2020 कोरोना वाला साल: गुजरात के 21.8% घरों में नहीं जल पाया एक वक्त का चूल्हा, भुखमरी से तड़पे गरीब
अहमदाबाद। वर्ष 2020 बीत रहा है। लोगों के मन में इस साल को लेकर कई बातें ऐसी उठीं, जिनमें निराशा का दंश था। कोरोना महामारी फैलने की वजह से मार्च के महीने से ही करोड़ों लोगों का जीवन परेशानियों से भर गया। यही वजह रही कि, साल 2020 अधिकांश लोगों के लिए अच्छा नहीं रहा। लॉकडाउन की वजह से जहां लोग महीनों तक घरों में ही रहे, वहीं, लाखों प्रवासी मजदूरों पर भी गहरा संकट छा गया। इस दौरान हजारों लोग तो पैदल ही घरों के लिए भूखे-प्यास निकले। महामारी के काल में काफी लोगों की जान चली गई। ऐसे समय में अब लोगों का ध्यान नए साल पर है कि, 2021 कैसा रहेगा। वहीं, एक सर्वे की रिपोर्ट की भी चर्चा हो रही है।

अन्ना सुरक्षा अभियान (गुजरात) के तहत किए 'हंगर वॉच' सर्वे में गुजरात से जुड़ी बातें बताई गई हैं। सर्वे के मुताबिक, कोरोना काल के दरम्यान गुजरात के 20.6 फीसदी घरों में अनाज ना होने की वजह से खाना नहीं बन सका। वहीं, 21.8% घरों में एक वक्त का चूल्हा नहीं जल सका। इतना ही नहीं, कोविड लॉकडाउन खत्म होने के पांच महीने बाद भी भूख की स्थिति काफी गंभीर रही। बड़ी संख्या में घरों (62 फीसदी) की आय घट गई। अनाज (53 फीसदी), दालें (64 फीसदी), सब्जियां (73 फीसदी) और अंडे/मांसाहारी पदार्थों (71 फीसदी), पोषण गुणवत्ता की मात्रा (71 फीसदी) में कमी आई। इसके अलावा 45 फीसदी घरों में भोजन खरीदने के लिए पैसे उधार लेने की जरूरत बढ़ी है।
उपरोक्त बातें जानने के लिए अन्ना सुरक्षा अभियान (गुजरात) द्वारा अहमदाबाद, आणंद, भरूच, भावनगर, दाहोद, मोरबी, नर्मदा, पंचमहल और वडोदरा सहित 9 जिलों में सर्वे कराया गया था। सर्वे से जुड़ी टीम ने बताया कि, उन्होंने ये सर्वे सितंबर और अक्टूबर के महीने में किया। सर्वे में यह भी माना गया कि, सरकार ने लोगों के लिए काफी प्रयास किए। भुखमरी पर काबू पाने के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाए। केंद्र सरकार ने राशन दिया, गुजरात सरकार ने भी अनाज वितरित किया।
हालांकि, कोरोना के प्रकोप के चलते राज्यभर में 4 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई। www.covid19india.org के आंकलन के मुताबिक, कोरोना के संक्रमण से 4138 लोग काल का ग्रास बन गए।












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