अनाथ आश्रम में रहने वाला भार्गव यूं बना करोड़पति, मुम्बई-सूरत में हैं फ्लैट-बंगले

सूरत। कभी अनाथ आश्रम में रहने वाला भार्गव मेवावाला अब करोड़पति है। मुम्बई-सूरत में फ्लैट-बंगलों का मालिक है। सौ से ज्यादा कम्पनियों का शेयर धारक है। इसके पास अच्छा-खासा बैंक बैलेंस है। यह रील लाइफ नहीं बल्कि रियल लाइफ स्टोरी है। सूरत के पोपावाला चिल्ड्रन होम में रहने वाले भार्गव मेवावाला जिंदगी में 12 साल की उम्र में उस वक्त नया मोड़ आ गया था जब उसे चोरी की लत गई थी। इसकी वजह से पिता जितेश मेवावाला बेटे से नफरत करने लगी। बाप-बेटे के बीच नफरत इस कदर बढ़ गई कि वे उसे अनाथालय गए।

भार्गव ने अनाथ आश्रम में जमकर की पढ़ाई

भार्गव ने अनाथ आश्रम में जमकर की पढ़ाई

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार पोपावाला चिल्ड्रन होम के अधिकारी रमेश भाई ने बताया कि भार्गव को जब छोड़कर गए तब वह महज 12 साल का था। उसे चोरी करने की आदत थी। वक्त के साथ-साथ भार्गव बुरी आदत में सुधार हो गया। उसने पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर लगा दिया, मगर उसके प्रति पिता की नफरत कम नहीं हुई। वे उसे अनाथ आश्रम से घर नहीं ले गए। पिता साल में एक-दो बार उससे मिलने आते थे। आश्रम के अधिकारी उनसे पूछते कि बच्चे से इतनी अधिक नफरत का कारण आखिर क्या है? पर वे अपने निर्णय से टस से मस नहीं हुए। जब भार्गव 18 साल का हुआ, तो उन्हें यह बताया गया कि बच्चा भार्गव अब युवा हो चुका है। आप उसे ले जा सकते हैं। पर पिता का जवाब था कि मैं उसे नहीं ले जाऊंगा, पर उसकी फीस भरता रहूंगा।

 डेढ़ साल तक रेस्टारेंट में नौकरी की

डेढ़ साल तक रेस्टारेंट में नौकरी की

भार्गव बीबीए करना चाहता था। इसलिए 12 वीं पास करने के बाद उसने बीबीए की पढ़ाई शुरू भी की। तब वह ओलपाड के हॉस्टल में रहता था, उसने हॉस्टल छोड़कर रेस्टारेंट में रहना शुरू किया। साथ ही पढ़ाई को जारी रखने के लिए उसे नौकरी भी शुरू की। डेढ़ साल तक वह रेस्टारेंट में रहते हुए नौकरी की। इसके बाद उसने पढ़ाई छोड़कर अपना पूरा ध्यान अपने कैरियर में लगा दिया। अब वह कॉस्मेटिक चीजों की मार्केटिंग करने लगा। छुट्टियों पर वह अनाथालय आता और सबसे मिलता-जुलता था।

 नौ साल बाद पसीजा पिता का दिल

नौ साल बाद पसीजा पिता का दिल

9 साल बाद पिता का दिल पसीजा। उन्होंने अचानक चिल्ड्रन होम पहुंचकर अपने बेटे के बारे में पूछताछ की। पिता को देखकर भार्गव बहुत खुश हुआ। दोनों गले मिलकर काफी देर तक रोते रहे। आखिर में पिता ने कहा-चल बेटा, घर चल। इसके बाद भार्गव अपने पिता के साथ 3 दिनों तक रहा। इस दौरान बनासकांठा में रहने वाली बहन से भी मुलाकात की। बेटी-दामाद और भार्गव को लेकर पिता अंबाजी गए। वहां दर्शन कर लौटे। इसके बाद पिता ने बेटे भार्गव से कहा-बेटा, मैं तीर्थ यात्रा के लिए जा रहा हूं। आते ही हम सब मिलकर रहेंगे। पिता के जाने के 23 दिन बाद पता चला कि उनके पिता का हरिद्वार में देहांत हो गया है। अब भार्गव फिर अकेला हो गया है। पिता मिलकर भी नहीं मिल पाए। कुछ लोगों की मदद से भार्गव हरिद्वार पहुंचा। वहां उसने पिता की अंतिम क्रिया की और वापस सूरत लौट आया।

पिता के नाम पर करोड़ों की सम्पत्ति

सूरत आने के बाद भार्गव को पता चला कि उसके पिता फ्रूट्स के बड़े व्यापारी थे। उनके नाम करोड़ों की सम्पत्ति है। पिता के नाम पर 118 कंपनियों के शेयर हैं। 35 लाइफ पॉलिसी, लाखों के बांड, मुम्बई-सूरत में फ्लैट और बंगले, बैंक लॉकर और एकाउंट में लाखों रुपए। जिसका वह एकमात्र वारिस है। पिता की मौत के बाद वह करोड़पति तो बन गया, मगर पिता का प्यार नहीं पा सका।

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