DDU University: दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आंनदीबेन ने कहीं ये बातें, जानिए छात्राओं को लेकर क्या कहा?
Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 43वां दीक्षांत समारोह महामहिम कुलाधिपति एवं राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदी बेन पटेल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह की मुख्य अतिथि एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार योगेंद्र उपाध्याय एवं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी रहीं।
जीवन में सबसे मूल्यवान बड़ों का आशीर्वाद
कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा कि
जीवन में सबसे मूल्यवान बड़ों का आशीर्वाद होता है। इसलिए आप सभी अपने से बड़ों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें। माता पिता भगवान है। उनकी सेवा करें।

बेटियों को विशेष अभिनंदन
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कुलाधिपति ने कहा सबसे ज्यादा मेडल बेटियों को मिले हैं, इसलिए मैं विशेष अभिनंदन बेटियों और उनके माता-पिता का करती हूं। इस सफलता के पीछे माता-पिता का मार्गदर्शन प्रेरणा और मेहनत है। मैं सभी अभिभावकों को बहुत-बहुत बधाई देती हूं। इस समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांव के विद्यालयों के बच्चे भी शामिल है जिन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है। इन बच्चों को आप सबने आशीर्वाद दिया।

अब आगे का सोचिए
पदक विजेताओं तथा उपाधि धारकों को म कुलाधिपति ने कहा अब आगे का सोचिए, कुछ नया करने का सोचिए। अपनी दिशा तय करिए अपनी रुचि के अनुसार। अपने बचपन के कालखंड को याद करते हुए उन्होंने कहा आज 21वीं सदी के भारत में वह सभी सुविधाएं हैं जो हमें नहीं प्राप्त हुई। आपके पास लैब है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के बजट में शिक्षा से संबंधित अनेक प्रावधान है, विश्वविद्यालय तथा विद्यार्थियों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
आने वाले 25 वर्षों में हमारे युवा नोबेल पुरस्कार प्राप्त करें
पिछले 80 वर्षों में भारत के किसी वैज्ञानिक को नोबल पुरस्कार नहीं मिला। मुझे ऐसी अपेक्षा है कि आने वाले 25 वर्षों में हमारे युवा नोबेल पुरस्कार प्राप्त करें। हमारा देश युवा है, 35 वर्ष से कम आयु के लगभग दो तिहाई से ज्यादा लोग हैं। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2027 तक आत्मनिर्भर और विकसित होने की दिशा में अग्रसर है। जिसका मंत्र मोदी जी ने 'सबका साथ, सबका विकास' दिया है। आज भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। यह मेहनत से हुआ है, परिश्रम से हुआ है।

बजट में शिक्षा के लिए 1.48 लाख करोड़
आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए केवल शिक्षा में 1.48 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। इसी तरह यूजीसी ने 19,025 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इसका लाभ कैसे मिले, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रयास करें। विश्वविद्यालय बजट को ठीक तरीके से अध्ययन कर लाभ उठाने के तरीकों पर विचार करे।
समय से घोषित हो परिणाम
माननीय कुलाधिपति ने कहा की सम्बद्ध महाविद्यालयों द्वारा समय से प्रैक्टिकल तथा आंतरिक मूल्यांकन के अंक प्रेषित नहीं करने के करना परिणाम घोषित करने में समस्या आ रही है जिसका असर विश्वविद्यालय को वर्ल्ड रैंकिंग में पड़ता है। जो संबंध महाविद्यालय समय से अंक प्रेषित नहीं करते हैं, उनको दंडित करे, उनका नाम समाचार पत्रों में प्रेषित करें और उनका भी परिणाम घोषित न करें। प्रॉब्लम नो कमिटमेंट और नो सिंसेरिटी की है। इसका नुकसान विद्यार्थियों और अभिभावक को हो रहा है।












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