Haridwar kumbh mela 2021: इस बार 10 अनुसूचित जाति और 5 महिलाओं को भी मिलेगी महामंडलेश्वर की उपाधि
देहरादून। हरिद्वार के महा कुंभ में इस बार पांच महिला समेत 23 संतों की महामंडलेश्वर पद पर ताजपोशी होगी। इसमें सबसे अहम बात ये हैं कि, इस बार अखाड़ा ने अनुसूचित जाति समाज के संतों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। इसके अलावा महाकुंभ में होने वाले पहले शाही स्नान के लिए अखाड़ों का स्नान का क्रम और समय तय कर लिया गया है। सबसे पहले जूना अखाड़ा शाही स्नान करेगा।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि ने बताया कि, इस बार कुंभ में पांच महिलाओं व अनुसूचित जाति के 10 संतों समेत 23 संतों की महामंडलेश्वर पद पर ताजपोशी की जाएगी। उन्होंने कहा कि, सामाजिक संतुलन के लिए हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। बदलते सामाजिक परिवेश को देखते हुए जूना अखाड़ा ने ये फैसला लिया है। इससे पहले प्रयागराज कुंभ में अनुसूचित जाति समाज के संत को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई थी।
हरिगिरि ने बताया कि 2021 के हरिद्वार कुंभ के लिए देशभर से 1450 संतों ने महामंडलेश्वर की पदवी की इच्छा जताई है। इसके लिए आवेदन भी किए हैं। आवेदनों पर समीक्षा और चर्चा चल रही है। श्रीमहंत ने बताया कि 23 महामंडलेश्वर बनाएं जाएंगे। इनमें सर्वाधिक दस महामंडलेश्वर अनुसूचित जाति के संत होंगे। 23 महामंडलेश्वरों में पांच महिलाएं भी होंगी। महामंडलेश्वर की दीक्षा से पहले गुण-दोष के अधार पर उनका मूल्यांकन होगा।
महामंडलेश्वर अखाड़े का सबसे गरिमापूर्ण पद है। आवेदकों के गुण-दोष के आधार पर मूल्यांकन होगा। 23 महामंडलेश्वर बनाए जाने हैं। ताजपोशी के बाद उनकी सक्रियता के आधार पर जूना अखाड़े की ओर से वाहन के अलावा जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी।












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