सरकार को इतना बेदर्द नहीं होना चाहिए, हक मांगते कई किसानों की जान जा चुकी है: पूर्व CM हुड्डा
चंडीगढ़। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के विरोध-प्रदर्शन को 18 दिन बीत गए हैं। आंदोलन के दरम्यान अब तक कई जानें जा चुकी हैं। इसे लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधा। हुड्डा ने जींद के उझाना गांव में पहुंचकर किसान किताब सिंह की मृत्यु पर दुख जताया। उसके बाद उन्होंने कहा कि, सरकार की अनदेखी किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। अब तक दर्जनभर प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है। हमने जींद के गांव उझाना में किसान किताब सिंह के घर पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके परिवारजनों को ढांढस बंधाया है।

हुड्डा ने कहा कि, ''सरकार को किसानों के प्रति इतना बेदर्द नहीं होना चाहिए। किसानों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और मांगे पूरी तरह जायज़ हैं। हम किसानों की मांगों के साथ खड़े हैं, एमएसपी की गारंटी उनका अधिकार है। हमारा कहना है कि, सरकार किसानों की मांगों पर संवेदनशीलता व तत्परता से विचार करे।' हुड्डा ने कहा कि, 'प्रदेश सरकार शहीद किसान परिवारों को उचित मुआवज़ा और एक-एक सरकारी नौकरी दे।'

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि, वर्ष 2010 में हमारी कमेटी की सिफारिशों पर किसी भी किसान या किसान संगठन ने उंगली नहीं उठाई थी। क्योंकि, हमने सभी किसान संगठनों से सुझाव मांगे और उनके सुझावों को आधार बनाकर कमेटी ने अपनी सिफारिशें की थीं।' उन्होंने कहा कि, बीजेपी नये कृषि कानूनों को हमारी कमेटी की सिफारिशें बताकर देश को गुमराह कर रही है। हमारी कमेटी ने ऐसी कोई सिफारिश नहीं की, जिससे किसानों का अहित हो। सच्चाई ये है कि हमारी कमेटी ने मंडियों के विस्तार और स्वामीनाथन आयोग के सी-2 फार्मूले पर किसानों को MSP देने की सिफारिश की थी। हमारी कमेटी का मकसद किसानों को सुदृढ़ करना और उन्हें हितों का संरक्षण करना था।''
मालूम हो कि, विभिन्न इलाकों में धरने पर मौजूद अब तक जींद, सोनीपत और हिसार के कई किसानों की जान जा चुकी है। पंजाब-हरियाणा दोनों राज्यों के दर्जनभर किसान अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं।












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