World Hindi Day 2023: विदेशों में हिन्दी को शिखर पर पहुंचाने का काम कर रहे गोरखपुर के ये साहित्यकार
आज विश्व हिन्दी दिवस है। आज आपकी मुलाकात गोरखपुर के कुछ ऐसे साहित्यकारों ने कराते हैं जो विश्व स्तर पर हिन्दी को नई पहचान देने का काम कर रहे हैं।

World Hindi Day 2023: आज हिन्दी दिवस है। आज का दिन हिन्दी प्रेमियों व साहित्कारों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं। हिन्दी अब सिर्फ भारत की ही भाषा नहीं रह गयी है। इसने विश्व के कई देशों में अपनी व्यापक पहचान बना ली है।इसे सरकार और साहित्यकारों ने व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। इसी क्रम में गोरखपुर के साहित्यकारों ने भी हिन्दी को विश्व स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रोफेसर प्रणय कृष्ण ने आइसलैंड में की खास पहल
गोरखपुर के छोटेकाजीपुर के रहने वाले प्रोफेसर प्रणय कृष्ण वर्तमान समय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं।इन्होंने देश में हिन्दी के नई पहचान देने के साथ ही आइसलैंड में भी इसे स्थापित किया। 2019 से 2021 तक इन्होंने आइसलैंड में रहने के दौरान यहां पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय संस्कृति को विभिन्न मंचों के माध्यम से यहां प्रसारित किया। प्रोफेसर प्रणय को इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन की तरफ से उन्हें आइसलैंड भेजा गया था।
प्रोफेसर विवेक शुक्ल ने डेनमार्क में की हिन्दी का बढ़ाया मान
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाले डॉक्टर विवेक वर्तमान समय में डेनमार्क में हिन्दी का मान बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वर्तमान में वह आरहुस विश्वविद्यालय डेनमार्क में भारत एंव दक्षिण एशिया कार्यक्रम के समन्वयक एंव हिन्दी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। डेनमार्क में इन्होंने हिन्दी भाषा,साहित्य व अनुवाद संबंधी कोर्सो की शुरुआत के साथ ही इन्होंने कई ऑनलाइन हिन्दी कोर्सो की शुरुआत भी की है।
ब्रिटेन में हिन्दी का परचम लहरा रहीं उषा राजे
गोरखपुर के सूरजकुंड के माधवपुर की रहने वाली उषा राजे सक्सेना इन दिनों ब्रिटेन में हिन्दी को पिछले पांच दशकों से बढ़ावा देने का काम कर रही हैं। वह लंदन में रहती है और कहानी,गजलों,निबंधों व अन्य विधाओं के माध्यम से हिन्दी को मजबूत बनाने का काम कर रही हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से परास्नातक की पढ़ाई की है।
प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन
प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन नागरपुर में 10 जनवरी 1975 को किया गया था। इसीलिए आज हिन्दी दिवस मनाया जाता है। 14सितम्बर,1949 को देश की संविधान सभा ने सर्वसम्मति से हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाया था। इसलिए प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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