गोरखपुर न्यूज: गोरखपुर जेल के मिलेनियम बैरक में कुछ इस तरह गुजरी बाहुबली की पहली रात

पूर्व विधायक व बाहुबली राजन तिवारी को बिहार से गिरफ्तार करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।उसे गोरखपुर जेल के मिलेनियम बैरक में रखा गया है।17 साल से गैर जमानती वारंट के बाद भी कोर्ट के सामने पेश न

गोरखपुर,19अगस्त: पूर्व विधायक व बाहुबली राजन तिवारी को बिहार से गिरफ्तार करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।उसे गोरखपुर जेल के मिलेनियम बैरक में रखा गया है।17 साल से गैर जमानती वारंट के बाद भी कोर्ट के सामने पेश न होने वाला माफिया अब जेल की सलाखों के पीछे है।बेचैन दिख रहा है।गुमशुम है।

rajan tiwari
माफिया की जेल में पहली रात कष्टदायक रही।वह गुमशुम रहा।किसी से कोई बात नहीं की।खाना खाया और जल्दी सो गया। जिला कारागार के मिलेनियम बैरक में वह सामान्य बंदियों की तरह रहा। जेल का भोजन करने के बाद कुछ देर तक गुमशुम बैठा रहा। सुबह नाश्ते में ब्रेड व चाय दिया गया।

गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में पेशी पर न आने वाले माफिया राजन तिवारी को कैंट थाना पुलिस ने गुरुवार को रक्सौल बार्डर के पास गिरफ्तार किया। उसे न्यायालय में पेश किया गया जहां से 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। जेल पहुंचने पर तलाशी के बाद मिलेनियम बैरक में भेज दिया गया, इस बैरक में पहले से ही 100 बंदी रखे गए हैं।

तीन दिन तक राजन को इसी बैरक में सामान्य बंदियों के साथ रखा जाएगा। उसके बाद जेल प्रशासन हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट करेगा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने बताया कि माफिया राजन तिवारी की निगरानी करने के लिए बंदी रक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। तीन दिन तक उसे मिलेनियम बैरक में ही रखा जाएगा।

उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर के मुकदमे में पेशी न होने पर राजन तिवारी की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी ने सीओ कैंट श्याम देव के नेतृत्व में तीन टीम का गठन किया था। राजन तिवारी के खिलाफ 17 साल से जारी वारंट को दबाया जा रहा था।वर्ष 1998 में दुर्दांत श्रीप्रकाश शुक्ल, बाहुबली पूर्व विधायक राजन तिवारी समेत चार के खिलाफ कैंट पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई मामले में इसी साल श्रीप्रकाश शुक्ल को एसटीएफ ने मुठभेड़ ने मार गिराया था।

बता दें कि इसमें दो अन्य बदमाशों की भी मौत हो चुकी है। बाहुबली राजन तिवारी वर्ष 2005 में पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज विधानसभा से निर्दलीय लड़ा था और जीत भी गया था. उत्तर प्रदेश के गगहा के सोहगौरा गांव का रहने वाला राजन तिवारी कई दशक से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में अपना ठिकाना बना गैंगस्टर बन बैठा था। कुछ दिनों पहले उसने गोरखपुर में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया था। भनक लगते ही पुलिस ने शिकंजा कस उत्तर प्रदेश के माफिया की सूची में उसका नाम शामिल कर दिया था।

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