Gorakhpur News: कौन सा कीट किस बिमारी का है वाहक अब छात्र कर सकेंगे शोध
वायरोलॉजी में शोध करने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है।इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च ने एमएससी इन पब्लिक हेल्थ एंटमोलाजी (जन स्वास्थ्य कीट विज्ञान में परास्नातक) का कोर्स तैयार किया है। इसे अपनी पांच शाखाओं में लागू क
गोरखपुर,6 अगस्त: वायरोलॉजी में शोध करने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है।इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च ने एमएससी इन पब्लिक हेल्थ एंटमोलाजी (जन स्वास्थ्य कीट विज्ञान में परास्नातक) का कोर्स तैयार किया है। इसे अपनी पांच शाखाओं में लागू कर दिया है, इसमें से एक गोरखपुर का आरएमआरसी भी है। सभी शाखाओं को पुडुचेरी विश्वविद्यालय से संबद्धता मिल गई है। इसी सत्र से पढ़ाई शुरू हो जाएगा।

कीट विज्ञान में अध्ययन के साथ ही छात्र डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, इंसेफ्लाइटिस, स्क्रब टाइफस आदि बीमारियों के वाहक कीटों पर शोध भी करेंगे। बीमारी फैलने के कारणों का पता लगाया जाएगा।कौन सा वायरस किस बीमारी का वाहक है इस पर भी शोध किया जाएगा। ताकि समय से बीमारी के कारणों का पता कर उचित इलाज किया जा सके।
दो साल का होगा कोर्स
जन स्वास्थ्य कीट विज्ञान में परास्नातक का कोर्स दो साल का होगा।इसमें चार सेमेस्टर होंगे।छात्रों को मालिक्यूलर तकनीक, जीन सिक्वेंसिंग, पीसीआर, एलाइजा, इम्यूनोब्लाटिंग की मालिक्यूलर डायग्नोस्टिक के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
यहां लागू हुए कोर्स क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र गोरखपुर,वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर पुडुचेरी, नेशनल इंस्टीट्यूट आफ रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ जबलपुर,राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज पटना,क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र, डिब्रूगढ़ में यह कोर्स शुरु किए गए हैं।
आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि कीटों के अध्ययन से यह बात पता चल सकेगी कि किस कीट में कौन सी बीमारी आ रही है। इससे कीटों व बीमारी के प्रसार की रोकथाम की जा सकेगी।












Click it and Unblock the Notifications