DDU University में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर होगी चर्चा, देश विदेश के सैकड़ों विद्वान प्रस्तुत करेंगे शोध

DDU University News Gorakhpur Uttar Pradesh: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा 19 और 20 सितंबर को "एनवायरनमेंटल एंड अपोकैलिप्टिक इमेजिनेशन: इकोक्रिटिकल रीडिंग्स इन साउथ एशियन लिट्रेचर" विषय पर एक आईसीएसएसआर प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और जी-20 की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है, जिसमें साहित्य के माध्यम से पर्यावरणीय चिंताओं और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के 250 से अधिक विद्वान और शोधार्थी पर्यावरणीय मुद्दों और साहित्य के बीच के संबंधों पर अपने शोध और अध्ययन प्रस्तुत करेंगे।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के प्रो. अक्षय कुमार मुख्य वक्ता होंगे और लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. निशी पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी। जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के आचार्य एवं आईसीएसआर के सचिव प्रो धनंजय सिंह भी उद्घाटन सत्र में उपस्थित रहेंगे ।

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अंग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष और संगोष्ठी के संयोजक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि यह संगोष्ठी पर्यावरण और साहित्य के बीच के अंतर्संबंधों पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। प्रो. शुक्ल ने कहा, यह सेमिनार न केवल पर्यावरणीय मुद्दों पर साहित्यिक दृष्टिकोण से किए गए नवीनतम शोध और चिंताओं को साझा करने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा, बल्कि यह सतत विकास और वैश्विक सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगा।

अध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग, प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि संगोष्ठी का समापन सत्र 20 सितंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी करेंगे। इस सत्र में ओहियो विश्वविद्यालय, यूएसए के प्रो. योगेश सिन्हा और एमिटी विश्वविद्यालय के प्रो. सत्यार्थ त्रिपाठी मुख्य वक्ता होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव श्री चंद्रभूषण त्रिपाठी इस सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह दो दिवसीय संगोष्ठी पर्यावरणीय और साहित्यिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श का एक मंच प्रदान करेगी, जिससे न केवल अकादमिक जगत बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता के प्रति समाज की संवेदनशीलता को भी एक नई दिशा मिलेगी। यह अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी दक्षिण एशियाई साहित्य को केंद्र में रखकर आयोजित की जा रही है

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