jyotiraditya scindia birthday : 4 हजार करोड़ के जयविलास पैलेस में रहते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया
ग्वालियर, 1 जनवरी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आज जन्मदिन है। ये 1 जनवरी 1971 को पैदा हुए थे। साल 2022 में 51 साल हो चुके हैं। दो साल पहले सिंधिया कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में आ गए थे। फिर राज्यसभा और नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार 2021 में नागरिक उड्डयन मंत्री बने।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का सियासी सफर
-साल 2001 में 30 सितंबर को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया का हवाई जहाज हादसे में निधन हो गया था।
-पिता के निधन के बाद 2001 में 18 दिसम्बर को ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस की सदस्यता ली।
-ज्योतिरादित्य ने चुनाव के लिए अपने पिता की सीट गुना को चुना।
-गुना लोकसभा के उपचुनाव में 24 फरवरी 2002 को ज्योतिरादित्य सिंधिया साढ़े चार लाख वोट से जीतकर पहली बार सांसद बने।
-2007 में मनमोहन सिंह सरकार मे ज्योतिरादित्य को केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री बने।

जब गुना से करना पड़ा हार का सामना
-साल 2009 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य गुना से लगातार तीसरी बार जीते।
-तब मनमोहन सिंह की सरकार में सिंधिया को वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया।
-लोकसभा चुनाव 2014 में सिंधिया गुना से फिर चौथी बार जीते, लेकिन लोकसभा में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका आ गई थी।
-साल 2019 में ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार पांचवी बार गुना सीट से चुनाव लड़े, लेकिन उलटफेर का शिकार हो गए और बीजेपी के कृष्ण पाल सिंह यादव से सिंधिया डेढ़ लाख वोटों से हरा गए।
-साल 2020 में 10 मार्च को सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत करके इस्तीफा दिया और भाजपा का दामन थाम लिया।
-भाजपा मे आने के बाद सिंधिया राज्यसभा सांसद बने। मोदी सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्रीय नगरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें
-केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखते हैं।
- सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था। विदेश से पढ़ाई की।
-इनकी शादी गुजरात के बड़ौदा के राजपरिवार की प्रियदर्शनी राजे के साथ हुई।
-ज्योतिरादित्य व प्रियदर्शनी के एक बेटा महाआर्यमन और एक बेटी है।
-सिंधिया ग्वालियर में अपने परिवार के साथ 4 हजार करोड़ रुपए की कीमत वाले जयविलास पैलेस में रहते हैं।
-सिंधिया राजवंश के शासक जयाजी राव सिंधिया ने सन 1874 में जय विलास महल बनवाया था।
-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट सर माइकल फिलोस ने जय विलास महल को डिजाइन किया था।
-12 लाख 40 हजार 771 वर्ग फीट में फैले जयविलास में चार सौ कमरे हैं।
-146 साल पहले सन 1874 में जयविलास के निर्माण में एक करोड़ रुपए खर्च हुआ था।
-विदेशी कारीगरों की मदद से जय विलास महल को बनाने में 12 साल का समय लगा था।

दरबार हॉल जयविलास महल की शान
-ग्वालियर स्थित ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल की दूसरी मंजिल पर बना दरबार हॉल जयविलास महल की शान कहा जाता है।
-हॉल की दीवारों और छत को पूरी तरह सोने-हीरे-जवाहरात से सजाया गया था। इस पर दुनिया का सबसे ज्यादा वजनी झूमर लगाया गया है।
-साढ़े तीन हजार किलो के झूमर को लटकाने से पहले कारीगरों ने छत की मजबूती को परखा। इसके लिए छत के ऊपर नौ से दस हाथियों को खड़ा किया था।
-10 दिन तक छत पर हाथी चहलकदमी करते रहे। जब छत मजबूत होने का भरोसा हो गया, तब फ्रांस के कारीगरों ने इस झूमर को छत पर लटकाया।
-रिसायत कालीन दौर में जब भी कोई राजप्रमुख या बड़ी शख्सियत ग्वालियर आते थे तो उनका खास स्वागत दरबार हॉल में ही किया जाता था।

डायनिंग हॉल में चांदी की ट्रेन
-जयविलास महल के नीचे बने डायनिंग हॉल में शाही परिवार का भोज होता था। यहां बड़ी डायनिंग टेबल लगी हुई है।
-इसके आसपास एक वक्त में पचास से ज्यादा लोग शाही भोजन कर सकते हैं। खास बात ये है कि भोजन के दौरान परोसने के लिए किसी कर्मचारी की जरूरत नहीं पड़ती।
-यहां पर चांदी की ट्रेन से मेहमानों को खाना परोसा जाता है। ट्रेबल पर ट्रेन के लिए बाकायदा पटरी बनाई गई है। इस पटरी पर चांदी की ट्रेन चलती है।
-ट्रेन में डिब्बों में अलग-अलग लजीज पकवान होते हैं। ट्रेन मेहमान के सामने रुक जाती। फिर भोजन लेने के बाद ट्रेन आगे रवाना होती है। शाही या खास विदेशी मेहमानों को इसी डायनिंग हॉल में भोजन कराया जाता है।












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