350km की रफ्तार से चलेगी देश की पहली बुलेट ट्रेन,बिलिमोरा-सूरत के बीच ट्रायल, कितना होगा किराया ? जानिए
भरूच, 14 अप्रैल: महाराष्ट्र में भले ही देश की पहली बुलेट ट्रेन के काम में सियासी अड़ंगा लगा हो, लेकिन गुजरात में इसका काम बहुत ही तेजी से चल रहा है। स्थिति ये है कि सभी स्टेशनों पर भी काम चल रहा है और साबरमती में बन रहा यात्री हब तो इसी साल अगस्त में तैयार होने वाला है। यही वजह है कि अब बुलेट ट्रेनों की ट्रायल की चर्चा शुरू हो गई है। इतना तय हो गया है कि देश में जब पहली बुलेट ट्रेन ट्रायल के लिए जापानी तकनीक पर आधारित विशेष ट्रैक पर दौड़ेगी तो उसकी रफ्तार हवाई जहाज के टेकऑफ की स्पीड जितनी ही होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस हाई-स्पीड ड्रीम प्रोजेक्ट पर बाकी का काम किस स्थिति में है और सबसे बड़ी मतलब की बात कि किराया क्या होगा, आइए जान लेते हैं।

350 किमी की स्पीड से ट्रायल, 320 किमी की रफ्तार से यात्रा
देश की पहली बुलेट ट्रेन के ट्रायल की रफ्तार हवाई जहाज के टेकऑफ की स्पीड के बराबर होगी। बुधवार को इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि देश की पहली बुलेट ट्रेन की ट्रायल बिलिमोरा और सूरत स्टेशनों के बीच की जाएगी, जिसकी रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और यह रफ्तार विमानों के उड़ान भरने की रफ्तार के बराबर है। गुजरात में इस तरह की ट्रायल की शुरुआत 2026 में होगी और उसके बाद दूसरे सेक्शन में भी ऐसा ही ट्रायल किया जाएगा। अलबत्ता जब बुलेट ट्रेन यात्रियों को लेकर संचालन शुरू करेगी तब इसकी रफ्तार 320 किलो मीटर प्रति घंटे की ही होगी। एक अधिकारी ने कहा, 'हम 350 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल करेंगे, लेकिन ऑपरेशनल स्पीड 320 किलो मीटर ही रहेगी।'

गुजरात में 99% जमीन अधिग्रहित
गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसलिए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाने पर जोर है और ट्रायल की तैयारी पर ध्यान दिया जा रहा है। गुजरात में इसके काम में तेजी लाना इसलिए संभव है, क्योंकि नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) राज्य में पहले से ही इसके लिए जरूरी 99% जमीन अधिग्रहित कर चुका है। अधिकारियों के मुताबिक यह ट्रेन जापानी तकनीक पर आधारित 'स्लैब ट्रैक सिस्टम' के तहत खास ट्रैक पर चलेगी, जो कि 350 किलो मीटर की रफ्तार से ट्रेनों को चलाने में सक्षम है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए पुलों का निर्माण भी परिष्कृत पुल निर्माण प्रौद्योगिकी के तहत हो रहा है, जिसकी डिजाइन जापान से खरीदी गई है।

हर महीने बन रहे हैं 200 से 250 पिलर
एनएचएसआरसीएल ने बिलिमोरा और सूरत के बीच जापानी तकनीक के आधार पर हर महीने 200 से 250 पिलर का निर्माण किया है। इस प्रोजेक्ट का सबसे लंबा पुल (1.26 किलो मीटर) नर्मदा नदी पर बन रहा है, जो कि तूफानी हवाओं और ज्वार की लहरों को झेलने में सक्षम होगा। ये पुल 2024 की जुलाई तक बन जाएगा। गुजरात और दादरा और नगर हवेली में पूरे 352 किलोमीटर के रूट के लिए सिविल कॉन्ट्रैक्ट का 100% काम भारतीय ठेकेदारों को दिया जा चुका है। गुजरात में तो 237 किलोमीटर में ट्रैक का काम भी सौंपा जा चुका है और बाकी बचे 115 किलोमीटर के लिए भी ट्रैक का काम जल्दी ठेकेदारों को दे दिया जाएगा। 352 किलो मीटर की रूट में से 330 किलोमीटर तक प्रत्येक 100 मीटर के अंतराल पर विस्तृत जियोटेक्निकल इंवेस्टिगेशन (जीटीआई) का काम भी पूरा हो चुका है। निर्माण की बेहतरी के लिए यह प्रक्रिया अच्छी मानी जाती है और इसके आधार पर 165 किलोमीटर तक की ड्रॉइंग भी पूरी हो चुकी है।

8 स्टेशनों पर विभिन्न चरणों में हो रहा है काम
अधिकारियों ने कहा है कि महाराष्ट्र से बाहर गुजरात में वापी से अहमदाबाद के साबरमती तक कुल 8 हाई-स्पीड रेलवे स्टेशनों के निर्माण का भी काम विभिन्न चरणों में है। साबरमती में हाई-स्पीड रेलवे, मेट्रो, बीआरटी और भारतीय रेलवे के दो स्टेशनों को एकीकृत करने के लिए बन रहे पैसेंजर टर्मिनल हब का काम तो इसी साल अगस्त तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। वैसे तो मुंबई से अहमदाबाद तक निर्मित होने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508.17 किलोमीटर है, जिनमें गुजरात में 8 और महाराष्ट्र में 4 स्टेशन बनने हैं। इस पूरे रूट की यात्रा को यात्री सिर्फ 2 घंटे 58 मिनट में पूरी कर सकते हैं। लेकिन, महाराष्ट्र में गैर-बीजेपी महा विकास अघाड़ी की सरकार होने की वजह से बुलेट ट्रेन के निर्माण का काम सियासी भंवर में उलझा हुआ है।
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कितना होगा बुलेट ट्रेन का किराया ?
एनएचएसआरसीएल के अधिकारी के मुताबिक, 'यह यात्रियों के लिए गेमचेंजर और हवाई यात्रा के लिए प्रतियोगी साबित होगा। बुलेट ट्रेनों में चेक-इन टाइम कम रहेगा, सीटों के आगे पैरों के लिए ज्यादा जगह होगी और सबसे बड़ी बात कनेक्टिविटी, जो कि विमानों के अंदर नहीं मिल पाती।' सूत्रों के मुताबिक इन शानदार सेवाओं के बावजूद इसका किराया हवाई जहाज के इकोनॉमी-क्लास के टिकट के बराबर ही होगा और फ्री-सामान ले जाने की लिमिट भी ज्यादा रहने की संभावना है।
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