Assam UCC पर खास प्लान बना रही भाजपा, CM हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में लागू होगा कानून!
Assam UCC पर भाजपा खास प्लान बना रही है। यूं तो संसद में समान नागरिक संहिता को लेकर विधेयक पेश किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में भी UCC पर खास तैयारी हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, CM हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (UCC) का कानून लागू करने के लिए भाजपा खास रणनीति बना रही है। असम सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अंतिम निर्णय होने तक बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित कर सकती है।

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सरमा ने कहा कि राज्य सरकार यूसीसी के पक्ष में है, जबकि तमिलनाडु, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम जैसे अन्य राज्यों में भाजपा के सहयोगियों ने ही यूसीसी के कार्यान्वयन पर विरोध भी किया है।
सरमा ने गुवाहाटी में एक कार्यक्रम में कहा, यूसीसी एक ऐसा मामला है जिस पर फैसला संसद द्वारा किया जाएगा, लेकिन राज्य भी राष्ट्रपति की सहमति से इस पर फैसले ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''असम सरकार पहले ही बता चुकी है कि वह उसके समर्थन में है।'' उन्होंने कहा, 'यूसीसी में विभिन्न मुद्दे शामिल हैं और विधि आयोग के साथ-साथ संसदीय समिति भी इसे देख रही है।
यूसीसी पर निर्णय लंबित होने तक, 'हम इसके एक खंड बहुविवाह को हटाना चाहते हैं - और इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहते हैं।' समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सरमा ने कहा, हम सितंबर में विधानसभा सत्र में बहुविवाह प्रतिबंध के लिए एक विधेयक पेश करने की योजना बना रहे हैं।
सरमा ने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी कारण से विधेयक पेश करने में विफल रहती है, तो यह जनवरी सत्र में किया जाएगा। हालांकि, इस बीच, अगर यूसीसी लागू होता है, तो हमें यह कार्रवाई नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि इसका इसके साथ विलय हो जाएगा।'
पैनल गठित
मई में, असम सरकार ने बहुविवाह को समाप्त करने के लिए कानून बनाने के लिए राज्य विधायिका की विधायी क्षमता की जांच करने के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रूमी फूकन की अध्यक्षता वाले पैनल को 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है।
विपक्ष पर करारा प्रहार
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आश्चर्य जताया कि अगर उस पार्टी के किसी नेता की बेटी है, तो 'क्या वह व्यक्ति उसकी शादी दो पत्नियों वाले किसी व्यक्ति से करेगा।'
बकौल सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, 'समस्या यह है कि कांग्रेस नेताओं को मुस्लिम महिलाओं के दर्द का एहसास नहीं है। उन्होंने कहा, वे उनका वोट तो ले लेते हैं लेकिन उन्हें कुछ भी वापस नहीं देना चाहते।
सरमा ने कहा, कांग्रेस मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं दोनों से वोट पाना तो चाहती है लेकिन सेवा केवल पुरुषों की करना चाहती है। उन्होंने कहा, 'यहां तक कि नबी (पैगंबर) ने भी बहुविवाह का समर्थन नहीं किया।
असम के मुख्यमंत्री ने कहा, पैगंबर मुहम्मद ने कहा था कि सभी मुसलमानों को आदर्श रूप से एक पत्नी रखनी चाहिए। ये इस्लाम के आवश्यक बिंदु हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को बहुविवाह का समर्थन नहीं करना चाहिए और मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। भले ही उन्हें कुछ वोटों का नुकसान हो।'
बकौल मुख्यमंत्री हिमंत, कांग्रेस ने तीन तलाक और अब यूसीसी को खत्म करने का विरोध किया था, इसलिए एक तरह से पार्टी 'मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ रही है।' सरमा ने दावा किया, 'जब वे (मुस्लिम महिलाएं) खुद को पुरुषों के प्रभाव से मुक्त कर लेंगी, तो वे कांग्रेस को दंडित करेंगी।'
बता दें कि असम की राजनीतिक पार्टी- एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल ने भी UCC का विरोध किया है। उनके दावे पर सरमा ने कहा कि वह मुस्लिम पुरुषों की आवाज हैं, महिलाओं की नहीं।
उन्होंने कहा, 'हम हमेशा मुस्लिम महिलाओं से बातचीत करते रहते हैं और वे कहती हैं कि उन्हें एक समस्या है क्योंकि वे खुलकर अपनी बात नहीं कह सकतीं। भाजपा नेता ने कहा, ''वे हमें यह भी बताते हैं कि अल्लाह हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद देंगे।''
यूसीसी के बारे में आई खबरों के अनुसार, विवाह, तलाक और विरासत पर सामान कानून बनेंगे। दावा है कि UCC धर्म, जनजाति या अन्य स्थानीय रीति-रिवाजों को प्रभावित नहीं करते, लेकिन कानून सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होगा। ये भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रहा है।












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