देश की पहली बुलेट ट्रेन: पावर सप्लाई के लिए बनाए जाएंगे 14 ट्रैक्शन, 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन, जानिए खास बातें

अहमदाबाद। देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के सीएस-4 और सीएस-6 पैकेज के आॅर्डर (ठेका) सौंपने का काम पूरा हो चुका है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसीएल) की ओर से अब बताया गया है कि, बुलेट ट्रेन की पावर सप्लाई के लिए 14 ट्रैक्शन और 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन बनाए जाएंगे। ये सब-स्टेशन बुलेट ट्रेन के स्टेशनों के पास ही होंगे। इन सबस्टेशंस के जरिए परियोजना में बिजली खपत की जरूरत पूरी होगी। एक इलेक्ट्रिक सबस्टेशन सूरत के अन्तरोली में बनाया जाना है, वहां विद्युत सप्लाई के लिए गुजरात विद्युत की ओर से 32 लोकेशनों पर कनेक्शन दे दिए गए हैं। इसके अलावा बाकी की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। बिजली का इंतजाम होते ही बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण-कार्य शुरू होगा।

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    लार्सन एंड टुब्रो (L&T) करेगी बड़े हिस्से का निर्माण कार्य

    लार्सन एंड टुब्रो (L&T) करेगी बड़े हिस्से का निर्माण कार्य

    यह बुलेट ट्रेन परियोजना महाराष्ट्र के मुंबई शहर से अहमदाबाद तक है। सी-4 और सी-6 पैकेज को मिलाकर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना अब देश का सबसे बड़ा इंफ्रा प्रोजेक्ट बन गई है। बताते चलें कि, अहमदाबाद-मुंबई रूट कुल 508 किमी लंबा है। जिस पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन शुरू की जानी है। देश की इस पहली बुलेट ट्रेन का वडोदरा-सूरत-वापी रूट का ठेका लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को सौंप गया था। जिसे देश का अब तक का सबसे बड़ा सिंगल आर्डर (अनुबंध) माना जा रहा है। 24000 करोड़ का यह आर्डर मिलने के बाद लार्सन एंड टुब्रो ने कहा कि हमने बुलेट ट्रेन के 46% हिस्से का काम 4 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। 237 किमी के हिस्से पर लार्सन एंड टुब्रो जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करेगी। जिसमें उसके द्वारा वडोदरा से वापी रूट पर एलिवेटेड पुल, स्टेशन, रिवर ब्रिज और डिपो तैयार किए जाने हैं।

    508 KM वाली बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशन बनेंगे

    508 KM वाली बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशन बनेंगे

    इस परियोजना में कुल 12 स्टेशन बनेंगे। इस 508 किमी के हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का 155 किमी रूट महाराष्ट्र में, 4.3 किमी रूट यूनियन टेरेटरी दादरा नगर हवेली में और 348 किमी हिस्सा गुजरात में है। इस तरह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन का रूट 500 किलोमीटर से ज्यादा लंबा हो जाता है। इस हाई स्पीड रेल की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटा होगी। यानी यह ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई की दूरी 2 घंटे में तय कर सकती है। तेज स्पीड के चलते एक ट्रेन सीमित स्टेशनों पर ही रुकेगी। वहीं, स्लो बुलेट ट्रेन यह दूरी 3 घंटे में तय करेगी और सभी 12 स्टेशनों पर ठहरेगी।

    2023 तक पूरी हो सकती है परियोजना

    2023 तक पूरी हो सकती है परियोजना

    एनएचआरसीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर अचल खरे के मुताबिक, रूट पर ये हाईस्पीड ट्रेन 2023 के अंत तक दौड़ सकती है। अचल खरे ने पिछले साल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आ रही अड़चनों का भी जिक्र किया। जिसमें लोगों को रोजगार मुहैया कराने का वादा करते हुए खरे ने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 25,000 लोगों को रोजगार दिया जाएगा। यह बिलियन डॉलर्स का प्रोजेक्ट है तो इसमें कर्मचारियों की संख्या भी काफी ज्यादा होगी। अधिकारियों के मुताबिक, 24 हजार करोड़ रुपए बड़ी राशि का अनुबंध तो अकेले लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ हुआ है। एलएंडटी के पास पैकेज सी-4 यानी वडोदरा-सूरत-वापी तक परियोजना का 46.66% हिस्से का काम है। उसके द्वारा यहां एलिवेटेड मार्ग, नदियों पर ब्रिज, सूरत डिपो एवं अन्य इंजीनियरिंग कार्य भी होंगे।

    सूरत में रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो बनाया जाएगा

    सूरत में रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो बनाया जाएगा

    नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की तरफ से यह भी बताया गया है कि, मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन (शिंकासेन ट्रेन) के सेट समुद्री मार्ग से होते हुए भारत लाए जाएंगे। जापान से आने वाले इस ट्रेन के पहले सेट की अगवानी सूरत करेगा, क्योंकि सबसे पहले यहीं पानी के रास्ते पहला सेट पहुंचेगा। सूरत में बुलेट ट्रेन का रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो बनाया जाएगा। फिर धीरे-धीरे डिब्बे और अन्य चीजें तैयार की जाएंगी। इसके अलावा देश की पहली बुलेट ट्रेन को जापान जैसी सुरक्षित रखने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। जिसमें यहां बुलेट ट्रेन के सुरक्षित परिचालन और किसी भी तरह की रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ऑटोमेटिक रेल ट्रैक फ्रैक्चर डिटेक्शन सिस्टम लगेगा। फिर उसके ट्रैक में गड़बड़ी होने पर पायलट को तत्काल इन्फोर्मेशन मिल सकेगी। कहा जा रहा है कि, यह जापानी प्रणाली रेल पटरियों के माध्यम से विद्युत नियंत्रण सर्किट का उपयोग करेगी। जिससे ट्रेन की पटरियों पर रेल फ्रैक्चर की पहचान हो जाया करेगी।

    सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण का काम काफी हुआ

    सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण का काम काफी हुआ

    नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अधिकारियों का कहना है कि, बुलेट ट्रेन के रूट में सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण का काम अब 82 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बाकी बची जमीन के अधिग्रहण का काम भी तेजी से किया जा रहा है। सूरत के 28 गांव में से 25 गांव के लोगों ने अपनी जमीन दे दी है। अब कामरेज तहसील के 3 गांव बचे हैं। इन गांवों के 18 में से 15 ब्लाॅक के मालिक मुआवजे को लेकर सहमत नहीं हो रहे हैं। कम मुआवजे की बात कहते हुए कुछ और इलाकों के भी किसान अभी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का मानना है कि, भूमि अधिग्रहण समय से पूरा हो जाएगा।

    कितना किराया हो सकता है ट्रेन का?

    कितना किराया हो सकता है ट्रेन का?

    मुंबई-अहमदाबाद के 508 किमी लंबे मार्ग पर दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के किराए की बात अभी स्पष्ट नहीं हुई। हालांकि, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी ने कहा था कि, इसमें सफर करने के लिए करीब 3000 रुपये चुकाने होंगे। महज 2:07 घंटे में इसके जरिए 508 किमी की दूरी तय की जा सकेगी। यानी ट्रेन की रफ्तार लगभग 320 किमी प्रति घंटे होगी।

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