हाईकोर्ट की केंद्र को सलाह, सहमति से संबंध बनाने की उम्र 16 साल हो, पोस्को एक्ट में दर्ज मामले को किया रद्द
consensual relationship: ग्वालियर हाईकोर्ट ने पॉस्को एक्ट के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को सलाह भी दी है कि संबंध बनाने की उम्र 18 से 16 वर्ष की जानी चाहिए। दरअसल हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 3 साल से जेल में बंद आरोपी पर दर्ज दुष्कर्म व पोस्को एक्ट का केस रद्द कर दिया है।
बेटे ने केंद्र सरकार को सलाह देते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 375 में सहमति से संबंध बनाए गए संबंधों की उम्र 18 वर्ष है, उसे फिर से 16 वर्ष किया जाए। कोर्ट ने अपने अनुभव साझा कर कहा कि सहमति से बनाए संबंधों की उम्र बढ़ाने से सामाजिक ताना-बाना बिगड़ा है।

इंटरनेट मीडिया के कारण किशोर वयस्क की तरह सोचने लगे: हाई कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट की सुलभता और सोशल मीडिया के कारण 14 साल के किशोर वक्त की तरह सोचने लगे हैं। लड़का-लड़की संपर्क में आते हैं तो सहमति से संबंध बनाते हैं। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट सुविधा के चलते आजकल 14 साल की आयु में ही बच्चे जवान हो रहे हैं। एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होकर सहमति से संबंध बनाते हैं। ऐसे मामलों में युवा कतई आरोपी नहीं हैं। ये केवल उस आयु का मामला है, जिसमें वे युवती के संपर्क में आए और शारीरिक संबंध स्थापित किए। कानून बनाने वालों ने इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए आयु 16 साल तय की थी।
जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि आजकल अधिकांश क्रिमिनल केसों में पीड़िता की आयु 18 साल से कम होती है और इसी विसंगति के कारण किशोर युवकों के साथ अन्याय हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार से अनुरोध है कि पीड़िता की आयु को 18 से घटाकर 16 कर दिया जाए। ताकि, अन्याय का निवारण किया जा सके। बता दें कि छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोप में राहुल को 17 जुलाई 2020 को गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल बंद है।
क्या है पूरा मामला
थाटीपुर थाने में नाबालिग ने राहुल चंदेल पर दुष्कर्म व पोक्सो एक्ट में केस दर्ज कराया था। आरोप था कोचिंग जाने के दौरान 18 जनवरी 2020 को राहुल चंदेल मिला। वह नाबालिग को अपने साथ लेकर गया और कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। वीडियो भी बनाया फिर ब्लैकमेल कर दुष्कर्म करने लगा। गर्भपात भी कराया आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पीड़िता घटना के दिन बलि नाबालिक थी पर संबंध सहमति से बने घटना के 6 माह बाद फिर दर्ज कराया गया। शासन ने पीड़िता के नाबालिग होने के कारण याचिका खारिज करने की अपील की थी।
मेघालय हाईकोर्ट ने भी रद्द किया था केस
मेघालय हाई कोर्ट ने पॉस्को एक से जुड़े 2021 के एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि 16 साल की लड़की फैसला ले सकती है कि उसका किसी के साथ संबंध बनाना सही है या नहीं। कोर्ट ने यौन उत्पीड़न से जुड़ा केस रद्द कर दिया था
सेक्स एजुकेशन बिना देरी के करें लागू
पूर्व कुलपति डॉ आशा शुक्ला ने कहा कि यह सही है इंटरनेट की सुलभता ने किशोरों में जल्द ब्लैक ताला दी है उनमें यौन संबंध के प्रति उत्सुकता बढ़ती है दुर्भाग्य है कि देश में सेक्स एजुकेशन का सिस्टम नहीं है। सामाजिक तानाबाना भी ऐसा है कि इस संबंध में बच्चों को स्कूली शिक्षा की तरह यह नहीं बताते वह जिज्ञासा संतुष्टि के लिए प्रयोग करने लगते हैं ऐसे में समाज लड़के लड़कियों को बुरी नजर से देखता है। नहीं कहा जा सकता कि कौन दोषी है इन्हीं मामलों की आड़ में दुष्कर्म भी होते हैं। खुलासा होने पर सहमति कहा जाता है। सेक्स एजुकेशन लागू करना चाहिए। संबंधों की उम्र 18 से उम्र 16 वर्ष करना निदान नहीं हो सकता है।












Click it and Unblock the Notifications