जहां जन्मा था बाबर, उज्बेकिस्तान में वहीं जाकर रुपाणी ने सरदार पटेल स्टैच्यू का किया अनावरण
गांधीनगर। लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर उज्बेकिस्तान में खास मार्ग तैयार किया गया है। इसके साथ ही वहां एक प्रतिमा का अनावरण भी हुआ है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी 6 दिन के प्रवास पर उज्बेकिस्तान में है, उन्होंने ही वहां के अंदीझान नगर में सरदार पटेल मार्ग एवं स्टैच्यू का लोकार्पण किया है। अंदीझान वही स्थान है, जहां मुगल शासक बाबर का जन्म हुआ था। अपनी उज्बेकिस्तान यात्रा में मुख्यमंत्री रुपाणी व्यापार के नए अवसर तलाशने एवं कपड़ा, कृषि, सोना तथा कीमतों रत्नों, फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में अनुबंध हासिल करने पर जोर देंगे।

गुजरात के मुख्यमंत्री का 6 दिवसीय उज्बेक दौरा
6 दिन के प्रवास के दौरान उजबेकिस्तान में रुपाणी के साथ कई नामचीन गुजराती बिजनेसमैन भी होंगे। सूत्रों के अनुसार, इस प्रवास में उनके साथ गुजरात के 40 व्यापार और उद्योग गृहाें क प्रतिनिधियों तथा गुजरात सरकार के 10 अधिकारी भी शामिल होंगे। इस दौरान उज्बेक सरकार के साथ एमओयू होंगे, इसी उद्देश्य से विजय रुपाणी ने इस यात्रा का आयोजन किया है। वे यहां इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट फोरम में हिस्सा लेंगे।

बाबर के जन्मस्थल पर भी गए रुपाणी
बता दें कि, अंदीझान शहर बाबर का जन्मस्थान भी है। भारत में मुगल शासन की नींव रखने वाले आक्रांता का यहीं 1483 में जन्म हुआ था। बाबर का पूरा नाम जहीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर था। अब भारत के पहले गृह मंत्री पर एक सड़क का नामकरण भी इसी शहर में किया जा रहा है।

भारत पर 5 बार किया आक्रमण, आखिर में कर लिया था कब्जा
अंदीझान में जन्मा बाबर तैमूर लंग का वंशज था और विश्वास रखता था कि चंगेज़ ख़ान उनके वंश का पूर्वज था। मुबईयान नामक पद्य शैली का जन्मदाता बाबर को ही माना जाता है। 1504 ईस्वी में बाबर ने काबुल को उसके बाद 1507 में कंधार को जीता। 1519 से 1526 ईस्वी तक बाबर ने भारत पर 5 बार हमले किए। हालांकि, सफलता उसे 1526 में पानीपत के युद्ध में मिली। पानीपत में उसने दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल वंश की नींव रखी। 1530 ईस्वी में बाबर की मौत हो गई।












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