पूरी फीस न दे पाए तो प्राईवेट हॉस्पिटल ने 2 साल की बच्ची मृत बताकर डिस्चार्ज की, पर वो थी जिंदा
सूरत। गुजरात में एक बच्ची के पिता प्राईवेट हॉस्पिटल के संचालकों को उनकी मांग के मुताबिक फीस देने में असमर्थ थे तो उस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स अपना फर्ज ही भूल गए। डॉक्टरों ने घायल बच्ची को मृत बताकर डिस्चार्ज कर दिया। जिसके बाद पिता बच्ची को सिविल अस्पताल लेकर गए। वहां सिविल के डॉक्टर्स ने बच्ची को बचाने की कोशिश की। वह वहां करीब आधे घंटे तक जिंदा रही। हालांकि, बच नहीं पाई। इस पर अब उस प्राईवेट हॉस्पिटल की लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं, जिसने बच्ची को मरा बताकर इलाज रोक दिया था।

जानकारी के मुताबिक, दो साल की बेबी अर्मी गुजरात में कतारगाम स्थित शास्त्री भवन निवासी अरविंदभाई पांडव की बेटी थी। जो कि, खेलते-खेलते सीढ़ियों से गिर गई थी। जिसके बाद उसे कतारगाम स्थित किरण अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी सीटी स्कैन जांच की और बोले कि बच्ची की हालत नाजुक है। दिल सही से नहीं धड़क रहा है। आईसीयू में भर्ती करना पड़ेगा, लेकिन खर्च अधिक आएगा।
बच्ची के पिता अरविंद भाई का कहना है कि, उन डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि, पहले डिपॉजिट भरना पड़ेगा, तभी वे जुटेंगे। इस तरह वो मुझसे जितने पैसे मांग रहे थे उतने देने की मेरी क्षमता नहीं थी। उसके बाद उन्होंने बेटी को मृत बताकर वहां से डिस्चार्ज कर दिया। हम बेटी को फिर सिविल अस्पताल ले गए। सिविल अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. वैदर्भी पटेल ने कहा कि, बच्ची का दिल काम कर रहा था। यदि उसे समय पर सही से उपचार मिलता तो प्राईवेट हॉस्पिटल में ही उसकी जान बच सकती थी। हालांकि, सिविल लाते-लाते देर हो चुकी थी। वह बच नहीं पाई।












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