Haryana Chunav: BJP ने मतदान से पहले OBC वोट के लिए अपनाई क्या रणनीति?

Haryana Chunav 2024: हरियाणा में लगातार तीसरी बार सत्ता में आना बीजेपी के लिए बहुत बड़ी चनौती है। उसके सामने दो-दो कार्यकालों की एंटी-इंकंबेंसी है। लेकिन, पार्टी हर हाल में सत्ता में वापसी के लिए जमीनी रणनीति बनाकर उसपर अमल कर रही है। वह वहां पर खासतौर पर टारगेट कर रही है, जहां से उसे वोट मिलने की संभावना ज्यादा है। इसी कड़ी में विशेष रूप से ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए उसने अभी से डोर-टू-डोर कैंपेन छेड़ दी है।

हरियाणा में बीजेपी को पहले से ही ब्राह्मण, बनिया और पंजाबियों की पार्टी कहा जाता रहा है। क्योंकि, इन समुदाय के मतदाताओं में उसकी परंपरागत पकड़ रही है। इस चुनाव को हर हाल में जीतने के लिए बीजेपी इस बार ओबीसी की विभिन्न जातियों का समर्थन जुटाने के लिए तमाम कोशिशों में जुटी हुई है।

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हरियाणा में बीजेपी की चार बड़ी चुनौतियां
हरियाणा चुनाव में बीजेपी के सामने चार बड़ी चुनौतियां दिख रही हैं। किसानों का आंदोलन उसके सामने है। हरियाणा के कुछ खिलाड़ी या यूं कहें कि पहलवान उसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और उनमें से एक विनेश फोगाट कांग्रेस में सीधे तौर पर शामिल होकर चुनाव भी लड़ रही हैं।

बीजेपी सरकार की ओर से काफी कुछ भ्रांतियां दूर करने की कोशिशें की गई है और युवाओं के भविष्य सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की गई है, फिर भी अग्निपथ योजना को लेकर जो बात लोगों के मन में जा चुका है, उससे उबरना इतना आसान नहीं लग रहा है।

इन सबमें सबसे बड़ा मसला कथित तौर पर जाटों का बीजेपी के खिलाफ गोलबंद होना है। प्रदेश में इनकी आबादी 27% से 28% बताई जाती है, जो कि प्रदेश का सबसे बड़ा जाति समूह है।

ओबीसी जातियों पर सीधा फोकस
ऐसे में भाजपा ने जाटों से भी बड़े जाति समूह ओबीसी वोट बैंक पर अब पूरी तरह से फोकस कर दिया है। राज्य में ओबीसी आबादी 35% से अधिक बताई जाती है।

मतदान के दिन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता धर्मेंद्र प्रधान ने विधानसभा सीटों के हिसाब से विभिन्न जातियों के नेताओं के साथ सीधी बैठकें करनी शुरू कर दी हैं।

बीजेपी के चुनाव प्रबंधन के लिए धर्मेंद्र प्रधान किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कई राज्यों में बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने में जमीनी रणनीति तैयार करके उसपर अमल करवाया है। ऐसे राज्यों में देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश भी शामिल है।

किन ओबीसी जातियों पर फोकस कर रही है बीजेपी?
हरियाणा में उनकी कोशिश विभन्न जातियों के उन नेताओं से संपर्क करने पर है, जिनकी आबादी संबंधित विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के लिए महत्वपूर्ण हैं। हरियाणा में ओबीसी जातियों में पाल, कश्यप, खाटी, कुम्हार, नाई, गुर्जर, यादव और अहीर और सैनी आदि प्रमुख हैं।

ओबीसी जातियों तक क्या संदेश पहुंचा रही है बीजेपी?
इन जातिगत बैठकों के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी बिरादरी के उन नेताओं के बीच यह बात रखना चाहती है कि उसने राज्य में एक ओबीसी नेता नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया है। कांग्रेस से ज्यादा ओबीसी को टिकट भी दिया है और केंद्र सरकार की तमाम नीतियां और योजनाएं इसी वर्ग के हितों को देखकर चलाई जा रही हैं।

पार्टी की एक ऐसी ही बैठक में मौजूद रहे भाजपा के एक ओबीसी वर्कर ने बताया है कि इन बैठकों की वजह से चुनावों से पहले इसके अभियान को एक धार मिल गई है।

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