Gorakhpur News: DDU University ने 43 वें दीक्षांत समारोह का लोगो किया रिलीज

Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले 43 वें दीक्षांत समारोह के प्रतीक चिन्ह (लोगो) जिसे कल कुछ तकनीकी कारणों से रोक दिया गया है को आज रिलीज किया जा रहा है।

इसे दीक्षांत समारोह के लिए अभिषेक कुमार जैसवार, एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर, ललित कला एवं संगीत विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने डिजाइन किया है।

देश के 20 से अधिक राज्यों से 250 से अधिक शोध पत्र
*अंग्रेज़ी विभाग द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस के लिए प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से शिक्षक कर रहें हैं प्रतिभाग*

ddu

शोध पत्र भेजने कि अंतिम तिथि 25 अगस्त तक विस्तारित

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) द्वारा प्रायोजित 19-20 सितंबर 2024 को आयोजित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी "एनवायरमेंटल एंड एपोकैलिप्टिक इमेजिनेशन: इको-क्रिटिकल रीडिंग्स इन साउथ एशियन लिटरेचर" में देश के विभिन्न हिस्सों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष एवं संयोजक , प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि अब तक 20 से अधिक राज्यों से 250 से भी अधिक शोध पत्र संगोष्ठी के लिए प्राप्त हो चुके हैं। इनमें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, और कई अन्य राज्यों के शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने पर्यावरण से संबंधित विविध विषयों पर अपने गहन अध्ययन को प्रस्तुत किया है।

शिक्षकों एवं शोधार्थियों की जबरदस्त रुचि को देखते हुए संगोष्ठी में पंजीकरण की अंतिम तिथि, जो पहले 15 अगस्त 2024 थी, अब 25 अगस्त 2024 तक बढ़ा दी गई है।
इस संगोष्ठी का उद्देश्य दक्षिण एशियाई साहित्य में पर्यावरणीय संकट और आपदात्मक कल्पना की समालोचनात्मक समझ को बढ़ावा देना है, ताकि साहित्य के माध्यम से वर्तमान समय की महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजा जा सके। संगोष्ठी में वक्ता और विशेषज्ञ पर्यावरणीय साहित्यिक दृष्टिकोणों पर अपने विचार साझा करेंगे, जिससे शोधार्थियों को नए दृष्टिकोणों और विचारों से परिचित होने का अवसर प्राप्त होगा।
ये हैं कुछ विषय

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट
दक्षिण एशियाई संस्कृति में जंगल की अवधारणा
पर्यावरण नैतिकता और आदिवासी ज्ञान
महाकाव्यों और संगम साहित्य में पर्यावरणवाद
पर्यावरण न्याय और सक्रियता
अस्थिरता, पर्यावरणीय शरणार्थी और विस्थापन
प्लांट ह्यूमैनिटीज़, ब्लू ह्यूमैनिटीज़, हाइड्रोफ़िक्शन और क्लाइ-फाई,
प्लास्टिक प्रदूषण, प्लास्टिसिटी और प्लास्टिक की ओर बढ़ाव,
बौद्ध साहित्य में प्रलयकारी दृष्टि,
शहरीकरण और कचरा प्रबंधन और इसका प्रकृति पर प्रभाव,
प्रकृति के धार्मिक और आध्यात्मिक आयाम,
एसडीजी और जी 20,
वैकल्पिक भविष्य की कल्पना

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