गौ-हत्या, तस्करी रोकने और आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए हरियाणा सरकार ने बनाई ये फोर्स
चंडीगढ़। गौ-तस्करी, गौ-हत्या एवं आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के प्रयास करते हुए हरियाणा सरकार ने स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स (एससीपीएफ) गठित की है। इस टास्क फोर्स में गौ-सेवकों व गौ-रक्षकों शामिल करने का फैसला भी लिया गया है। साथ ही राज्य स्तरीय 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स कमेटी' के गठन की अधिसूचना भी जारी की है। ये कमेटी हर जिले में सक्रिय होगी।

टास्क फोर्स का हिस्सा होंगे 'गौसेवक' और 'गौरक्षक'
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई में सरकार ने संबंधित अधिकारियों को जिला स्तर पर 'स्पेशल काऊ टास्क फोर्स' गठित करने के निर्देश दिए हैं। कहा जा रहा है कि, यह टास्क फोर्स 11 सदस्यीय होगी। जो कि गौ-तस्करी एवं गौ-हत्या जैसे मामलों से निपटने के लिए तैयार की जा रही है। हरियाणा सरकार की ओर से इस बात को स्पष्ठ रूप से कहा जा रहा है कि, गौ तस्करों या गौ हत्यारों से निपटने के लिए 'गौसेवकों' और 'गौरक्षकों' को 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स' में शामिल किया जाएगा। बता दिया जाए कि, यह अधिसूचना हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय द्वारा जारी की गई थी। जिसमें कहा गया कि, 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स' में राज्य स्तर पर 6 सदस्य होंगे और हर जिले के स्तर पर 11 सदस्य होंगे।
राज्य सरकार के इस आदेश कि, पुलिस व सिविल अधिकारियों अलावा, 'गौसेवकों' और 'गौरक्षकों' को टास्क फोर्स का हिस्सा बनाया जाएगा... को एक पक्ष सही नहीं मान रहा। इसका विरोध करने वालों का कहना है कि इससे अपराधिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। दरअसल, अतीत में गौरक्षकों द्वारा कानून हाथ में लेने की कई घटनाएं हो चुकी हैं, जब लोगों ने कथित गौ तस्करों को अपने तरीके से 'दंड' दिया या उनकी जान ही ले ली। ऐसे में गायों को लेकर लिए गए हरियाणा सरकार के ऐसे फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। सरकार की टास्क फोर्स में सरकारी अधिकारियों और पुलिस अफसरों के साथ गौरक्षक दलों के सदस्यों को रखने पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता व नेता रंजीता मेहता इस बारे में कहा कि, गौरक्षक दल किस तरह से गौतस्करी के नाम पर अवैध वसूली और गुंडागर्दी करते हैं, ये सबके सामने है। तो सरकार यदि गौ-रक्षा के नाम पर कोई टास्क फोर्स बना भी रही है तो उसमें सरकारी कर्मचारी और पुलिस को जगह देनी चाहिए, न कि इस तरह से गौरक्षक दलों से जुड़े लोगों को।' वहीं, इस विवाद पर हरियाणा गौसेवा आयोग के सेक्रेटरी का कहना है कि, हर जिले में स्पेशल टास्क फोर्स का मकसद प्रदेश में आवारा पशुओं पर लगाम लगाने के साथ गौतस्करी रोकना है। इसमें उन्हीं गौरक्षक दलों से जुड़े लोगों को रखा जाएगा जिनका ट्रैक रिकॉर्ड ठीक रहा है।

गौरतलब है कि, मनोहर सरकार ने "हरियाणा गौवंश संरक्षण और गौसंवर्धन अधिनियम-2015" को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष कार्य बल बनाने का निर्णय लिया। जिसे 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स' कहा गया। इस टास्क फोर्स को पशु तस्करी के संबंध में जानकारी एकत्र करने और इस तरह की अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रदेश के आवारा पशुओं को गौशालाओं/नंदीशालाओं/गौ अभ्यारण्यों में पहुंचाने के लिए भी यही टास्क फोर्स काम करेगी।
सरकार के नॉटिफिकेशन में कहा गया, "हरियाणा के हर जिले एवं राज्य स्तरीय 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स कमेटी' व 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स' (एससीपीटीएफ) को अधिसूचित करते हुए राज्यपाल को बहुत खुशी हुई है। इस टास्क फोर्स की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जनता से पशु-तस्करी और वध के संबंध में जानकारी एकत्र करके 'हरियाणा गौवंश संरक्षण और गौसंवर्धन अधिनियम-2015' को प्रभावी ढंग से लागू करना और आगे से प्राप्त विशिष्ट इनपुट के बाद ऐसी अवैध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई करना होगा। इसके अलावा इस टास्क फोर्स की अन्य प्रमुख भूमिका राज्य के आवारा पशुओं को गौशालाओं/नंदीशालाओं/गौ अभ्यारण्यों में पुनर्वास करना होगी। 'स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स' द्वारा एकत्रित किए गए मवेशियों का पुनर्वास राज्य की गौशालाओं/नंदीशालाओं में किया जाएगा।












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