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भारत के इस राज्य में सड़क हादसों से हर रोज जा रहीं 22 जान, पूरी रिपोर्ट और भी चौंकानी वाली

Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात में हर रोज औसतन 22 लोगों की जान सड़क हादसों की वजह से चली जाती है। बीते पांच सालों में यहां 39000 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। 2013 से 2017 के बीच कुल 11,32,26 हादसे सामने आए। वहीं, सूबे में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाकर हादसों में 50 फीसदी तक कमी करने का सरकारी दावा फुस्स हो गया।

गुजरात में राजमार्गों पर सबसे घातक दुर्घटनाएं

गुजरात में राजमार्गों पर सबसे घातक दुर्घटनाएं

एक अधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते साल ही गुजरात में 2018 में 18745 दुर्घनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 7974 लोग मारे गए। वहीं, पांच साल के सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा घातक दुर्घटनाएं राजमार्गों पर होने की जानकारी सामने आई है। इन दुर्घटनाओं की बड़ी वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना, मोबाइल पर बात करने वाहन चलाना, वाहन की गति अधिक रखना और गलत तरीके से ओवरटेक करना रहा। जिसके चलते वाहन चालक अपनी जान तो गंवा ही देते बल्कि और दूसरों की जान भी लेने से नहीं चूकते।

इन चार शहरों में हुए सर्वाधिक सड़क हादसे

इन चार शहरों में हुए सर्वाधिक सड़क हादसे

गुजरात के चार शहरों अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा और सूरत में सबसे अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं है। पूरे राज्य में पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें और फिर औसत निकालकर देखें तो हर दिन औसतन 22 लोग वाहन दुर्घटना में मारे जा रहे हैं। इन सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि का बड़ा कारण यातायात विनियमन की लापरवाही भी बताया जा रहा है। दूसरी ओर गुजरात में वाहनों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस की संख्या भी कम है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह से भी नहीं हो पा रहा काबू

सड़क सुरक्षा सप्ताह से भी नहीं हो पा रहा काबू

राज्य सरकार हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाती है और ड्राइवरों को यातायात नियमों का पालन करने का अनुरोध करती है। फिर, भी विभिन्न कारणों से दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है।इसके पीछे सुरक्षा तंत्र के तर्क हैं कि यहां वाहन की संख्या तेजी से बढ रही है, जो भी बढ़े आंकड़ों के लिए जिम्मेदार है। पहिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल राज्य में 2.35 करोड वाहन चल रहे थे। जिसमें सबसे अधिक 1.54 करोड़ टू-व्हिलर पाए गये।

दावा, 2020 तक आधे से भी कम होंगे हादसे

दावा, 2020 तक आधे से भी कम होंगे हादसे

सड़क हादसों पर आई रिपोर्ट के बाद अब गुजरात सरकार का दावा है कि 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम हो ही जाएगी। सरकार की मानें तो बेहतर व्यवस्थाओं की वजह से हादसों में 50% की कमी आएगी। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए राजमार्ग और शहर की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करके यातायात का उल्लंघन करने के लिए जुर्माना लगाया जा रहा है।

22 से 35 वर्ष के युवा ज्यादा शिकार

22 से 35 वर्ष के युवा ज्यादा शिकार

सर्वेक्षण के अनुसार, दुर्घटनाओं में चौंका देने वाली यह बात सामने आई है कि 22 से 35 वर्ष के युवा दुर्घटनाओं में ज्यादा जान गंवा रहे हैं। ऐसे में जबकि, गुजरात में लगातार सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, तब भी राज्य में सड़क दुर्घटनाएं नहीं थम रहीं और यह स्थिति भयावह होती जा रही है। बता दें कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान, पुलिसकर्मी लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने की सलाह देते हैं और यातायात नियमों की समज भी देते हैं। वहीं, राजमार्ग पर साइन बोर्ड बनाए गए हैं, फिर भी लोग मर रहे हैं।

पिछले छह वर्षों में गुजरात में घटी दुर्घटनाएं

पिछले छह वर्षों में गुजरात में घटी दुर्घटनाएं

वर्ष दुर्घटना मृत्यु
2013 25391 7613

2014 23712 7955

2015 23183 8819

2016 21859 8136

2017 19081 7289

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