OPINION: समाज के किसी भी वर्ग को उपेक्षित नहीं छोड़ती हरियाणा सरकार
हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार की यही कोशिश रही है कि समाज में कोई भी वर्ग उसकी कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित न रहने पाएं। यही वजह है कि समाज के वो लोग, जो मुख्यधारा से बहुत अलग रहते हैं, हरियाणा सरकार उन्हें भी अकेला नहीं छोड़ती और हर कदम उनके साथ खड़े रहती है।
बौने और किन्नर समाज के वैसे वर्ग हैं, जो मुख्यधारा से पूरी तरह कटे नजर आते हैं। लेकिन, मनोहर लाल खट्टर सरकार इन वर्ग के लोगों को भी कल्याणकारी योजनाओं से अछूता नहीं छोड़ रही। उनकी आवश्यकताओं का भी ख्याल करती है।

बौनों और किन्नरों का मासिक भत्ता बढ़ाया
यही वजह है कि हरियाणा सरकार ने बौनों और किन्नरों का मासिक भत्ता भी फिर से बढ़ा दिया है। अब उन्हें 2,750 रुपए हर महीने दिए जा रहे हैं। 250 रुपए महीने की यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल, 2023 से ही प्रभावी हो चुकी है। हरियाणा सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने इसका लाभ उठाने के लिए कुछ सीमाएं तय कर रखी हैं।

बौनों के लिए ऊंचाई की सीमा
हरियाणा में बौनों के मामले में मासिक भत्ता पाने के लिए आवश्यक है कि पुरुषों की अधिकतम ऊंचाई 3 फीट 8 इंच और महिलाओं की अधितम ऊंचाई 3 फीट 3 इंच होनी चाहिए या ये 70% दिव्यांग की श्रेणी में आने चाहिए।

18 वर्ष पूरे हो जाने के बाद मिलता है यह भत्ता
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक है कि आवेदक हरियाणा का डोमिसाइल होना चाहिए। साथ ही जो हरियाणा में रहते हों, उन्हें ही इस योजना का लाभ मिलता है। इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक है कि आवेदक ने 18 वर्ष की उम्र पूरे कर लिए हों।

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सिविल सर्जन का सर्टिफिकेट अनिवार्य
बौनों के मामले में आवेदक को सिविल सर्जन से बौना होने का सर्टिफिकेट देना अनिवार्य है। किन्नरों के मामले में भी ऐसे ही सर्टिफिकेट की जरूरत है। साथ ही किन्नरों को मिलने वाला मासिक भत्ता लेने वाले आवेदकों के लिए यह भी जरूरी है कि वो किसी तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल न हों।

हरियाणा सरकार की वेबसाइट के मुताबिक 25 जून, 2023 की सुबह 8 बजे तक प्रदेश में 57 लोगों को बौनों को मिलने वाले भत्ते का लाभ मिल रहा है। जबकि, राज्य में इस योजना के तहत 39 किन्नरों ने अपना नाम दर्ज करा रखा है और वह हर महीने 2,750 रुपए पा रहे हैं। इस योजना के लाभार्थियों की संख्या यह संकेत है कि प्रदेश की सरकार किस तरह से अपने निवासियों के हित को लेकर संवेदनशील है। (बौनों और किन्नरों से जुड़ी तस्वीरें- सांकेतिक)












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