OPINION: कैसे दूसरे राज्यों के लिए नजीर बन रही हैं हरियाणा सरकार की कल्याणकारी योजनाएं
हरियाणा सरकार लोक कल्याणकारी योजनाओं में दूसरे राज्यों के सामने उदाहरण पेश कर रही है। उन्हीं में से एक है परिवार पहचान पत्र योजना। पहले भी कई योजनाएं दूसरे राज्यों की दलचस्पी बढ़ा चुकी हैं।

हरियाणा सरकार की ओर से कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो दूसरे राज्यों के लिए भी रोल मॉडल बन चुकी हैं। उन्हीं में से एक है- परिवार पहचान पत्र योजना। कई राज्यों ने इसके प्रति इतनी दलचस्पी दिखाई है कि अपने यहां से विशेषज्ञों की टीम भेजकर इसका अध्ययन कर रही है। वैसे हरियाणा सरकार की परिवार पहचान पत्र योजना का मुख्य मकसद प्रदेश के सभी परिवारों का प्रामाणिक, सत्यापित और विश्वसनीय डेटा जुटाना है, जो भविष्य में नागरिकों के कल्याण के लिए इस्तेमाल में लाए जाएं।

हरियाणा परिवार पहचान पत्र योजना
परिवार पहचान पत्र योजना के तहत राज्य में परिवारों की सहमति से उनकी पहचान की जाती है और उनसे जुड़ा बुनियादी डेटा डिजिटली तैयार किया जाता है। इसके तहत योजना ये है कि हर परिवार को 8 अंकों का एक फैमिली-आईडी उपलब्ध करवाई जाए। भविष्य में यह योजना कितनी कारगर साबित होने वाली है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे परिवार के लोगों के जन्म, मृत्यु और विवाह के रिकॉर्ड को भी जोड़ा जा रहा है। इस तरह से यह प्रमाण पत्र परिवार में हुए हर इवेंट्स के बाद अपडेट होते रहेंगे और आगे चलकर तमाम दस्तावेजों का झंझट खत्म।

जन-कल्याण है मकसद
हरियाणा सरकार का इरादा साफ है कि राज्य सरकार जो भी योजनाएं चला रही हैं, उसका लाभ पाने से उस योजना के योग्य नागरिक किसी भी स्थिति में वंचित न रह जाएं। मतलब चाहे सब्सिडी हो या किसी भी तरह की सामाजिक पेंशन या फिर स्कॉलरशिप हो, इसकी मदद से लाभार्थियों की पहचान और उनका खुद से चुनाव सुलभ होना तय है। मतलब पात्रता तय करना सुगम होगा, जिससे सरकार को भी आसानी होगी और प्रत्येक नागरिक का भी कल्याण हो पाएगा।

विभिन्न तरह के आवेदनों की जरूरत खत्म
भविष्य में परिवार पहचान पत्र योजना के महत्त्व को इस तरह से समझा जा सकता है। जब एक बार परिवार का पूरा डेटाबेस तैयार हो जाएगा तो उसके सदस्यों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। जो भी लाभार्थी हो सकते हैं, उनका स्वत: चयन हो सकेगा। क्योंकि, यह डेटा पहले से प्रमामित और सत्यापित होगा। इसलिए बाकी दस्तावेजों की आवश्यकता भी नहीं रह जाएगी।
दूसरे राज्य भी दिखा रहे हैं दिलचस्पी
यही वजह है कि पिछले महीने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस योजना को समझने के लिए अधिकारियों की एक टीम हरियाणा भेजा था। अब वहां भी फैमिली आईडी जारी करने की कोशिश शुरू हो चुकी है। इसके माध्यम से परिवार के कम से कम एक सदस्य को नौकरी या रोजगार से जोड़ने का इरादा है।

हरियाणा सरकार की यह कोई पहली योजना नहीं है, जो दूसरे राज्यों के लिए नजीर बने हों। कुछ समय पहले गुजरात सरकार ने राज्य की खेल नीति को समझने के लिए एक टीम को भेजा था। वहीं इसकी ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को समझने के लिए उत्तराखंड से भी अधिकारी यहां आ चुके हैं। कुछ योजनाओं में तो हरियाणा से केंद्र सरकार को भी मदद मिली है।












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