था अव्वल

    रोहतक। वो दसवीं की मेरिट में आया था, मगर फिर लगातार फेल होता गया। हद तो तब हो गई जब उसने मां पर ही हमला कर डाला। उसकी जान जोखिम में डाल दी। हर किसी को झकझोर देने वाली यह कहानी सिर्फ हरियाणा के रोहतक के झज्जर चुंगी क्षेत्र स्थित एक कॉलोनी के 19 वर्षीय युवक की नहीं बल्कि ऐसे कई युवकों की जिन्हें ऑनलाइन गेम पबजी की लत लगी हुई है।

    युवक का कॅरियर हो रहा बर्बाद

    युवक का कॅरियर हो रहा बर्बाद

    कभी पढ़ाई में अव्वल रहने वाला यह 19 वर्षीय युवक पबजी गेम खेलने की लत का इस कदर शिकार हुआ है कि इसका कॅरियर बर्बाद होने के साथ-साथ परिवार के लिए भी यह खतरा बन चुका है। दो बहनों का इकलौता भाई जब दसवीं कक्षा में मेरिट में आया था तो पूरे जिले ने इस पर गर्व किया था। तब परिवार का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था।

    बीटेक के सात पेपर में फेल

    बीटेक के सात पेपर में फेल

    मजदूर मां-बाप ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका होनहार बेटा किसी ऑनलाइन गेम का शिकार हो जाएगा और उसके इंजीनियर बनने की राह में पबजी रोड़ा बन जाएगा। युवक के पबजी की लत का नतीजा यह रहा कि वह बीटेक के अंतिम वर्ष में सात पेपर में फेल हो गया।

    आठ हजार रुपए खर्च कर दिलाया स्मार्टफोन

    आठ हजार रुपए खर्च कर दिलाया स्मार्टफोन

    युवक ने दसवीं में मेरिट हासिल करने के बाद डिप्लोमा इंट्रेंस टेस्ट में भी अच्छी रैंक हासिल की। ​तब उसका रोहतक शहर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला हुआ। कुछ समय बाद मां-बाप ने उसे इंजीनियरिंग की पढ़ाई को देखते हुए आठ हजार रुपए खर्च कर स्मार्टफोन दिलाया। यहीं से दिक्कत शुरू हो गई। अब युवक पबजी के चंगुल में ऐसा फंसा है कि परिवार वाले भी कॅरियर को लेकर टेंशन में हैं।

    जब दबोच लिया मां का गला

    जब दबोच लिया मां का गला

    मीडिया रिपोर्टर्स में युवक की मां ने बताया कि एक बार रात को छत से तेज आवाज आने पर लगा कि चोर घुस आए हैं। दबे पांव सीढ़ियों से छत पर पहुंची तो पता चला कि बेटा मोबाइल में गेम खेल रहा है। साथ ही ‘मारो-मारो, वह बंदूक मेरी है, मैं भी इसी स्क्वायड में हूं। क्या कर रहे हो, देखो तुम्हारे पीछे दुश्मन हैं' बेटा मोबाइल में देखते हुए यह सब बड़बड़ा रहा था। जब उसे ऐसा करने से रोका तो उसने गला दबोच लिया। छत से कूदने की धमकी देने लगा।

    काउंसलिंग से समाधान संभव

    काउंसलिंग से समाधान संभव

    रोहतक महर्षि दयानंद विवि के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंजलि मलिक ने बताया कि पबजी गेम ही नहीं बल्कि मोबाइल फोन की लत ही एक तरह से बीमारी बन गई है। काउंसलिंग के जरिए इस समस्या का समाधान संभव है। फिलहाल यह समस्या लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में ज्यादा है। कई युवक ऑनलाइन गेम पबजी खेलने की लत का तेजी से शिकार हो रहे हैं।

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