Youtube से सीखा नकली नोट छापने का तरीका, फिर प्रिंटर से छापकर बाजार में यूं खपाया

गाजियाबाद, 08 जनवरी: अगर आप बाजार में किसी दुकान से खरीददारी करते है तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है। क्योंकि दुकानदार से मिलने वाले 100 रुपए से लेकर दो हजार रुपए तक के नोट नकली भी हो सकते हैं। जी हां...ऐसे ही एक गैंग का खुलासा गाजियाबाद पुलिस ने किया है, जो प्रिंटर के जरिए नकली नोट छापकर दुकानों पर सप्लाई करता था। गैंग का खुलासा करते हुए पुलिस ने सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में गैंग के मास्टरमाइंड ने बताया कि नकली नोट बनाने का तरीका यू-ट्यूब से सीखा था।

Ghaziabad Police caught seven members to make fake currency printing

एएसपी आकाश पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले काफी दिनों से पुलिस को नकली नोट चलाए जाने की सूचना मिल रही थी। शुक्रवार 07 जनवरी को जब नगर कोतवाली पुलिस पक्की खबर मिली तो इस्लाम नगर निवासी यूनुस के मकान छापेमारी की गई तो मकान से 6.59 लाख के नकली नोट, कंप्यूटर, स्कैनर, प्रिंटर और कागज के बंडल बरामद हुए। मौके से यूनुस के अलावा अमन, रहबर व सोनू उर्फ गंजा, आजाद, आलम उर्फ आशीष तथा फुरकान अब्बासी को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से जो 6.59 लाख रुपए बरामद हुए है इनमें 100 से लेकर 2000 के नोट शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, आठवीं पास आजाद गिरोह का मास्टरमाइंड है। आजाद, सोनू और यूनुस नकली नोट बनाने का काम करते थे, जबकि बाकी आरोपी नकली नोटों को बाजार में चलाने का काम करते थे। हैरानी की बात तो ये है कि इसके लिए यहां कोई बड़ा तामझाम नहीं था। घर में इस्तेमाल होने वाले मामूली प्रिंटर से ही यहां नकली नोट छापे जा रहे थे। चंद सेकेंड में एक सफेद कागज पर 200 के चार नकली नोट छाप दिए गए। नकली नोट छापने का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि घर के इसी प्रिंटर से 7 लोगों के इस गैंग ने मार्केट में 12 लाख से ज्यादा के नकली नोट चला दिए।

गिरोह के मास्टरमाइंड आजाद ने बताया कि उसने कुछ महीने पहले एक पेट्रोल पंप पर एक व्यक्ति से अपने नोट के खुले रुपए लिए थे, उन खुले रुपए में कुछ जाली नोट पाए गए, लेकिन वो बाजार में चल गए। इसके बाद उसने नकली नोट बनाने की योजना तैयार की। उसने यूट्यूब और कुछ अन्य जगहों से नकली नोट बनाना सीखा और अपने गैंग में और लोगों को भी शामिल किया। उसने बताया कि प्रिंटर से नोट छापने के बाद उसमें सिल्वर लाइनिंग जैसी बाकी बारिकियों का भी पूरा ध्यान रखा जाता था। डिमांड के हिसाब नकली नोट छापे जाते थे और उनकी सप्लाई बाजार में कर दी जाती थी। जाली नोटों की सप्लाई 20% के कमीशन पर आगे की जाती थी।

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