Haryana Chunav: 6 बार मुख्यमंत्री देने वाला चौटाला परिवार कैसे झेल रहा है सियासी अस्तित्व बचाने का संकट?
Haryana Chunav 2024: चौटाला परिवार की हरियाणा की राजनीतिक जमीन बहुत गहरी रही है। लेकिन, आज इस परिवार को अपना सियासी वजूद बचाए रहने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इस परिवार से जुड़ी दो राजनीतिक पार्टियां चुनाव मैदान में हैं। इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) और जननायक जनता पार्टी (JJP)।
एक ही परिवार की दो अलग-अलग पार्टियों को इस बार दो अलग-अलग दलित पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ना पड़ रहा है। हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में चौटाला परिवार की कभी तूती बोलती थी। इस परिवार का सियासी सफर 'किंग' बनने के साथ शुरू हुआ और फिर 'किंगमेकर' तक की भूमिका निभाई।

लेकिन, अब आईएनएलडी को बीएसपी के साथ और जेजेपी को आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने की नौबत आ चुकी है।
चौटाला परिवार को 6 बार बना मुख्यमंत्री बनने का मौका
हरियाणा के सियासी इतिहास में अबतक 11 मुख्यमंत्री हुए हैं। सीएम नायब सिंह सैनी हरियाणा के 11वें मुख्यमंत्री हैं। इन 11 मुख्यमंत्रियों में से चौटाला परिवार को पूरे 6 बार मुख्यमंत्री की कुर्सी नसीब हुई है। चौटाला परिवार के सबसे पहले राजनीतिक दिग्गज देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल थे, जिन्हें दो बार हरियाणा के सीएम बनने का मौका मिला था।
मायावती और चंद्रशेखर के सहयोग के भरोसे टिकी आगे की राजनीति!
उनके बाद उनके बेटे ओम प्रकाश चौटाला को पूरे चार कार्यकाल सीएम की कुर्सी पर रहने का अवसर प्राप्त हुआ। लेकिन, मौजूदा हरियाणा विधानसभा चुनाव इस परिवार के लिए अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए महत्वपूर्ण हो चुका है। एक समय में जहां इस परिवार का हरियाणा की राजनीति में एकतरफा दबदबा होता था, आज इन्हें मायावती और चंद्रशेखर की मदद लेनी पड़ रही है।
दो दशक के बाद जेजेपी ने निभाई किंगमेकर की भूमिका
चौटाला परिवार का हरियाणा की राजनीति में यह दबदबा लगभग साल 2000 तक कायम था। तब यह परिवार प्रदेश की राजनीति का अगुवा हुआ करता था। हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में जेजेपी को 10 सीटें मिलीं और देवीलाल के परपोते दुष्यंत चौटाला किंगमेकर की भूमिका निभाते हुए लगभग 5 वर्षों तक उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे रहे।
2019 में टूट गई देवीलाल की आईएनएलडी
आईएनएलडी का गठन खुद चौधरी देवीलाल ने किया था, जिसे कई बार राज्य में सत्ता संचालन का मौका मिला। 2019 के चुनावों से ठीक पहले उनके एक पोते अजय चौटाला और उनके बेटे (देवीलाल के परपोते) दुष्यंत चौटाला ने आईएनएलडी छोड़कर जेजेपी नाम से नई पार्टी बनाई।
2024 के लोकसभा चुनावों में दोनों के सामने खड़ा हुआ अस्तित्व का संकट
2024 के लोकसभा चुनावों में आईएनएलडी हरियाणा की 10 में से 7 सीटों प प्रत्याशी दिए और वह मात्र 1.84% वोट जुटा सकी। वहीं जेजेपी सभी 10 सीटों पर लड़ी और उसे सिर्फ 0.87% वोट मिल सके।
कई सीटों पर चौटाला परिवार के सदस्य आपस में ही लड़ रहे चुनाव
चुनाव के जानकारों का मानना है कि इस बार के विधानसभा चुनावों में हरियाणा में ज्यादातर सीटों पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के ही बीच है। लेकिन, आईएनएलडी ने बीएसपी और जेजेपी ने आजाद समाज पार्टी के साथ हाथ मिलाकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है।
इस चुनाव में कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां चौटाला परिवार के ही अलग-अलग सदस्य अलग-अलग दलों से एक-दूसरे को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। जैसे रानिया और डबवाली में देवीलाल परिवार के ही सदस्य अलग-अलग दलों से एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
रानिया में आईएनएलडी ने देवीलाल के परपोते अर्जुन चौटाला को टिकट दिया है तो उनके खिलाफ जेजेपी से देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला ही चुनाव मैदान में हैं।
वहीं डबवाली में देवीलाल के परपोतों के बीच ही चुनावी जंग छिड़ी हुई है। जैसे जेजेपी से दुष्यंत चौटाला के भाई दिग्विजय चौटाला मैदान में हैं तो उनके खिलाफ आईएनएलडी ने आदित्य चौटाला को उतारा है।












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