दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा वाला रेलवे स्टेशन देखा क्या, ऐसा है देश का पहला ग्रीन बिल्डिंग स्टेशन

India's First Eco Friendly Railway Station at Kevadiya

अहमदाबाद। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' और उससे जुड़े अन्य पर्यटन स्थलों तक देशभर के सैलानियों को पहुंचाने के लिए अब रेल-सेवा है। इसके लिए इसी साल यहां केवड़िया में रेलवे स्टेशन तैयार हुआ। वडोदरा से केवडि़या तक रेल लाइन व केवडि़या के नवनिर्मित रेलवे स्टेशन का लोकार्पण प्रधानमंत्री ने किया। केवड़िया का निकटतम गंतव्य रेलवे स्टेशन वडोदरा है, इन दोनों स्थलों के बीच रेलवे लाइन का काम इसी साल पूरा किया गया है। यहां से वडोदरा तक 50 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछी है।

ऐसा है देश का पहला ग्रीन बिल्डिंग स्टेशन

ऐसा है देश का पहला ग्रीन बिल्डिंग स्टेशन

बता दें कि, सरकार की मुंबई-केवडिया ट्रेन चलाने की योजना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से केवडिया तक ट्रेन
चलाई जा रही हैं।। रीवा से भी केवडिया तक ट्रेनें दौड़ सकेंगी। वडोदरा के प्रतापनगर से केवडिया तक मेमू ट्रेनें भी चलाने की स्वीकृति रेलवे बोर्ड द्वारा दे दी गई है। मेमू ट्रेनें हर रोज दौड़ा करेंगी। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और केवड़िया के अन्य पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों को पहुंचाने के लिए उपरोक्त ट्रेनें अगले वर्ष से दौड़ सकती हैं। यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में अहमदाबाद से भी केवडिया तक ट्रेनें बढ़ाई जाएंगी। मौजूदा समय में वडोदरा से केवडिया तक जो रेल पटरियां बिछाई जा रही हैं, यह काम लगभग पूरा हो गया है। जब ट्रेनें चलेंगी तो सैलानी वडोदरा से सीधे ही केवडिया स्टेशन पहुंच सकेंगे।

रेल से स्टैच्यू आॅफ यूनिटी की सैर

रेल से स्टैच्यू आॅफ यूनिटी की सैर

अधिकारियों के मुताबिक, केवडिया रेलवे स्टेशन विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन बनाया जा रहा है। यह देश का पहला ग्रीन बिल्डिंग स्टेशन भी है। इधर, केवड़िया में नर्मदा तट पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी इन दिनों पर्यटकों के लिए खुली हुई है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा है। दुनिया की सबसे ऊंची इस प्रतिमा को देखने के लिए टिकट बुकिंग ऑनलाइन की जा सकती हैं। सरदार पटेल ट्रस्ट द्वारा पर्यटन से जुड़ी व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही यहां के होटल और टेंट सिटी ऑपरेटर्स ने भी तैयारियां कर रखी हैं। इसकी देखरेख से लेकर पर्यटकों के लिए व्यवस्थाएं करने की जिम्मेवारी सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट की है। बता दें कि, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सोमवार के दिन बंद रहा करेगी। प्रतिमा खुलने का समय सुबह 9 बजे और बंद होने का शाम 5 बजे रखा गया है।

इतने रुपए टिकट के लिए खर्च करने पड़ेंगे

इतने रुपए टिकट के लिए खर्च करने पड़ेंगे

सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि, लोग https://statueofunity.in/ की वेबसाइट http://sardarpatelstatue.in/book-now-2/ पर जाकर टिकट प्राप्त कर सकते हैं। https://www.soutickets.in/ से भी टिकट ले सकते हैं। इस प्रतिमा को देखने के लिए वयस्कों को टिकट के लिए 120+30 (बस किराया) और 3 साल से 15 साल तक के बच्चों को 60 + 30 (बस किराया) रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इस प्रतिमा के टिकट के कीमत में ही फूलों की घाटी भी घूमी जा सकेगी। पटेल की प्रतिमा से कुछ ही दूर 100 से ज्यादा तरह फूल देखे जा सकते हैं। इसके अलावा मेमोरियल, म्यूजियम, ऑडियो विजुअल गैलरी, एसओयू साइट और सरदार सरोवर डैम आदि सभी निहारने के लिए वयस्कों को 350+30 (बस शुल्क), और 3 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को 200+30 (बस शुल्क) रुपए खर्च करने पड़ेंगे। 3 साल से कम उम्र के बच्चों का कोई टिकट नहीं लगेगा।

अभी कैसे पहुंच सकते हैं आप यहां?

अभी कैसे पहुंच सकते हैं आप यहां?

यह विशाल मूर्ति वडोदरा से लगभग 90 किलोमीटर जबकि, गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद से करीब 200 किमी दूरी पर स्थित है। अगर मुंबई से आना चाहते हैं तो आपको राष्ट्रीय राजमार्ग 48 और राज्य राजमार्ग-64 के जरिए 420 किमी लंबी सड़क यात्रा कर यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप राज्य राजमार्ग 11 और 63 के जरिए भी इस स्थान पर पहुंच सकते हैं। यानी यदि आप किसी बाहरी प्रदेश से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने जा रहे हैं तो पहले आपको अहमदाबाद या वडोदरा जाना होगा। इन दोनों शहरों तक ट्रेनें चलती हैं। अब तो सी-प्लेन भी शुरु हो गया है। इससे पर्यटकों के लिये स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने जाने का एक और बहाना मिल गया है। आप सी-प्लेन की सवारी कर सकते हैं और केवड़िया के नए पर्यटन उपक्रमों को भी देख सकते हैं।

ये हैं 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की खासियतें

ये हैं 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की खासियतें

- यह प्रतिमा दुनिया में सबसे उूंची है, जिसकी उूंचाई 597 फीट है। यह प्रतिमा 6.5 तीव्रता के भूकंप के झटके और 220 किमी की स्पीड के तूफान का भी सामना कर सकती है।

- सरदार पटेल की इस प्रतिमा के निर्माण में 85% तांबे का उपयोग किया गया था। जिसकी वजह से सैकड़ों साल तक इमसें जंग नहीं लग सकती। 2000 टन कांसे का भी उपयोग हुआ है।

12KM इलाके में बनाए गए तालाब से घिरी

12KM इलाके में बनाए गए तालाब से घिरी

- इसे बनवाने में 2.10 लाख क्यूबिक मीटर कन्क्रीट लगा था। 6 हजार 500 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18 हजार 500 टन सरियों का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, यह 12 किमी इलाके में बनाए गए तालाब से घिरी है।

लागत 2989 करोड़ रुपए आई

लागत 2989 करोड़ रुपए आई

- सरदार पटेल ट्रस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रतिमा की लागत 2989 करोड़ रुपए आई थी। इस मूर्ति में 2.10 लाख क्यूबिक मीटर सीमेंट-कन्क्रीट इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा इसके लिए देशभर से लोहा मंगवाया गया था। किसानों ने भी धातु दी थीं।

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