Gujarat Election: क्या सच में गुजरात में होने जा रहा बड़ा उलटफेर? जानिए क्या है जमीनी हकीकत
Gujarat Election: गुजरात चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड तोड़ जीत की बात कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि गुजरात में हमारा सीधा मुकाबला किसी से नहीं है। नड्डा ने कहा कि प्रदेश में हम एक बार फिर से बड़ी जीत दर्ज करेंगे और पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे। लेकिन क्या सच में भाजपा का यह दावा जमीन से जुड़ा है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी दावा कर रही है कि वह प्रदेश में बदलाव करने जा रही है, जबकि कांग्रेस भी इस बात की उम्मीद जता रही है कि वह सत्ता में वापसी करने जा रही है।

इस वजह से लोगों से बेहतर कनेक्ट कर रहे पीएम मोदी
गुजरात के चुनाव प्रचार की बात करें तो भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दम पर जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। वहीं कांग्रेस की ओर से पहली बार अब राहुल गांधी गुजरात में चुनाव प्रचार करने के लिए पहुंचे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से अरविंद केजरीवाल ने मोर्चा संभाल रखा है। इन तीनों ही नेताओं में दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल हिंदी में बात करते हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजराती में बात करते हैं और लोगों के साथ भावुक नाता बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कहीं ना कहीं गुजरात में जिस तरह से पीएम मोदी लोगों से संवाद करते हैं उसका असर रैलियों में देखने को मिलता है।

क्यों कनेक्ट करते हैं पीएम मोदी
गुजरात की चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तकरीबन 80 फीसदी बातचीत अपने काम के बारे में और गुजरात के बारे में रखते हैं। वह गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, यही वजह है कि वह प्रदेश में बनाई गई योजनाओं का जिक्र करते हैं। अलग-अलग इलाकों के लिए जो योजनाएं बनाई उसके बारे में बात करते हैं। केंद्र में आने के बाद गुजरात के लिए क्या योजनाएं बनाई उसके बारे में बताते हैं।

पीएम मोदी के निशाने पर सीदे तौर पर कांग्रेस
अपनी रैलियों में पीए मोदी अपने ऊपर हुए राजनीतिक हमलों का भी जिक्र करते हैं। वह रैलियों में मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी पर ही निशाना साधते हैं। पीएम मोदी मधुसूदन मिस्त्री के औकात वाले बयान का जिक्र करते हैं, मौत का सौदागर बयान का जिक्र करते हैं, नीच वाले बयान का जिक्र करते हैं। इन बयानों के जरिए प्रधानमंत्री लोगों के बीच भावुक अपील करते नजर आते हैं। पीएम मोदी कहते हैं कांग्रेस परिवार से ऊपर कुछ नहीं देख सकती है, यह पार्टी परिवार की ही बात करती है।

आम आदमी पार्टी को करते हैं नजरअंदाज
प्रधानमंत्री मोदी रैलियों में सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी पर कोई जिक्र नहीं करते हैं। उन्होंने एक बार यह जरूर कहा कि दिल्ली के लोग आते हैं आपको भड़काने की कोशिश करते हैं, आप उनके बहकावे में मत आइएगा। लेकिन सीधे तौर पर वह आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं का ना तो नाम लेते हैं और ना ही जिक्र करते हैं। ऐसे में साफ तौर पर भारतीय जनता पार्टी आम आदमी पार्टी को अपनी चुनौती नहीं मानती है। भाजपा का मानना है कि हमारी सीधी चुनौती किसी से नहीं है, लेकिन पार्टी कांग्रेस को चुनौती जरूर मानती है।

क्या संगठन में पिछड़ रही आप
क्या सच में आम आदमी पार्टी प्रदेश में कहीं है ही नहीं। अगर इस बात का विश्लेषण करें तो आम आदमी पार्टी ने मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी मौजदूगी जरूर दर्ज कराई है। भारतीय जनता पार्टी यह जरूर मानती है कि कांग्रेस से उनका कोई मुकाबला नहीं है लेकिन इस बात को वह स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस पुरानी पार्टी है, भले ही उसमे माहौल नहीं है, लेकिन जमीन पर उनका संगठन है। जबकि आम आदमी पार्टी के पास संगठन तो है नहीं बस हवा-हवाई बात करते हैं। भाजपा का तर्क है कि हमारे पास संगठन भी है, नेता भी है, लोग भी हैं और माहौल भी है, लिहाजा हमे इसे लागू करके चुनाव में जीत दर्ज करेंगे।

क्या उलटफेर कर पाएगी आप
गोपाल इटालिया और हार्दिक पटेल दोनों ही पहले कांग्रेस में शामिल थे और दोनों एक दूसरे के साथ मंच साझा करते थे लेकिन दोनों ही नेता अब अलग दल में हैं। हार्दिक पटेल एक तरफ भाजपा के साथ हैं, जबकि इटालिया आप के साथ हैं। दोनों ही नेता पटेल समुदाय से आते हैं। ऐसे में संभव है कि पटेल फैक्टर के चलते गोपाल इटालिया आम आदमी पार्टी कुछ सीटों पर जरूर जीत दर्ज करे लेकिन क्या वह प्रदेश में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं यह देखने वाली बात होगी।












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